​कहलगांव के बैरैनी में तालाब सौंदर्यीकरण पर बवाल, पुलिस और प्रशासन पर जानलेवा हमला: मॉब लिंचिंग के प्रयास मामले में 4 प्राथमिकी दर्ज, 31 हिरासत में

भागलपुर जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत बैरैनी गांव में भड़की भीषण हिंसा और प्रशासनिक टीम पर हुए हमले के मामले में पुलिसिया तंत्र ने कड़ा विन्यास अपनाते हुए चौतरफा कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। सिया पंचायत के ऐतिहासिक बैरैनी पोखर को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने और उसके जीर्णोद्धार के दौरान बुधवार को उपद्रवियों के एक संगठित सिंडिकेट ने पुलिस बल और दंडाधिकारियों पर प्रखर पथराव और जानलेवा हमला कर दिया था। इस दुस्साहसिक कृत्य को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने कुल चार अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं, जिसके भीतर 28 नामजद और लगभग 100 अज्ञात उपद्रवियों को आरोपी विनिर्मित किया गया है। घटना के बाद से ही बैरैनी गांव के भीतरी प्रक्षेपों में भारी तनाव, खौफ और मनोवैज्ञानिक अवसाद का माहौल लाइव मोड पर संधारित देखा जा रहा है।

​तालाब कब्जाने की भू-माफियाई साजिश और मॉब लिंचिंग का कुत्सित प्रयास

​भागलपुर जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रशासनिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूरा विवाद सात निश्चय अभियान के तहत पुराने तालाब के पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण प्रक्रम से संरेखित है। सर्वोच्च न्यायालय के कड़े विनिर्देशों के आलोक में जल निकायों को उनके पुराने मूल स्वरूप में वापस लाने के विधिक आदेश प्रभावी हैं। मत्स्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायत को बाकायदा अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने के उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों की मुस्तैदी में तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने की संचिका को लाइव किया गया था। कार्यस्थल पर जब मुखिया के विनिर्देश पर जेसीबी मशीन के माध्यम से मिट्टी की खुदाई का अभियांत्रिक कार्य संचालित हो रहा था, तभी प्रक्षेत्र के एक अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति और उनके समर्थकों ने कूटनीतिक चाल चलते हुए ग्रामीणों को भड़काना शुरू कर दिया।

​प्रारंभिक विलेखों से यह प्रामाणिक सत्य सामने आया है कि उक्त प्रभावशाली भू-माफिया इस सरकारी तालाब को मलबे से भरकर उस बेशकीमती जमीन पर अपना अवैध कब्जा कायम रखना चाहता था। प्रशासनिक कार्रवाई को म्यूट करने के उद्देश्य से उस व्यक्ति ने पूर्व से सुनियोजित तरीके से एकत्रित की गई भीड़ को ‘मारो इसको’ बोलकर सरेआम उकसाया और मौके पर मौजूद लोक सेवकों की मॉनिटरिंग टीम पर मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा हत्या करवाने का प्रखर प्रयास किया। इस उकसावे के बाद अचानक अवस्थिति अत्यंत उग्र हो गई। उपद्रवियों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से लैस होकर धावा बोल दिया। कार्यस्थल पर मौजूद जेसीबी चालक के साथ बर्बर मारपीट की गई तथा बीच-बचाव करने आए मुखिया पति रवि पासवान पर जानलेवा प्रहार किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और प्रखर रक्तस्राव लाइव मोड पर दर्ज हुआ।

​दंडाधिकारी के वाहन में तोड़फोड़, एसडीएम के साथ धक्का-मुक्की और बिजली शटडाउन

​उपद्रवियों का दुस्साहस यहीं नहीं थमा, बल्कि उन्होंने मौके पर कानून व्यवस्था संधारित रख रहे कार्यपालक दंडाधिकारी के सरकारी वाहन को पत्थरों से प्रहार कर पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और उसके शीशे तोड़ डाले। जब अवस्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस कप्तानों का दस्ता अग्रिम मोर्चे पर प्रविष्ट हुआ, तो भीड़ में शामिल कतिपय महिलाओं ने भी लाठी-डंडों के साथ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। उपद्रवी सिंडिकेट ने अनुमंडल पदाधिकारी के साथ सरेआम धक्का-मुक्की की और उन पर हमला करने का कुत्सित प्रयास मुकम्मत किया। इस अप्रत्याशित हमले में कई प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस आरक्षियों को गंभीर चोटें आईं।

