बेगूसराय डीटीओ कार्यालय में निगरानी का बड़ा एक्शन: रिश्वत लेते क्लर्क और कथित दलाल रंगे हाथ गिरफ्तार, परिवहन विभाग में मचा हड़कंप

बेगूसराय, 29 मई 2026। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक क्लर्क और एक कथित दलाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। वाहन ट्रांसफर कराने के नाम पर आम नागरिक से रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद की गई इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग में हलचल मचा दी है। निगरानी विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को छह हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

कार्रवाई के बाद डीटीओ कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच घटना को लेकर दिनभर चर्चा होती रही। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

जानकारी के अनुसार मामला चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के सकरौली गांव निवासी सत्यम कुमार से जुड़ा हुआ है। सत्यम कुमार को अपने वाहन का ट्रांसफर कराना था। आरोप है कि इस कार्य को पूरा करने के लिए उनसे रिश्वत की मांग की गई थी।

बताया जा रहा है कि कार्यालय में प्रक्रिया पूरी कराने के बदले कुछ लोगों द्वारा पैसे मांगे जा रहे थे। इससे परेशान होकर सत्यम कुमार ने पटना स्थित निगरानी विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और प्रारंभिक जांच शुरू की।

निगरानी अधिकारियों ने शिकायत के तथ्यों का सत्यापन किया। जांच के दौरान आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की योजना बनाई गई। इसके बाद विधिवत मामला दर्ज कर छापेमारी की तैयारी शुरू कर दी गई।

वाहन ट्रांसफर के नाम पर मांगे गए थे पैसे

सूत्रों के अनुसार वाहन स्वामित्व परिवर्तन यानी ट्रांसफर से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए शिकायतकर्ता से अतिरिक्त राशि मांगी जा रही थी। सरकारी प्रक्रिया के तहत होने वाले काम के बदले रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले की निगरानी शुरू कर दी।

आरोप है कि कार्यालय में सक्रिय दलाल तंत्र के माध्यम से आम लोगों से पैसे लेकर काम करवाने का प्रयास किया जाता था। इसी क्रम में शिकायतकर्ता को भी कथित रूप से रिश्वत देने के लिए कहा गया था।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम को दस्तावेजी रूप से रिकॉर्ड किया गया और उसके बाद कार्रवाई को अंतिम रूप दिया गया।

डीएसपी के नेतृत्व में पहुंची विशेष टीम

निगरानी विभाग की विशेष टीम डीएसपी रंजीत कुमार निराला के नेतृत्व में बेगूसराय पहुंची। टीम ने पूर्व निर्धारित रणनीति के अनुसार डीटीओ कार्यालय में निगरानी रखी और उचित समय का इंतजार किया।

जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्लर्क संजय कुमार और कथित दलाल शिवानंद झा को पकड़ लिया। अधिकारियों ने मौके पर ही दोनों को हिरासत में ले लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई इतनी गोपनीय तरीके से की गई थी कि कार्यालय में मौजूद अधिकांश लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। गिरफ्तारी की सूचना फैलते ही कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और आगंतुकों के बीच हड़कंप मच गया।

रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तारी

निगरानी विभाग का दावा है कि दोनों आरोपियों को रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान बरामद राशि और अन्य दस्तावेजों को भी जब्त किया गया।

अधिकारियों ने मौके पर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और गिरफ्तारी से संबंधित सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद दोनों आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया।

कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं और कार्यालय में रिश्वतखोरी का नेटवर्क किस प्रकार काम कर रहा था।

सर्किट हाउस में चली पूछताछ

गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम दोनों आरोपियों को लेकर सर्किट हाउस पहुंची, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने के साथ-साथ अन्य संभावित मामलों की भी जांच शुरू कर दी।

सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसी प्रकार के मामलों में पहले भी रिश्वत ली गई थी।

निगरानी विभाग द्वारा मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

परिवहन विभाग में दलाल तंत्र पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर परिवहन विभाग में सक्रिय कथित दलाल तंत्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से आम लोगों की ओर से यह शिकायत की जाती रही है कि विभिन्न सरकारी कार्यालयों में दलालों की सक्रियता के कारण पारदर्शी व्यवस्था प्रभावित होती है।

कई नागरिकों का कहना है कि बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के सरकारी कार्यों को समय पर पूरा कराना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में निगरानी विभाग की कार्रवाई ने उन शिकायतों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह नियमित कार्रवाई होती रही तो सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में रिश्वतखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार भी लगातार भ्रष्टाचार के मामलों पर नजर बनाए हुए है। विभिन्न विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी कर्मचारियों के बीच जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।

आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर

फिलहाल गिरफ्तार क्लर्क और कथित दलाल के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। निगरानी विभाग मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रहा है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

बेगूसराय डीटीओ कार्यालय में हुई यह कार्रवाई अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। आम नागरिक इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, जबकि विभागीय स्तर पर भी इस घटना के बाद सतर्कता बढ़ गई है।

आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल निगरानी विभाग की यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और ईमानदार कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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