
गोपालगंज: जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने गुरुवार को गोपालगंज में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बिहार सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में हुई अगलगी की घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताते हुए मृतकों और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और नेतृत्व क्षमता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार के कई दावों और हालिया बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं बल्कि परिणाम चाहती है।
मीडिया ब्रीफिंग की शुरुआत मुजफ्फरपुर में अस्पताल में लगी आग की घटना पर प्रतिक्रिया से हुई। प्रशांत किशोर ने कहा कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरियों को उजागर करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि किसी भी अस्पताल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर नहीं चुकाना चाहिए। उन्होंने जन सुराज परिवार की ओर से मृतकों के परिजनों और प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस प्रकार की घटनाओं को केवल जांच तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और नियमित निरीक्षण की मजबूत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जाए तो कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
इसके बाद प्रशांत किशोर ने राज्य के राजनीतिक नेतृत्व और मंत्रिमंडल को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता लंबे समय से शासन व्यवस्था में सुधार की उम्मीद कर रही है, लेकिन जिन लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उनसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि यदि ऐसे लोगों को स्वास्थ्य मंत्री, शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया जाएगा जिनके कामकाज और सार्वजनिक जीवन को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं, तो राज्य को बेहतर परिणाम मिलने की संभावना कम हो जाती है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति उसके नेतृत्व की क्षमता और नीतिगत दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। यदि नेतृत्व का ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर केंद्रित नहीं होगा तो विकास की गति प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया कि बिहार की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं बल्कि नीति और प्राथमिकताओं की कमी है।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन जमीनी स्तर पर स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर हैं, जो इस बात का संकेत है कि शिक्षा प्रणाली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए एक बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें कथित रूप से फिजिक्स की यूनिवर्सिटी स्थापित करने की बात कही गई थी। प्रशांत किशोर ने इस प्रस्ताव की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि दुनिया भर में विश्वविद्यालयों की स्थापना व्यापक विषयों और बहु-विषयक शिक्षा को ध्यान में रखकर की जाती है। उन्होंने पूछा कि क्या दुनिया में कहीं केवल फिजिक्स के लिए अलग विश्वविद्यालय की व्यवस्था है, जिसे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसी घोषणाओं से अधिक जरूरत मजबूत स्कूल शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों और तकनीकी शिक्षा के विस्तार की है। उनके अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए पहले मौजूदा संस्थानों को मजबूत करना आवश्यक है ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि जिन शैक्षणिक योग्यताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर कुछ राजनीतिक नेता सार्वजनिक रूप से अपनी उपलब्धि बताते हैं, उनके बारे में भी तथ्यों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को सही जानकारी मिलनी चाहिए और राजनीतिक नेतृत्व को अपनी उपलब्धियों तथा दावों के प्रति पारदर्शी होना चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार की समग्र स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में अभी भी बड़े सुधार की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यदि सरकार इन मूलभूत क्षेत्रों पर गंभीरता से काम करे तो बिहार तेजी से आगे बढ़ सकता है। लेकिन केवल घोषणाओं और राजनीतिक बयानबाजी से जनता की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जन सुराज अभियान का उद्देश्य लोगों के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए राजनीतिक विकल्प तैयार करना है। उनका दावा था कि बिहार के गांवों और कस्बों में लोगों की प्राथमिक चिंता रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और कानून व्यवस्था है। इसलिए राजनीति का केंद्र भी इन्हीं मुद्दों को होना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता अब विकास और सुशासन के मुद्दों पर अधिक सजग हो चुकी है। लोग केवल चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे यह देखना चाहते हैं कि सरकारें अपने वादों को कितना पूरा करती हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता का मूल्यांकन भी इसी आधार पर होगा कि किसने वास्तव में लोगों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया।
गोपालगंज में आयोजित इस मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने एक ओर जहां मुजफ्फरपुर अस्पताल अगलगी मामले पर संवेदना व्यक्त की, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार की कार्यशैली, शिक्षा नीति और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठाए। उनकी टिप्पणियां आगामी राजनीतिक विमर्श में चर्चा का विषय बन सकती हैं, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर राज्य के नेतृत्व, नीतियों और विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि उनके इन आरोपों और सवालों पर सरकार तथा संबंधित नेताओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।


