नाम और पिता के नाम में सुधार के लिए मांगी रिश्वत, विजिलेंस के जाल में फंसा अमीन; पैसे लेते ही रंगेहाथ गिरफ्तार

बांका। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी विभाग (विजिलेंस) लगातार कार्रवाई कर रहा है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी पर नकेल कसने की कोशिशों के बीच बांका जिले में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भूमि सर्वेक्षण विभाग में कार्यरत एक अमीन को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने जमीन संबंधी दस्तावेज में नाम और पिता के नाम की त्रुटि सुधारने के बदले पैसे की मांग की थी। शिकायत की पुष्टि होने के बाद विजिलेंस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

इस कार्रवाई के बाद बांका जिले में सरकारी विभागों के बीच चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि जिले में लगातार दूसरे दिन विजिलेंस की कार्रवाई हुई है। इससे पहले बिजली विभाग के एक अधिकारी को भी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। लगातार दो दिनों में हुई इन कार्रवाइयों ने सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चांदन में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

मंगलवार को पटना से पहुंची निगरानी विभाग की विशेष टीम ने बांका जिले के चांदन प्रखंड में छापेमारी कर भूमि सर्वेक्षण विभाग के अमीन आदित्य कुमार को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई चांदन-कटोरिया मुख्य मार्ग पर चांदन नदी पुल के पास स्थित उनके अस्थायी डेरा पर की गई।

सूत्रों के अनुसार निगरानी विभाग की टीम काफी समय से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। मंगलवार सुबह जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय रकम आरोपी को सौंपी, टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे रंगेहाथ दबोच लिया। पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया ताकि आरोपी को भनक तक न लग सके।

कार्रवाई का नेतृत्व विजिलेंस विभाग के डीएसपी मो. वशीम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि लगभग 15 सदस्यीय टीम इस अभियान में शामिल थी। टीम ने पहले से पूरी रणनीति तैयार कर रखी थी, जिसके कारण आरोपी के पास बच निकलने का कोई मौका नहीं रहा।

दस्तावेज सुधार के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत

जानकारी के अनुसार मामला भूमि सर्वेक्षण विभाग से जुड़े एक दस्तावेज के सुधार का था। शिकायतकर्ता के जमीन संबंधी रिकॉर्ड में नाम और पिता के नाम में त्रुटि दर्ज थी। इस गलती को ठीक कराने के लिए उसने संबंधित कार्यालय से संपर्क किया था।

आरोप है कि अमीन आदित्य कुमार ने रिकॉर्ड सुधारने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने शुरुआत में रकम देने से इनकार किया, लेकिन जब बार-बार पैसे की मांग की जाने लगी तो उसने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से कर दी।

सरकारी रिकॉर्ड में नाम की त्रुटि सुधारना एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन आरोप है कि इस काम को करने के लिए अवैध रूप से पैसे मांगे गए। यही शिकायत बाद में विजिलेंस की कार्रवाई का आधार बनी।

दिनेश मंडल की शिकायत से खुला मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत चांदन प्रखंड की असुढ़ा पंचायत के दिग्घीबारी गांव निवासी दिनेश मंडल की शिकायत से हुई। उन्होंने पटना स्थित निगरानी विभाग के कार्यालय में आवेदन देकर बताया कि उनसे रिश्वत मांगी जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। विभाग की ओर से प्रारंभिक जांच और सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।

इसके बाद निगरानी विभाग ने कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। शिकायतकर्ता को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड करने की व्यवस्था भी की गई।

योजनाबद्ध तरीके से बिछाया गया जाल

विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपी को पकड़ने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। शिकायतकर्ता को विशेष रासायनिक पदार्थ लगे नोट दिए गए और उसे निर्देश दिया गया कि वह आरोपी को वही रकम सौंपे जिसकी मांग की गई थी।

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच मुलाकात हुई। जैसे ही अमीन ने शिकायतकर्ता से साढ़े आठ हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाए बैठी विजिलेंस टीम सक्रिय हो गई।

टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद नोटों की जांच की गई और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अधिकारियों ने मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली।

भागने की कोशिश भी नहीं आई काम

सूत्रों के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने स्थिति को भांपते हुए वहां से निकलने की कोशिश की। लेकिन विजिलेंस टीम पहले से पूरी तैयारी के साथ मौजूद थी।

चारों ओर से निगरानी कर रही टीम ने तुरंत घेराबंदी कर दी और आरोपी को भागने का अवसर नहीं मिला। कुछ ही क्षणों में उसे हिरासत में ले लिया गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा हो गए और देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में गिरफ्तारी की खबर फैल गई।

कागजी कार्रवाई के बाद पटना रवाना

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मौके पर ही आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ की गई और कार्रवाई से संबंधित सभी साक्ष्य एकत्र किए गए।

इसके बाद अमीन आदित्य कुमार को निगरानी विभाग की टीम अपने साथ पटना ले गई, जहां उससे आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

लगातार दूसरे दिन भ्रष्टाचार पर कार्रवाई

बांका जिले में यह लगातार दूसरा दिन था जब निगरानी विभाग ने रिश्वतखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले रजौन क्षेत्र में बिजली विभाग के एक सहायक अभियंता को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।

लगातार दो दिनों में दो सरकारी कर्मियों की गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि निगरानी विभाग भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपने पद का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई केवल एक आरोपी को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को संदेश देती है। जब किसी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा जाता है तो अन्य कर्मचारियों के बीच भी जवाबदेही का माहौल बनता है।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान निगरानी विभाग ने कई बड़े ट्रैप ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्तार हुए हैं। सरकार भी लगातार यह दावा कर रही है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।

चांदन में हुई ताजा कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। फिलहाल आरोपी अमीन के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और निगरानी विभाग मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि रिश्वतखोरी की शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

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