​इस भीषण उपद्रव के उपरांत सुरक्षात्मक प्रोटोकॉल और अराजकता को ब्लॉक करने के वास्ते अंचलाधिकारी के विनिर्देश पर बैरैनी गांव के भीतरी विद्युत ग्रिड का पावर शटडाउन ले लिया गया। इसके प्रतिफल के रूप में संपूर्ण गांव बुधवार की पूरी रात प्रखर अंधेरे के चक्रव्यूह में डूबा रहा, जिससे ग्रामीणों के भीतर प्रशासनिक कड़ाई का खौफ और लाउड हो गया। गुरुवार की सुबह करीब आठ बजे के टाइम-स्टैम्प पर विद्युत विभाग के अभियंताओं ने सुरक्षा इनपुट्स मिलने के बाद बिजली आपूर्ति को दोबारा री-स्टोर किया। वर्तमान समय में गांव के भीतरी केबिनों में सन्नाटा पसरा है और अधिकांश पुरुष वर्ग पुलिसिया दबिश के डर से अपने घरों को लॉक कर प्रक्षेत्र से बाहर फरार संधारित हैं, तथा गांव में केवल वृद्ध व महिलाएं ही अवस्थित देखी जा रही हैं।

​चार अलग-अलग एफआईआर लॉक, 31 उपद्रवी पुलिस कस्टडी में

​कहलगांव थाना के मुख्य लेज़र बुक में इस कांड को लेकर चौतरफा कानूनी घेराबंदी मुकम्मत की गई है। पहली प्राथमिकी पीड़ित पंचायत के मुखिया पति रवि पासवान ने दर्ज कराई है, जिसमें आठ स्थानीय दबंगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, तीन अन्य अलग-अलग प्राथमिकियां कार्यपालक दंडाधिकारी, अंचलाधिकारी तथा कहलगांव थाना पुलिस प्रशासन की ओर से सरकारी कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और सरकारी संपत्ति को मलबे में तब्दील करने के संगीन आरोपों के तहत पंजीकृत की गई हैं।

​कहलगांव थानाध्यक्ष श्यामला कुमार ने विधिक एक्शन का अद्यतन स्टेटस स्पष्ट करते हुए बताया कि पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जासूसी विंग ने त्वरित रिस्पॉन्स ग्रिड सक्रिय करते हुए कुल 31 संदेहास्पद उपद्रवियों को भौतिक रूप से हिरासत में लिया था, जिसमें 14 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। शुरुआती दौर में इन सभी को सुरक्षा कारणों से ईसीईपुर थाने के भीतर रखा गया था, जिन्हें बाद में कड़े सुरक्षा घेरे में कहलगांव थाने डाइवर्ट किया गया। सघन पूछताछ के उपरांत साक्ष्यों के अभाव में छह कनिष्ठ व्यक्तियों को विधिक मुचलके पर रिहा कर दिया गया। वर्तमान समय सीमा के भीतर 14 पुरुषों और 10 महिलाओं को पुलिस कस्टडी में लॉक रखा गया है, जिन्हें अनुमंडल अस्पताल में मेडिकल जांच की औपचारिकताओं को ससमय पूरा कराने के बाद गुरुवार को जेल भेजने का विधिक प्रक्रम मुकम्मत किया जा रहा है। क्षेत्र के भीतर कानून का इकबाल री-स्टोर करने और दोबारा किसी विसंगति को ब्लॉक करने के उद्देश्य से भारी अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती के साथ लगातार सशस्त्र फ्लैग मार्च संचालित किया जा रहा है।

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