
भागलपुर। भागलपुर और नवगछिया के बीच जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत और पुनर्स्थापन का कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ समय से पुल पर यातायात बंद रहने के कारण लाखों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब राहत की खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि सभी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कार्य निर्धारित समय के अनुसार पूरे होते हैं तो 7 जून 2026 से पहले ही विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बहाल किया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने शुक्रवार को विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों से मरम्मत कार्य की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश भी दिए।
विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुल है। इस पुल के क्षतिग्रस्त होने और यातायात बंद होने के बाद भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। यात्री, व्यापारी, छात्र और रोजाना सफर करने वाले लोग वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेने को मजबूर हो गए थे। इससे यात्रा का समय बढ़ गया और परिवहन लागत में भी वृद्धि हुई।
यही कारण है कि पुल पर चल रहे मरम्मत कार्य पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है। प्रशासन और तकनीकी एजेंसियां लगातार दावा कर रही हैं कि युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द लोगों को राहत मिल सके। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि पुल के जिस हिस्से में गंभीर क्षति हुई थी, वहां नया स्लैब सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। यह मरम्मत प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा था।
उन्होंने जानकारी दी कि तकनीकी ऑडिट के दौरान जिन अन्य हिस्सों को संवेदनशील या कमजोर पाया गया था, वहां भी आवश्यक लॉन्चिंग और सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब अंतिम लॉन्चिंग प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार इस कार्य में अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ इंजीनियरिंग सहायता का उपयोग किया जा रहा है।
मरम्मत अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सीमा सड़क संगठन (BRO) निभा रहा है। इसके अलावा पुल निर्माण निगम और अन्य तकनीकी एजेंसियां भी इस परियोजना में शामिल हैं। कई विशेषज्ञ इंजीनियर दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि समय सीमा के भीतर कार्य पूरा किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि पुल की मरम्मत केवल गति के आधार पर नहीं बल्कि पूरी तकनीकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौथे बेली ब्रिज का निर्माण भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बेली ब्रिज एक अस्थायी लेकिन अत्यंत मजबूत संरचना होती है, जिसका उपयोग आपातकालीन या विशेष परिस्थितियों में यातायात संचालन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए किया जाता है। चौथे बेली ब्रिज के निर्माण से पुल की भार वहन क्षमता और संरचनात्मक सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।
मरम्मत कार्य केवल पुल के मुख्य हिस्से तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षित यातायात संचालन के लिए पहुंच पथ (एप्रोच रोड) का निर्माण और सुधार कार्य भी किया जा रहा है। इसके अलावा सड़क की लाइनिंग, मार्किंग, सुरक्षा संकेतक लगाने और अन्य तकनीकी तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुल खुलने के बाद यातायात संचालन पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षित रहे।
तकनीकी टीम द्वारा पुल की विस्तृत जांच भी की जा रही है। इंजीनियरिंग विशेषज्ञ संरचना की स्थिरता, भार वहन क्षमता और अन्य तकनीकी मानकों की जांच कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी सुरक्षा परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे नहीं हो जाते, तब तक पुल को यातायात के लिए नहीं खोला जाएगा। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और इस मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में भी पुल के जल्द खुलने को लेकर उत्सुकता है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु के बंद होने से माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा है। विशेष रूप से सीमांचल और कोसी क्षेत्र से भागलपुर आने-जाने वाले व्यवसायियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। पुल खुलने के बाद व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों के लिए भी यह बड़ी राहत साबित होगी। वर्तमान में लोगों को गंगा पार करने के लिए लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ रही है। कई छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को रोजाना अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विक्रमशिला सेतु का पुनः संचालन सामान्य जीवन को पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। यह भागलपुर को बिहार के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जिलों से जोड़ता है। इसके माध्यम से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं और करोड़ों रुपये के व्यापारिक लेनदेन को गति मिलती है। इसलिए इसकी मरम्मत और सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य 7 जून 2026 से पहले हर हाल में पुल पर आवागमन शुरू करना है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समय सीमा से अधिक महत्वपूर्ण सुरक्षा है। यदि किसी तकनीकी पहलू पर अतिरिक्त कार्य की आवश्यकता महसूस होती है तो उसे भी प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना था कि लोगों को एक सुरक्षित और मजबूत पुल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
फिलहाल विक्रमशिला सेतु पर दिन-रात चल रहे कार्यों ने लोगों में उम्मीद जगा दी है। प्रशासन, बीआरओ, पुल निर्माण निगम और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार काम में जुटी हुई है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ता है तो आने वाले कुछ दिनों में भागलपुर और नवगछिया के बीच एक बार फिर सामान्य यातायात बहाल हो सकता है। इससे न केवल लाखों लोगों को राहत मिलेगी बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।


