
भागलपुर, 27 मई 2026: भागलपुर में लगातार आ रही तेज आंधी और तूफान अब लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। परबत्ता थाना क्षेत्र के राधोपुर गांव में एक दर्दनाक हादसे में पेड़ गिरने से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मृतक की पहचान हरी प्रसाद मंडल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले रात में आए भीषण आंधी और तूफान के दौरान यह हादसा हुआ था। उस समय हरी प्रसाद मंडल अपने बासा पर सो रहे थे। अचानक तेज हवा के बीच एक बड़ा पेड़ उखड़कर सीधे उनके ऊपर गिर पड़ा। हादसा इतना भयावह था कि वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात में अचानक तेज हवा और बारिश शुरू हो गई थी। गांव के लोग अपने-अपने घरों में दुबके हुए थे। इसी दौरान जोरदार आवाज सुनाई दी और लोगों को पता चला कि एक विशाल पेड़ गिर गया है। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो देखा कि हरी प्रसाद मंडल पेड़ की भारी शाखाओं के नीचे दबे हुए हैं।
ग्रामीणों और परिजनों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला। घायल अवस्था में उन्हें तुरंत नजदीकी सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया।
परिजनों ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी, लेकिन शरीर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आखिरकार इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।
मृतक के परिजन ने बताया कि परिवार को इस हादसे ने पूरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि हरी प्रसाद मंडल परिवार के मुख्य सहारा थे और उनकी अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। परिजनों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
गांव में घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। मृतक के घर पर लोगों की भीड़ जुटी रही और हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने में लगा रहा। महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने बताया कि हरी प्रसाद मंडल बेहद मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से भागलपुर और आसपास के इलाकों में लगातार तेज आंधी और तूफान आ रहे हैं। कई जगहों पर पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने और मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव और सड़क किनारे कई पुराने और कमजोर पेड़ खड़े हैं, जो तेज हवा के दौरान कभी भी गिर सकते हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे पेड़ों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और लगातार बढ़ रही तेज आंधी की घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम के कारण अचानक तेज तूफान और भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा खतरा पैदा हो रहा है।
मौसम विभाग ने भी हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में तेज हवा और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद गांव के लोग अब काफी डरे हुए हैं। कई परिवार रात के समय खराब मौसम होने पर घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने और राहत टीमों को सक्रिय रखने की मांग की है।
मायागंज अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, आंधी और तूफान के दौरान घायल होने वाले कई अन्य लोगों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तेज हवाओं के कारण पेड़ और टीन शेड गिरने की घटनाओं में लगातार लोग घायल हो रहे हैं।
घटना के बाद परबत्ता थाना पुलिस ने भी मामले की जानकारी ली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसा प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी घटना पर दुख जताया है। कई लोगों ने सरकार से मांग की है कि प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता और सरकारी मदद दी जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं हर साल बरसात और आंधी के मौसम में सामने आती हैं, लेकिन सुरक्षा और रोकथाम के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते। लोगों ने प्रशासन से गांवों में जर्जर पेड़ों की जांच कराने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी की मांग की है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया। गांव में हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि यदि समय रहते कमजोर पेड़ों को हटाने और सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान दिया जाता, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल पूरे इलाके में शोक और डर का माहौल बना हुआ है।


