
भागलपुर: सरकारी बकाया राशि की वसूली को लेकर भागलपुर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लंबे समय से लंबित एक नीलामपत्र वाद में कार्रवाई करते हुए न्यायालय ने बकायेदार को दीवानी जेल भेजने का आदेश दिया है। यह कदम सरकारी देनदारियों की वसूली और सार्वजनिक मांगों से जुड़े मामलों में कानून के प्रभावी अनुपालन की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में विधिसम्मत कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और बकाया राशि जमा नहीं करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे।
मामला नीलामपत्र वाद संख्या 2047/2024-25 से संबंधित है, जो अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) सह नीलामपत्र पदाधिकारी, भागलपुर के न्यायालय में लंबित था। इस वाद में संबंधित व्यक्ति पर सरकारी मद में पांच लाख रुपये से अधिक की राशि बकाया थी। लंबे समय तक भुगतान नहीं किए जाने के कारण मामले में न्यायालय की ओर से कई स्तरों पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद बकायेदार द्वारा बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद न्यायालय ने कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों का उपयोग करते हुए कठोर निर्णय लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवगछिया क्षेत्र के गोशाला रोड निवासी चंदन कुमार पर कुल ₹5,29,053.43 की राशि सरकारी बकाया के रूप में देय थी। यह राशि लंबे समय से जमा नहीं की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा पूर्व में भी आवश्यक आदेश जारी किए गए थे, लेकिन बकाया का भुगतान नहीं होने के कारण वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
बताया गया कि बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ बॉडी वारंट जारी किया गया था। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नवगछिया थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित बकायेदार को गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। गिरफ्तारी के बाद न्यायालय ने मामले की विस्तृत समीक्षा की और बकायेदार को अपना पक्ष रखने का अवसर भी प्रदान किया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानने का प्रयास किया कि आखिर बकाया राशि का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति न तो पूरी राशि जमा कर सका और न ही ऐसा कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत कर पाया, जिसके आधार पर उसे राहत दी जा सके। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, वाद की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया।
इसके बाद बिहार एवं उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी अधिनियम, 1914 के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायालय ने आदेश पारित किया कि बकायेदार को 4 जुलाई 2026 तक अथवा विधि के अनुसार रिहाई के लिए पात्र होने तक शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा, भागलपुर स्थित दीवानी जेल में निरुद्ध रखा जाए। न्यायालय का यह आदेश सरकारी बकाया की वसूली से संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत पारित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पब्लिक डिमांड रिकवरी अधिनियम का उद्देश्य सरकारी देनदारियों और सार्वजनिक मांगों की वसूली को प्रभावी बनाना है। जब किसी व्यक्ति द्वारा लंबे समय तक सरकारी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता और प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तर पर उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने के बावजूद राशि जमा नहीं की जाती, तब कानून में कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसी क्रम में न्यायालय द्वारा दीवानी कारावास का आदेश भी दिया जा सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, न्यायालय ने नियमानुसार निरुद्ध अवधि के लिए निर्वाह भत्ता भी निर्धारित किया है। यह प्रक्रिया कानून के तहत अनिवार्य मानी जाती है और ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा आवश्यक वित्तीय प्रावधानों का भी पालन किया जाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप की गई है और इसमें सभी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन किया गया है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न विभागों में लंबित बकाया राशि की वसूली प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। कई मामलों में नोटिस, वारंट और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद भुगतान नहीं होने पर न्यायालय की सहायता से वसूली की कार्रवाई की जाती है। इससे न केवल सरकारी राजस्व की सुरक्षा होती है बल्कि कानून के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
भागलपुर प्रशासन का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई उन लोगों के लिए भी संदेश है जो सरकारी बकाया राशि का भुगतान करने में अनावश्यक विलंब करते हैं। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में लापरवाही या भुगतान से बचने का प्रयास अंततः कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसलिए संबंधित व्यक्तियों को समय पर बकाया राशि जमा करने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, सार्वजनिक मांगों की वसूली से जुड़े मामलों में न्यायालय का यह आदेश यह दर्शाता है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी बकाया राशि जमा करने से लगातार बचता है, तो उसके खिलाफ दीवानी कारावास जैसी कार्रवाई भी संभव है। यह व्यवस्था सरकारी हितों की रक्षा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।
फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित बकायेदार को भागलपुर स्थित शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा के दीवानी जेल प्रभाग में भेज दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर या कानून द्वारा उपलब्ध किसी वैध प्रावधान के तहत राहत प्राप्त होती है, तो आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। वहीं प्रशासन ने संकेत दिया है कि सरकारी बकाया राशि की वसूली को लेकर भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी ताकि राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके और सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


