बिहार में नशे के कारोबार पर डीआरआई का बड़ा प्रहार: 104.9 किलो गांजा जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार; एक साल में 46.5 करोड़ के मादक पदार्थ पकड़े गए

पटना। बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) को एक और बड़ी सफलता मिली है। डीआरआई ने राज्य में कार्रवाई करते हुए 104.9 किलोग्राम गांजा जब्त किया है और इस अवैध कारोबार में कथित रूप से शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने और राज्य में नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है।

डीआरआई की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई 30 मई 2026 को की गई। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि जब्त किया गया मादक पदार्थ अवैध तस्करी के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया जाना था। कार्रवाई के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस तस्करी गिरोह के तार किन राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं तथा इसका संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।

मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ डीआरआई का यह अभियान केवल एक जब्ती तक सीमित नहीं है। पिछले एक वर्ष के दौरान एजेंसी ने बिहार में नशे के कारोबार पर लगातार बड़ी कार्रवाई की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते एक साल में डीआरआई ने राज्य में लगभग 46.5 करोड़ रुपये मूल्य के विभिन्न मादक और साइकोट्रोपिक पदार्थ जब्त किए हैं। इस दौरान कुल 31 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार जब्त किए गए मादक पदार्थों में कई प्रकार के प्रतिबंधित और खतरनाक नशीले पदार्थ शामिल हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान 107.5 किलोग्राम चरस, 1277.81 किलोग्राम गांजा, 18.92 किलोग्राम हाई-ग्रेड कैनबिस जिसे हाइड्रोपोनिक वीड भी कहा जाता है, 6 किलोग्राम कोकीन, 112.8 ग्राम हेरोइन और कोडीन आधारित कफ सिरप की 8012 बोतलें जब्त की गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार भौगोलिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित होने के कारण तस्करों के लिए एक ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। डीआरआई की हालिया कार्रवाई यह संकेत देती है कि केंद्रीय एजेंसियां अब तस्करी के नेटवर्क पर अधिक प्रभावी तरीके से नजर रख रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी गंभीर समस्या है। नशीले पदार्थों की उपलब्धता युवाओं को सबसे अधिक प्रभावित करती है, जिससे अपराध, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। इसी कारण सरकार और जांच एजेंसियां इस नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

डीआरआई ने हाल के वर्षों में अपनी जांच रणनीति को और मजबूत किया है। आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों को निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अब केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क को तोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेष रूप से संगठित अपराध से जुड़े ऐसे गिरोहों की पहचान की जा रही है जो मादक पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण में शामिल हैं। इसके लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, सीमा सुरक्षा एजेंसियों और केंद्रीय जांच संस्थाओं के साथ मिलकर संयुक्त अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

डीआरआई के अधिकारियों का मानना है कि तस्करी के नेटवर्क लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। कभी सड़क मार्ग, कभी रेल मार्ग तो कभी अन्य माध्यमों का उपयोग कर नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में खुफिया सूचनाओं का महत्व और बढ़ जाता है। हालिया कार्रवाई भी इसी प्रकार की सूचना के आधार पर की गई, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया जा सका।

नशे के खिलाफ अभियान को लेकर केंद्र सरकार भी लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत विभिन्न एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य न केवल मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाकर युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना भी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जनजागरूकता अभियान भी उतने ही जरूरी हैं। स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे के खतरों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।

फिलहाल डीआरआई द्वारा की गई हालिया कार्रवाई को बिहार में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। 104.9 किलोग्राम गांजा की जब्ती और दो आरोपियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय एजेंसियां तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय हैं।

आने वाले दिनों में जांच के दौरान इस मामले से जुड़े और भी कई खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी और इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। बिहार में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एजेंसियों का अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

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