
भागलपुर। कहलगांव अनुमंडल क्षेत्र के सिया पंचायत स्थित बरैनी पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसके पुनर्जीवन के लिए चलाए जा रहे प्रशासनिक अभियान के दौरान बड़ा विवाद सामने आया है। प्रशासन का दावा है कि सरकारी भूमि पर कब्जे की कोशिशों के बीच जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई, तब कुछ लोगों ने इसका विरोध करते हुए न केवल सरकारी कार्य में बाधा डाली बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला भी किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा और बाद में करीब 27 से 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
यह पूरा मामला बरैनी पोखर से जुड़ा है, जो मत्स्य विभाग की भूमि बताई जा रही है। प्रशासन के अनुसार यह जल निकाय लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा था और इसे उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि बिहार सरकार की जल संरक्षण संबंधी योजनाओं और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप पोखर को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों से निपटा जा सके।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार बरैनी पोखर केवल एक साधारण तालाब नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और भूजल संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण जल स्रोत है। वर्षों से कई जलाशयों पर अतिक्रमण होने के कारण उनकी उपयोगिता प्रभावित हुई है। इसी कारण राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पुराने तालाबों और पोखरों को पुनर्जीवित करने का अभियान चला रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार के सात निश्चय कार्यक्रम के तहत जल निकायों के संरक्षण और विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य अतिक्रमित जलाशयों को मुक्त कराना, उनका जीर्णोद्धार करना और उन्हें फिर से उपयोगी बनाना है। इसके पीछे तर्क यह है कि बढ़ती आबादी और बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच जल संरक्षण आने वाले समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
इसी योजना के तहत बरैनी पोखर के पुनर्जीवन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बताया गया कि मत्स्य विभाग द्वारा आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दिए जाने के बाद ग्राम पंचायत की ओर से पोखर की सफाई और खुदाई का कार्य प्रारंभ कराया गया। प्रशासनिक निगरानी में जेसीबी मशीन के माध्यम से मिट्टी हटाने और तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाने की प्रक्रिया चल रही थी।
हालांकि इसी दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रशासन का आरोप है कि कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से कार्य में बाधा उत्पन्न की और मौके पर मौजूद लोगों को उकसाया। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच और उपलब्ध वीडियो फुटेज में कुछ व्यक्तियों द्वारा भीड़ को भड़काने और कार्रवाई का विरोध करने के संकेत मिले हैं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के हित इस भूमि से जुड़े हुए हैं और वे कथित रूप से जमीन पर अवैध कब्जा बनाए रखना चाहते थे।
घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले बैठा। प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए कुछ लोगों ने आक्रामक रुख अपनाया और जेसीबी चालक के साथ मारपीट की। इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़े लोगों पर भी हमला किया गया, जिसमें एक व्यक्ति के सिर में चोट लगने और रक्तस्राव होने की बात कही गई है।
हंगामे के दौरान सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मौके पर मौजूद कार्यपालक दंडाधिकारी के सरकारी वाहन के शीशे तोड़ दिए गए। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्य में इस प्रकार का हस्तक्षेप और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
घटना के समय अनुमंडल प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। इनमें अंचल अधिकारी (सीओ), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), कार्यपालक दंडाधिकारी, मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी तथा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी शामिल थे। प्रशासन का कहना है कि इन अधिकारियों की मौजूदगी में कार्य पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार हालात को नियंत्रित करने के प्रयास के दौरान कुछ महिलाओं द्वारा भी विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रशासन का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाठी-डंडों के साथ आक्रामक व्यवहार किया और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की करने की कोशिश की। हालांकि इस संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज की भी समीक्षा की जा रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद हालात पर नियंत्रण पाया गया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाते हुए लगभग 27 से 28 लोगों को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च भी कराया। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन अब वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता भी है। पुराने तालाब और पोखर भूजल स्तर बनाए रखने, वर्षा जल संचयन और स्थानीय पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि इन पर अतिक्रमण होता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
बरैनी पोखर को लेकर सामने आया यह विवाद अब केवल एक स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह जल संरक्षण, सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि जल निकायों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।


