
पटना: बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। राज्य के गांवों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोड़ने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार जैसी आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ग्रामीण कार्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण, चौड़ीकरण और नई संपर्क परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में चल रही सड़क, पुल और संपर्क मार्ग परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, प्रगति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास में ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है और गांवों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पहले से निर्मित ग्रामीण सड़कों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा जहां आवश्यकता हो वहां सुदृढ़ीकरण का कार्य तत्काल शुरू किया जाए। उनका कहना था कि सड़क निर्माण जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका समय-समय पर रख-रखाव भी है।
उन्होंने कहा कि कई बार सड़कें बनने के बाद उनके रख-रखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिसके कारण कुछ वर्षों में ही उनकी स्थिति खराब हो जाती है। इससे ग्रामीण जनता को आवागमन में परेशानी होती है और सरकार के संसाधनों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए सड़क निर्माण के साथ-साथ प्रभावी अनुरक्षण व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद सभी प्रमुख सड़कों की स्थिति का नियमित मूल्यांकन किया जाए। जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं या उनकी क्षमता वर्तमान यातायात के अनुरूप नहीं है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क की मरम्मत में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैठक के दौरान बढ़ती जनसंख्या और यातायात के दबाव को देखते हुए ग्रामीण सड़कों के चौड़ीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में वाहन संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही कृषि, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के कारण परिवहन की आवश्यकता भी बढ़ी है। ऐसे में कई सड़कें अब अपनी मूल क्षमता से अधिक भार वहन कर रही हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन ग्रामीण सड़कों पर यातायात का दबाव अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चौड़ा किया जाए। चौड़ी सड़कें न केवल यात्रा को सुरक्षित बनाती हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी कम करती हैं। इसके अलावा बेहतर सड़क नेटवर्क से गांवों और कस्बों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास का आधार होता है। जब किसी गांव तक अच्छी सड़क पहुंचती है तो वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार से जुड़े अवसर भी बढ़ते हैं। बेहतर सड़कें किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में मदद करती हैं, विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज तक पहुंचने में सुविधा देती हैं तथा मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायक होती हैं।
नई सड़क परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई योजनाओं का चयन पूरी तरह जनहित, यातायात की आवश्यकता और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाए। केवल सड़क निर्माण के लिए सड़क बनाने के बजाय ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जिनका सीधा लाभ बड़ी आबादी को मिल सके।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी भी संपर्क मार्गों और पुलों की आवश्यकता है। ऐसे इलाकों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नए पुलों और पहुंच पथों के निर्माण पर भी जोर दिया, ताकि नदियों और अन्य प्राकृतिक बाधाओं के कारण प्रभावित क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा मिल सके।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि राज्य में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सभी परियोजनाओं में तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखी जाए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रभावी निरीक्षण प्रणाली विकसित की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करते समय क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा जाए। राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों को विकास का समान अवसर मिलना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है, वहां विशेष ध्यान दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण सड़क नेटवर्क में सुधार से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़कें ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगी, परिवहन लागत कम होगी और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके अलावा पर्यटन, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र को भी नई गति मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। अक्सर देखा जाता है कि परियोजनाएं विभिन्न कारणों से लंबित हो जाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है और लोगों को अपेक्षित लाभ समय पर नहीं मिल पाता। इसलिए प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए और उसकी नियमित समीक्षा की जाए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत और टिकाऊ ग्रामीण परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके लिए नई तकनीकों और आधुनिक निर्माण मानकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दिवेश सेहरा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण सड़कें केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि विकास का मार्ग हैं। बेहतर सड़क संपर्क से गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा और बिहार के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप ग्रामीण सड़क और पुल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए ताकि राज्य के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंच सके।


