
भागलपुर। गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच आम लोगों की आवाजाही को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने नाव परिचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में शुक्रवार को बरारी घाट स्थित नियंत्रण कक्ष में नाविकों के बीच परिचालन व्यय के लिए आर्थिक सहायता राशि का वितरण किया गया। जिला प्रशासन की ओर से यह सहायता उन नाविकों को प्रदान की गई है, जिन्होंने निर्धारित मानकों के अनुरूप अपनी नावों का पंजीकरण कराया है और यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है।
बरारी घाट पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्वयं नाविकों को चेक प्रदान किए। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव सहित कई प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने नाविकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकार और जिला प्रशासन की ओर से नाव संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में यात्रियों से अवैध रूप से किराया वसूलना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई प्रक्रिया
जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने ऐसे नाविकों को आगे आने के लिए कहा था, जिनके पास 50 यात्रियों की क्षमता वाली नावें उपलब्ध हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नदी पार करने वाले लोगों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिले और नाव संचालन का खर्च नाविकों के लिए बोझ न बने।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी और इसके साथ ही नाव संचालन व्यय के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी भेजा गया था। प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप बहुत कम समय में राशि उपलब्ध हो गई और 4 जून की शाम से ही नाविकों के बीच चेक वितरण का कार्य शुरू कर दिया गया।
सहायता मिलने के बाद भी शिकायतें आने पर जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आर्थिक सहायता मिलने के बावजूद कुछ नाविक यात्रियों से पैसे वसूल रहे हैं। प्रशासन को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि कुछ नाव संचालक यह कहकर यात्रियों से किराया ले रहे हैं कि उन्हें प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि कुछ नाविकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी ऐसे बयान दिए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सहायता राशि का वितरण शुरू हो चुका है और पात्र नाविकों को भुगतान किया जा रहा है। प्रशासन इस तरह की गतिविधियों को गंभीरता से ले रहा है।
जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी भी नाविक के खिलाफ यह शिकायत मिलती है कि उसने किसी यात्री से अवैध रूप से पैसे वसूले हैं, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित नाव को जब्त किया जाएगा और नाविक की गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
जिला प्रशासन का कहना है कि वर्तमान मौसम और नदी की स्थिति को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय है। इसी कारण केवल उन्हीं नावों को संचालन की अनुमति दी जा रही है जो निर्धारित मानकों को पूरा करती हैं और पर्याप्त क्षमता रखती हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि छोटी नावों को संचालन की अनुमति नहीं देने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। कई बार तेज हवा, खराब मौसम और नदी में बढ़े जलप्रवाह के कारण छोटी नावों के पलटने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है।
उन्होंने कहा कि बड़े आकार की और पर्याप्त क्षमता वाली नावें अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होती हैं तथा आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं। इसलिए प्रशासन केवल उन्हीं नावों के संचालन को प्राथमिकता दे रहा है जो निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं।
आधे घंटे में होगा पंजीकरण
कार्यक्रम में प्रशासन की ओर से उन नाविकों को भी आमंत्रित किया गया जो अभी तक पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन नाविकों के पास 50 यात्रियों की क्षमता वाली नावें हैं और वे परिचालन करना चाहते हैं, वे अपने आवश्यक दस्तावेज नियंत्रण कक्ष में जमा करें।
उन्होंने बताया कि पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल और त्वरित बनाया गया है। सभी जरूरी कागजात उपलब्ध होने पर मात्र आधे घंटे के भीतर नाव का पंजीकरण किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित नाविक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नाव संचालन कर सकेंगे और उन्हें निर्धारित सहायता राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन और पुलिस की संयुक्त निगरानी
नदी घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। घाटों पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय है और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नावों के संचालन, यात्रियों की संख्या और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की नियमित जांच भी की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि नाव परिचालन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक है। नाविकों, स्थानीय लोगों और यात्रियों से भी नियमों का पालन करने की अपील की गई है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बरारी घाट स्थित नियंत्रण कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनसंपर्क विभाग, आपदा प्रबंधन, विधि-व्यवस्था, पुलिस और राजस्व विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने नाविकों से संवाद कर उन्हें प्रशासन की योजनाओं और नियमों की जानकारी भी दी।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में भी घाटों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी सहायता का लाभ वास्तविक और पात्र नाविकों तक पहुंचे तथा आम नागरिकों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके।
जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि नाव संचालन के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में यात्रियों से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


