वीर सावरकर जयंती समारोह में मुख्यमंत्री का बड़ा संदेश, राष्ट्रवाद और विकास मॉडल को बताया बिहार के भविष्य की दिशा

पटना, 28 मई 2026। राजधानी पटना में आयोजित एक विशेष समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की जीवनी पर आधारित पुस्तक ‘वीर सावरकर की जीवनी’ का लोकार्पण किया। बिहार विधान परिषद के उप भवन सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम वीर सावरकर की 143वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सावरकर की विचारधारा से जुड़े लोग शामिल हुए। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वीर सावरकर को राष्ट्रवाद, त्याग और संघर्ष का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर देश और बिहार दोनों को नई दिशा दी जा सकती है।

कार्यक्रम की शुरुआत वीर सावरकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीर सावरकर को लेकर दिए गए वक्तव्यों और श्रद्धांजलि से जुड़ी ऑडियो-विजुअल क्लिप भी प्रदर्शित की गई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सावरकर का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है और देश का बच्चा-बच्चा उनके राष्ट्रप्रेम और संघर्षों से परिचित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के कई अध्यायों में अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को वह स्थान नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के साथ-साथ कुछ भारतीय इतिहासकारों ने भी कई क्रांतिकारियों के योगदान को सीमित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सावरकर ने लगभग 27 वर्षों तक जेल में अमानवीय यातनाएं झेलीं, लेकिन उनके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े। अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां स्वतंत्रता सेनानियों से कठोर मजदूरी कराई जाती थी और सबसे अधिक अत्याचार सावरकर को सहने पड़े।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उसी राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसकी प्रेरणा वीर सावरकर जैसे क्रांतिकारियों से मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए “नेशन फर्स्ट” की सोच जरूरी है और यही विचारधारा देश को विकसित भारत की ओर ले जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में भी इसी सोच के साथ विकास कार्यों को गति दी जा रही है।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि बिहार में वीर सावरकर के जीवन और विचारों पर शोध कार्य को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को इतिहास के उन व्यक्तित्वों से परिचित कराना जरूरी है जिन्होंने देश के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि सावरकर के विचारों पर रिसर्च कर नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बिहार के विकास मॉडल पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है। औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार नई नीतियों पर काम कर रही है ताकि बिहार में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हो सकें और युवाओं को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य से बाहर रोजगार के लिए गए युवाओं को वापस लाने और उन्हें बिहार में अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि बिहार के सभी 534 प्रखंडों में मॉडल स्कूल के रूप में सरस्वती विद्या निकेतन स्थापित किए जाएंगे। उनका दावा था कि ये संस्थान इतने आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण होंगे कि अभिभावक बड़े निजी स्कूलों को छोड़कर यहां अपने बच्चों का दाखिला कराना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार ऐतिहासिक रूप से ज्ञान की धरती रहा है और नालंदा तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय इसका प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री ने बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जिसने महात्मा गांधी को “बापू” के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि बिहार ने हमेशा देश को नई वैचारिक दिशा दी है और समाजवादी आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक यहां के लोगों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की विभिन्न भाषाएं और लोकसंस्कृतियां राज्य की असली ताकत हैं।

भ्रष्टाचार और अपराध के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार किसी भी सूरत में अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता और कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करने वालों के लिए जेल के दरवाजे हमेशा खुले हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अपराध की घटनाओं पर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा को लेकर भी नई जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अब सरकारी कर्मचारियों को विदेश भ्रमण के बजाय बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को समझने के लिए राज्य भ्रमण कराया जाएगा। उनका कहना था कि बिहार के लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और धरोहरों को करीब से समझें, यही सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने यह भी तय किया है कि 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि राज्य का पैसा राज्य में ही रहे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यदि जरूरत पड़ी तो औद्योगिक नीतियों में बदलाव भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की जनसंख्या और संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने निवेशकों से बिहार पर भरोसा जताने की अपील की और कहा कि सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के बजट और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर विकास योजनाओं को गति दी जा रही है।

कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, सांसद शिवेश कुमार और अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे। पुस्तक के लेखकों अजय कुमार सिन्हा और संजय कुमार सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया और पुस्तक की रूपरेखा पर जानकारी दी। समारोह में कई जनप्रतिनिधि, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और बड़ी संख्या में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की मजबूत आवाज थे। उन्होंने कहा कि उनके विचारों को समाज और युवाओं तक पहुंचाना समय की जरूरत है और बिहार सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम करेगी।

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