
पटना, 3 जून 2026। बिहार सरकार ने कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि योजनाओं के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई या खानापूर्ति नहीं चलेगी, बल्कि किसानों को जमीन पर उसका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हर योजना का परिणाम खेतों में दिखाई देना चाहिए।
कृषि भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने पौधा संरक्षण संभाग एवं मिट्टी जांच प्रयोगशाला, बिहार पटना के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में कीट प्रबंधन, ड्रोन आधारित छिड़काव, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा प्रयोगशालाओं के संचालन एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजनाओं पर चर्चा हुई।
ड्रोन छिड़काव की होगी वैज्ञानिक निगरानी
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि फसलों में कीट नियंत्रण और आधुनिक खेती के लिए ड्रोन आधारित छिड़काव समय की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ड्रोन उड़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रोन के माध्यम से किए जाने वाले कीटनाशी और तरल उर्वरक छिड़काव की नियमित जांच की जाए। साथ ही यह अध्ययन किया जाए कि छिड़काव का फसलों और कीटों पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ रहा है।
इसके लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित करने का भी निर्देश दिया गया, जो वैज्ञानिक तरीके से पूरे अभियान की निगरानी करेगी।
किसानों से लिया जाएगा सीधा फीडबैक
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रोन छिड़काव के बाद संबंधित किसानों का वीडियो रिकॉर्ड तैयार किया जाए। साथ ही यह सत्यापित किया जाए कि जिस क्षेत्र में छिड़काव दिखाया गया है, वहां वास्तव में कार्य हुआ भी है या नहीं।
उन्होंने कहा कि विभाग अब सीधे किसानों से फीडबैक लेकर योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करेगा। इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
पौधा संरक्षण योजनाओं पर 19.82 करोड़ रुपये खर्च
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पौधा संरक्षण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर कुल 1,982.60 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
इन योजनाओं में शामिल हैं:
- ड्रोन से कीटनाशी एवं तरल उर्वरक छिड़काव योजना
- बगीचों एवं फसलों में कीट प्रबंधन योजना
- उपादान वितरण योजना
- पौधा संरक्षण परामर्श योजना
- पौधा संरक्षण परामर्श एवं उपादान योजना
- पीपीपी मोड में ड्रोन द्वारा एरियल स्प्रे योजना
मंत्री ने इन सभी योजनाओं के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
कीटनाशक दुकानों की होगी ग्रेडिंग
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्यभर की कीटनाशक दवा दुकानों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि दुकानों का मूल्यांकन उनकी गुणवत्ता, किसानों को दी जा रही सेवाओं और बिक्री के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता की दवाएं उपलब्ध होंगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मिट्टी जांच को बताया कृषि की आधारशिला
मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए मिट्टी का स्वस्थ होना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य ही कृषि की वास्तविक आधारशिला है।
बैठक में बताया गया कि राज्य योजना के तहत मिट्टी जांच, बीज विश्लेषण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं के संचालन एवं सुदृढ़ीकरण पर वर्ष 2025-26 में 774.21 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
वहीं केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना पर 5,062.84 लाख रुपये व्यय किए गए हैं।
स्वयं गांवों में जाकर करेंगे निरीक्षण
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संकेत दिया कि अब योजनाओं की निगरानी केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं विभिन्न गांवों का दौरा करेंगे और मिट्टी जांच की प्रक्रिया, प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली तथा किसानों को मिलने वाले लाभों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए और कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाए।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और प्रभावी कीट नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी योजना में लापरवाही या केवल कागजी उपलब्धियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—किसानों को वास्तविक लाभ और खेतों में दिखाई देने वाले परिणाम।


