बिहार में चमकी बुखार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू, 12 जिलों में जागरूकता फैलाने निकले विशेष वाहन; हर गांव तक पहुंचेगा बचाव का संदेश

पटना। बिहार में हर साल गर्मी के मौसम के दौरान बच्चों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी मस्तिष्क ज्वर (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम-एईएस) और चमकी बुखार के खिलाफ राज्य सरकार ने व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से 12 विशेष प्रचार-प्रसार वाहनों को रवाना किया गया है, जो राज्य के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पहुंचकर लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज के महत्व के बारे में जागरूक करेंगे।

सोमवार को पटना स्थित स्वास्थ्य भवन, शेखपुरा परिसर से स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने इन विशेष जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकार का उद्देश्य है कि बीमारी से जुड़े जरूरी संदेश सीधे गांवों, कस्बों और मोहल्लों तक पहुंचें ताकि समय रहते लोग सतर्क हो सकें और बच्चों की जान बचाई जा सके।

12 जिलों में चलाया जाएगा विशेष जनजागरूकता अभियान

स्वास्थ्य विभाग द्वारा रवाना किए गए 12 प्रचार-प्रसार वाहन बिहार के उन जिलों में अभियान चलाएंगे, जहां एईएस और चमकी बुखार के मामले सबसे अधिक सामने आते रहे हैं।

इन जिलों में पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर शामिल हैं।

ये वाहन प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों, गली-मोहल्लों, नुक्कड़ों, ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करेंगे। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को लोग पहचान सकें और समय पर उपचार प्राप्त कर सकें।

घर-घर तक पहुंचेगा स्वास्थ्य विभाग का संदेश

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि जागरूकता ही मस्तिष्क ज्वर और चमकी बुखार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बीमारी से संबंधित सही जानकारी हर परिवार तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि प्रचार वाहनों के माध्यम से लोगों को बीमारी के लक्षणों, कारणों, बचाव के उपायों और इलाज की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में लोग बीमारी की गंभीरता को समझ नहीं पाते और इलाज में देरी हो जाती है। यही देरी कई मामलों में बच्चों की जान के लिए खतरा बन जाती है। इसलिए सरकार जागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

क्या है मस्तिष्क ज्वर और चमकी बुखार

मस्तिष्क ज्वर या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) एक गंभीर बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है। इस बीमारी में मरीज को तेज बुखार, बेहोशी, शरीर में ऐंठन, मानसिक भ्रम और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी होता है। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है और गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।

इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।

प्रभावित जिलों में मजबूत की गई चिकित्सा व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केवल जागरूकता अभियान ही नहीं बल्कि उपचार व्यवस्था को भी मजबूत बनाया है।

एईएस से अधिक प्रभावित जिलों में 10-10 बेड वाले विशेष पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड स्थापित किए गए हैं। इन वार्डों में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को विशेष उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे को इलाज के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

एसकेएमसीएच में 100 बेड का अत्याधुनिक पीआईसीयू

मुजफ्फरपुर लंबे समय से एईएस प्रभावित जिलों में शामिल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच), मुजफ्फरपुर में 100 बेड वाला अत्याधुनिक पीआईसीयू वार्ड विकसित किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह सुविधा गंभीर मरीजों को त्वरित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता के कारण यहां गंभीर बच्चों का इलाज अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

जिला अस्पतालों और पीएचसी में भी विशेष तैयारी

सरकार ने केवल मेडिकल कॉलेजों तक ही तैयारी सीमित नहीं रखी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला और प्रखंड स्तर तक उपचार व्यवस्था को मजबूत किया है।

अत्यधिक प्रभावित 15 जिलों के अलावा राज्य के अन्य सभी जिला अस्पतालों में पांच-पांच बेड मस्तिष्क ज्वर मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं।

इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भी दो-दो विशेष बेड उपलब्ध कराए गए हैं ताकि मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही उपचार मिल सके।

जीपीएस से होगी प्रचार वाहनों की निगरानी

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने बताया कि अभियान को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए सभी प्रचार-प्रसार वाहनों को जीपीएस प्रणाली से जोड़ा गया है।

इस तकनीक के माध्यम से विभाग यह निगरानी कर सकेगा कि वाहन निर्धारित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं या नहीं और अभियान की प्रगति कैसी है।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि जागरूकता कार्यक्रम वास्तव में उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

लोगों को बताए जाएंगे बचाव के आसान उपाय

अभियान के दौरान लोगों को बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग लगातार यह संदेश दे रहा है कि बच्चों को समय पर भोजन कराना बेहद जरूरी है। बच्चों को खाली पेट नहीं सोने देना चाहिए और अत्यधिक गर्मी तथा धूप से बचाना चाहिए।

इसके अलावा स्वच्छता बनाए रखने, पर्याप्त पानी पीने और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं इलाज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि किसी बच्चे को तेज बुखार, सुस्ती, बेहोशी, शरीर में झटके, उल्टी या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती कुछ घंटे उपचार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

जनजागरूकता को माना जा रहा सबसे प्रभावी उपाय

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एईएस और चमकी बुखार जैसी बीमारियों से लड़ाई केवल अस्पतालों में नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है।

यही कारण है कि इस वर्ष सरकार ने जनजागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। प्रचार वाहन गांव-गांव जाकर लोगों को जानकारी देंगे और बीमारी से बचाव के लिए प्रेरित करेंगे।

स्वास्थ्य विभाग की जनता से अपील

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे मस्तिष्क ज्वर और चमकी बुखार को लेकर सतर्क रहें तथा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

विभाग ने लोगों से कहा है कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार या देरी करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

सरकार का मानना है कि जागरूकता, समय पर उपचार और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से मस्तिष्क ज्वर और चमकी बुखार के मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है। 12 जिलों में शुरू किया गया यह विशेष अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित रखना और बीमारी के प्रति समाज को पूरी तरह जागरूक बनाना है।

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