
भागलपुर। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच भागलपुर साइबर थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। फर्जी वेबसाइट बनाकर नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर करीब 48 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी मामले में चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। इस तरह अब तक कुल सात साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
भागलपुर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह फर्जी वेबसाइट तैयार कर लोगों को प्रतिष्ठित कंपनियों की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देता था और फिर उनसे बड़ी रकम वसूलकर फरार हो जाता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया और लाखों रुपये की ठगी की।
शिकायत से शुरू हुई जांच, खुलता गया ठगी का नेटवर्क
पुलिस के अनुसार इस मामले की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से हुई। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उसे एक वेबसाइट के माध्यम से प्रतिष्ठित कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने का प्रस्ताव दिया गया। वेबसाइट और उससे जुड़े लोगों ने खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताकर उससे बड़ी रकम जमा करा ली। बाद में जब फ्रेंचाइजी नहीं मिली और संपर्क टूट गया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
शिकायत मिलने के बाद भागलपुर साइबर थाना में कांड संख्या 29/2026 दर्ज किया गया। मामला दर्ज होते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच शुरू की गई। साइबर विशेषज्ञों, तकनीकी टीम और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया।
मोबाइल नंबर, बैंक खाते और वेबसाइट की हुई जांच
जांच के दौरान पुलिस ने शिकायत में दर्ज मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और संदिग्ध वेबसाइटों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। डिजिटल ट्रांजैक्शन, आईपी एड्रेस, बैंकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन की जांच के बाद कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।
तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी के लिए उपयोग की गई वेबसाइट पूरी तरह फर्जी थी और उसे लोगों को भ्रमित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया गया था कि आम व्यक्ति उसे देखकर असली कंपनी का आधिकारिक पोर्टल समझ बैठे। इसी माध्यम से लोगों को फ्रेंचाइजी, डीलरशिप और निवेश के नाम पर जाल में फंसाया जाता था।
नवादा और शेखपुरा तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरोह के सदस्य बिहार के नवादा, जमुई और शेखपुरा जिलों में सक्रिय हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने लगातार छापेमारी अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नवादा और शेखपुरा क्षेत्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में आशीष राज, कृष्णकांत और त्रिभुवन भास्कर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार ये सभी आरोपी गिरोह के सक्रिय सदस्य थे और ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं चार आरोपी
पुलिस ने बताया कि इस मामले में इससे पहले चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हालिया गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तार अपराधियों की संख्या सात हो गई है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस साइबर ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने राज्यों में इस नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।
फर्जी फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को बनाया जाता था शिकार
पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को प्रतिष्ठित ब्रांडों की फ्रेंचाइजी दिलाने का दावा करता था। इसके लिए सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन और मोबाइल कॉल का भी इस्तेमाल किया जाता था।
जब कोई व्यक्ति उनके संपर्क में आता था तो उसे निवेश करने और विभिन्न शुल्क जमा करने के लिए कहा जाता था। विश्वास जीतने के लिए नकली दस्तावेज, फर्जी एग्रीमेंट और जाली प्रमाणपत्र भी दिखाए जाते थे। पैसा जमा होने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे और पीड़ितों को कोई फ्रेंचाइजी नहीं मिलती थी।
छह मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की जांच साइबर विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों से कई और महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
मोबाइल फोन में मौजूद चैट, बैंकिंग विवरण, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इन मोबाइलों के माध्यम से अन्य राज्यों में भी ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था।
तकनीकी जांच से खुली साइबर गिरोह की परतें
इस पूरे मामले में तकनीकी जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग ट्रेल और ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी के माध्यम से पुलिस ने गिरोह तक पहुंच बनाई।
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन फ्रेंचाइजी घोटाले तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी आकर्षक ऑफर और बड़े मुनाफे का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की ऑनलाइन निवेश या फ्रेंचाइजी योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पूरी जांच करनी चाहिए।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
भागलपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वेबसाइट या ऑनलाइन ऑफर पर आंख बंद कर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति फ्रेंचाइजी, डीलरशिप या निवेश के नाम पर बड़ी रकम मांगता है तो पहले उसकी वैधता की जांच करें।
पुलिस ने यह भी कहा है कि किसी भी संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल नंबर या ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या निकटतम साइबर थाना को दें। समय रहते सूचना मिलने पर ऐसे अपराधों को रोका जा सकता है।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले की जांच अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। साइबर थाना और तकनीकी टीम लगातार छापेमारी और जांच अभियान चला रही है।
भागलपुर पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का लक्ष्य पूरे नेटवर्क का खुलासा कर ठगी के शिकार लोगों को न्याय दिलाना है।


