
पटना। बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बिहार राज्य खाद्य एवं आपूर्ति निगम लिमिटेड (बीएसएफसी) के मुख्यालय में निगम के कार्यों की व्यापक समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि निगम से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजधानी पटना स्थित खाद्य भवन में आयोजित समीक्षा बैठक को राज्य की खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक के दौरान सचिव ने निगम के विभिन्न प्रक्षेत्रों और जिलों में संचालित कार्यों की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
खाद्यान्न वितरण व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा
बैठक के दौरान बिहार राज्य खाद्य एवं आपूर्ति निगम लिमिटेड के कार्यों की प्रक्षेत्रवार और जिलेवार समीक्षा की गई। सचिव दीपक आनंद ने विभिन्न जिलों में खाद्यान्न उठाव, भंडारण, परिवहन और वितरण से संबंधित कार्यों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की।
समीक्षा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राज्य के प्रत्येक पात्र लाभुक तक खाद्यान्न और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। इसके लिए आपूर्ति श्रृंखला के प्रत्येक चरण की निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कंट्रोल रूम और शिकायत कॉल सेंटर का लिया जायजा
समीक्षा बैठक के बाद सचिव दीपक आनंद ने निगम मुख्यालय में संचालित कंट्रोल रूम और शिकायत कॉल सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं, शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया और निगरानी तंत्र की जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि आम लोगों की शिकायतों को किस प्रकार दर्ज किया जाता है, उनके समाधान में कितना समय लगता है और शिकायतों की मॉनिटरिंग कैसे की जाती है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक सेवा प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिकों की शिकायतों का समाधान कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ किया जाता है। इसी कारण सचिव ने शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का फोकस
बैठक में सचिव ने स्पष्ट कहा कि बिहार सरकार की प्राथमिकता है कि आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा और देरी के मिले। इसके लिए आवश्यक है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और जवाबदेही के साथ करें।
उन्होंने कहा कि खाद्यान्न वितरण व्यवस्था करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यों के निष्पादन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए ताकि लाभुकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
समयबद्ध कार्य निष्पादन पर विशेष जोर
समीक्षा बैठक में समयबद्ध कार्य निष्पादन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होने से लाभुकों को परेशानी होती है और सरकार की छवि भी प्रभावित होती है। इसलिए सभी लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जहां भी किसी प्रकार की बाधा हो, उसका तत्काल समाधान निकाला जाए। साथ ही जिला स्तर पर भी निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की बात कही गई।
अनियमितता पर होगी तत्काल कार्रवाई
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि अब अनियमितता या शिकायतों को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। सचिव दीपक आनंद ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत प्राप्त होती है और जांच में वह सही पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लाभुकों को मिलेगा बेहतर लाभ
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की इस पहल का सीधा लाभ राज्य के लाखों राशन कार्डधारकों और अन्य लाभुकों को मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है तो खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ियों की संभावना कम होगी और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करोड़ों लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ उठाते हैं। ऐसे में खाद्यान्न की समय पर उपलब्धता, उचित भंडारण और पारदर्शी वितरण व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
तकनीक आधारित निगरानी को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में यह भी संकेत मिला कि आने वाले समय में निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक तकनीक आधारित बनाया जा सकता है। डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन शिकायत निवारण और रियल टाइम ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से खाद्यान्न वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे न केवल कार्यों की निगरानी आसान होगी बल्कि जवाबदेही भी बढ़ेगी।
अधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
समीक्षा बैठक के अंत में सचिव दीपक आनंद ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करें और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि निगम का मुख्य उद्देश्य लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी को समन्वय के साथ काम करना होगा।
बैठक में बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के महाप्रबंधक सुनील कुमार सहित निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने सचिव को विभिन्न योजनाओं और कार्यों की प्रगति से अवगत कराया।
राज्य सरकार की यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता को लेकर अब और अधिक सख्ती बरती जाएगी। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन होता है तो आने वाले समय में राज्य के लाखों लाभुकों को बेहतर और अधिक सुचारु सेवाएं मिलने की संभावना है।


