
नई दिल्ली/पटना। बिहार में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षित करने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने के उद्देश्य से बिहार सरकार की उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने राजधानी नई दिल्ली में कई महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वाकांक्षी प्रस्ताव भी रखे।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस दौरे में श्रेयसी सिंह ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से जुड़े शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श किया। इन बैठकों में बिहार को निवेश का नया केंद्र बनाने, औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने जैसे विषय प्रमुखता से उठाए गए।

बिहार में उद्योगों के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा
दिल्ली दौरे के दौरान उद्योग मंत्री ने सबसे पहले केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच बिहार में उद्योगों के विकास की संभावनाओं, छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बिहार में बड़ी संख्या में युवा कार्यबल उपलब्ध है, जिसे कौशल विकास और उद्योग आधारित अवसरों के माध्यम से रोजगार से जोड़ा जा सकता है। चर्चा के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने बिहार में उद्योगों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना भी की। माना जा रहा है कि आने वाले समय में एमएसएमई क्षेत्र में बिहार को विशेष लाभ मिल सकता है।
टेक्सटाइल सेक्टर को नई पहचान दिलाने की तैयारी
अपने दौरे के दौरान श्रेयसी सिंह ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से भी मुलाकात की। इस बैठक में बिहार के टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने और राज्य में नए निवेश आकर्षित करने के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई।
बैठक में राज्य में वस्त्र उद्योग के विस्तार के लिए कई संभावनाओं पर विचार किया गया। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम और सिल्क उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान कैसे दिलाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेक्सटाइल क्षेत्र में बड़े निवेश आते हैं तो बिहार के हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दे रही है।
डिफेंस कॉरिडोर और डीआरडीओ को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा
दिल्ली दौरे की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई मुलाकात रही। इस दौरान राष्ट्र निर्माण, युवाओं के सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में बिहार में डिफेंस कॉरिडोर विकसित करने और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से संबंधित संस्थानों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। यदि यह प्रस्ताव भविष्य में आकार लेता है तो बिहार रक्षा उत्पादन और रक्षा अनुसंधान से जुड़े उद्योगों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना से न केवल बड़े निवेश आएंगे बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। इससे राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
केंद्र के समक्ष रखे गए कई बड़े प्रस्ताव
नई दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान उद्योग मंत्री ने बिहार के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए।
इन प्रस्तावों में राज्य में दो मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की योजना प्रमुख रही। इसके अलावा सिल्क टूरिज्म क्लस्टर विकसित करने, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर स्थापित करने तथा राष्ट्रीय स्तर के हस्तशिल्प, वस्त्र एवं इनोवेशन संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया।
राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से बिहार की पारंपरिक कलाओं और उद्योगों को नया बाजार मिलेगा तथा बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
स्पोर्टेक और एग्रोटेक क्लस्टर पर भी फोकस
बैठक के दौरान स्पोर्ट्स और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्टेक और एग्रोटेक क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार स्पोर्टेक क्लस्टर से खेल उपकरण निर्माण और खेल उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जबकि एग्रोटेक क्लस्टर कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार में मदद करेगा। इससे किसानों और कृषि उद्यमियों को भी सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
बेगूसराय इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर भी हुई चर्चा
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेगूसराय में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पार्क का विषय भी केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष उठाया गया। राज्य सरकार का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को नई दिशा दे सकती है।
बेगूसराय पहले से ही औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में वहां नए औद्योगिक पार्क की स्थापना से निवेशकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
‘भव्य’ योजना के तहत चार नए औद्योगिक पार्क का प्रस्ताव
उद्योग मंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष ‘भव्य’ योजना के अंतर्गत चार नए औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा।
इन पार्कों के माध्यम से निवेश, कौशल विकास, उत्पादन और रोजगार सृजन को एक साथ बढ़ावा देने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होगा और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में औद्योगिक विकास पर जोर
दिल्ली दौरे के बाद श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं और केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य को निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार उद्योगों के विस्तार, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से बिहार में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलती है तो बिहार आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर सकता है। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।



