
नई दिल्ली/पटना, 28 मई 2026। बिहार को तेज विकास, बेहतर प्रशासन और आधुनिक सुशासन के मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में प्रतिनियुक्त बिहार कैडर के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार, कानून व्यवस्था, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने इस बैठक को बिहार के भविष्य की दृष्टि से बेहद अहम बताते हुए कहा कि केंद्र स्तर पर कार्य कर रहे बिहार कैडर के अधिकारियों का अनुभव राज्य के विकास में नई ऊर्जा और नई दिशा दे सकता है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रशासनिक अनुभव, नीति निर्माण की समझ और तकनीकी सुझावों के जरिए बिहार को विकसित राज्य बनाने की प्रक्रिया को गति दें।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विकसित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी अधिकारियों के अनुभव और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए लगातार काम कर रही है।
बैठक में सुशासन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचे, इसके लिए जिला और प्रखंड स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह बनाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से भ्रष्टाचार पर सख्त नियंत्रण और फाइलों के त्वरित निष्पादन को प्राथमिकता देने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना है।
बैठक में शामिल आईएएस अधिकारियों के साथ राज्य की विकास योजनाओं की प्रगति, निवेश प्रस्ताव, औद्योगिक ढांचे के विस्तार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में औद्योगिक माहौल तैयार करने के लिए सरकार लगातार नीतिगत सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में नए उद्योगों की स्थापना, एक्सप्रेसवे निर्माण, शहरी विकास और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ बिहार को दिलाने के लिए विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं तकनीकी कारणों या प्रक्रियात्मक देरी की वजह से प्रभावित होती हैं, इसलिए केंद्र में कार्यरत अधिकारियों का अनुभव इस दिशा में मददगार साबित होगा।
बैठक में कानून व्यवस्था और आधुनिक पुलिसिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। आईपीएस अधिकारियों के साथ साइबर अपराध नियंत्रण, स्मार्ट पुलिसिंग, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और अपराध रोकथाम की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में डिजिटल गवर्नेंस और ई-प्रशासन के विस्तार पर भी फोकस किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाकर आम लोगों को राहत दी जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे मॉडल और तकनीकी प्रणालियों पर सुझाव मांगे, जिन्हें बिहार में लागू किया जा सके।
बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और आधुनिक कृषि मॉडल को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विस्तार पर भी सुझाव देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी युवा है और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाकर, उद्योग स्थापित कर और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत बनाकर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केंद्र सरकार की रोजगार और उद्यमिता योजनाओं को बिहार में प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बिहार के कई अधिकारी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े प्रशासनिक और नीतिगत प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अधिकारियों का अनुभव बिहार के विकास मॉडल को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल पारंपरिक प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आधुनिक सोच और नई तकनीक के साथ आगे बढ़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बैठक में दिए गए सुझावों और प्रस्तावों का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाए। इसके आधार पर विभिन्न विभागों में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। गृह विभाग, उद्योग विभाग, भूमि राजस्व विभाग और शहरी विकास विभाग सहित कई विभागों में नई कार्य योजनाओं पर काम शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
बैठक में केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई विकास परियोजनाएं केंद्र सरकार की मंजूरी और सहयोग पर निर्भर करती हैं, इसलिए दिल्ली में कार्यरत बिहार कैडर के अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि बिहार से जुड़ी परियोजनाओं और योजनाओं को प्राथमिकता दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को बिहार सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक परिणाम आधारित और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि अनुभवी अधिकारियों के साथ लगातार संवाद और सुझाव प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।
बैठक के बाद बिहार के प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले महीनों में राज्य में कई नई नीतिगत पहल देखने को मिल सकती हैं। विशेष रूप से निवेश, डिजिटल प्रशासन, पुलिसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में बड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में कहा कि बिहार के विकास के लिए सरकार हर स्तर पर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास संसाधन, प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही दिशा और प्रभावी क्रियान्वयन की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और प्रशासनिक दक्षता के बल पर बिहार आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।


