
मोतिहारी: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुए एक दशक बीत चुका है, लेकिन शराब तस्करों के हौसले अब भी कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर शराब की तस्करी और बिक्री में जुटे हुए हैं। ताजा मामला पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा से सामने आया है, जहां उत्पाद विभाग ने एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।
बाइक से हो रही थी शराब की होम डिलीवरी
गुप्त सूचना के आधार पर उत्पाद विभाग की टीम ने रामगढ़वा थाना क्षेत्र के हनुमान चौक के पास विशेष वाहन जांच अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान जो सामने आया, उसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
डिक्की और बाइक के पुर्जों में छिपाई थी विदेशी शराब
तलाशी के दौरान मोटरसाइकिल की डिक्की और अन्य हिस्सों से विदेशी शराब की कई बोतलें बरामद की गईं। तस्कर ने शराब को इस तरह छिपाया था कि सामान्य जांच में उसका पता लगाना मुश्किल था। बताया जा रहा है कि वह बाइक के पार्ट्स और पुर्जों के भीतर शराब रखकर पुलिस और उत्पाद विभाग की नजरों से बचने की कोशिश कर रहा था।
600 रुपये में बेचता था एक बोतल शराब
गिरफ्तार युवक ने अपना नाम निरंजन कुमार बताया, जो रामगढ़वा क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह शराब की बिक्री करता था। जब अधिकारियों ने उससे प्रति बोतल कीमत पूछी तो उसने बताया कि एक शीशी शराब 600 रुपये में बेची जाती थी। पूछताछ के दौरान उसने आगे से यह काम नहीं करने की बात भी कही।
नेपाल से लाई जा रही थी शराब की खेप
उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि नेपाल सीमा से शराब की खेप लाकर रामगढ़वा इलाके में सप्लाई की जा रही है। इसी सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई और आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
नेटवर्क की तलाश में जुटा विभाग
उत्पाद विभाग अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि शराब की सप्लाई कहां से हो रही थी और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से शराब तस्करी से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
शराबबंदी पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन शराब बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि शराब माफिया अब भी सक्रिय हैं और कानून को चुनौती देने से बाज नहीं आ रहे।


