
बिहार सरकार के गृह विभाग (कारा) ने अररिया मंडल कारा के उपाधीक्षक प्रवीण कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक विचाराधीन बंदी की रिहाई में गंभीर लापरवाही और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने के आरोप में की गई है।
विभागीय जांच में पाया गया कि बांग्लादेशी मूल के एक बंदी को आवश्यक सत्यापन और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन किए बिना जेल से मुक्त कर दिया गया था। मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए गृह विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।
विचाराधीन बंदी की रिहाई बनी कार्रवाई का कारण
जानकारी के अनुसार अररिया थाना कांड संख्या 521/2004 से संबंधित विचाराधीन बंदी नवाब मंडल कारा में बंद था। दस्तावेजों के अनुसार उसका मूल निवास बांग्लादेश के चपई नवाबगंज जिले के वार्ड संख्या-7 में था।
हालांकि उसका एक वर्तमान पता अररिया जिले के रामपुर कोदरकट्टी वार्ड संख्या-11 स्थित मरांगी टोला भी दर्ज था। इसी दोहरे पते को लेकर बाद में विवाद और विभागीय जांच शुरू हुई।
कोर्ट के आदेश के बाद हुई रिहाई
31 जनवरी 2026 को न्यायालय से बंदी की रिहाई का आदेश प्राप्त हुआ था। रिहाई आदेश में बंदी के नाम के साथ अररिया का स्थानीय पता दर्ज था।
लेकिन जेल अभिरक्षा अधिपत्र में उसका मूल पता बांग्लादेश का अंकित था। विभागीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि दोनों दस्तावेजों में पते को लेकर स्पष्ट अंतर था।
पते में अंतर के बावजूद नहीं की गई जांच
गृह विभाग ने अपनी कार्रवाई में कहा है कि दोनों दस्तावेजों में अलग-अलग पते दर्ज होने के बावजूद जेल प्रशासन की ओर से बंदी की वास्तविक पहचान और नागरिकता को लेकर आवश्यक जांच नहीं की गई।
विशेष रूप से उपाधीक्षक स्तर पर इस मामले की समीक्षा और सत्यापन अपेक्षित था, लेकिन इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विभाग का मानना है कि यदि समय रहते दस्तावेजों की विसंगतियों की जांच की जाती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी।
एसओपी का पालन नहीं करने का आरोप
जांच में यह भी पाया गया कि बंदी के बांग्लादेशी मूल का होने संबंधी रिकॉर्ड मौजूद था। इसके बावजूद विदेशी नागरिकों की रिहाई से संबंधित निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया।
आरोप है कि आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी किए बिना बंदी को जेल से मुक्त कर दिया गया। गृह विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और कर्तव्य निर्वहन में चूक माना है।
तत्काल प्रभाव से निलंबन
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग (कारा) ने अररिया मंडल कारा के उपाधीक्षक प्रवीण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार मामले में आगे भी विस्तृत जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
जेल प्रशासन में बढ़ी सतर्कता
इस घटना के बाद राज्य के जेल प्रशासन में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बंदियों की रिहाई से जुड़े मामलों में सभी दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाए और निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
गृह विभाग का कहना है कि सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह मामला सामने आने के बाद कारा प्रशासन की कार्यप्रणाली और विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सरकार अब ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी तंत्र विकसित करने पर विचार कर रही है।


