
प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय में लंबित मामलों, कथित अनियमितताओं, छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की है। परिषद ने साफ शब्दों में कहा है कि केवल जांच कमिटी बनाकर मामलों को दबाने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भागलपुर में आयोजित एक बैठक और विरोध प्रदर्शन के दौरान परिषद के नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। छात्र नेताओं का कहना था कि कुलपति की अनुपस्थिति में छात्रों को अपनी आवाज पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है। लंबे समय तक हजारों संदेश भेजने और विरोध दर्ज कराने के बाद कुछ मामलों में जांच कमिटी तो बनाई गई, लेकिन अब तक किसी भी मामले में स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।
परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलसचिव से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और पांच दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन और अनशन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में कार्यरत कुछ शिक्षकों पर भी गंभीर आरोप लगाए। संगठन का कहना है कि कुछ प्रोफेसर शिक्षक की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहे हैं और परिसर में अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है। परिषद ने मांग की कि जिन शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
छात्र संगठन ने विशेष रूप से प्रो. अमित रंजन और सुशील मंडल से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि इन मामलों में गठित जांच समितियों का आखिर क्या निष्कर्ष निकला। परिषद का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से कमिटी बनाकर मामलों को ठंडे बस्ते में डालने की परंपरा चल रही है, जिसके कारण छात्रों का भरोसा प्रशासन पर से उठता जा रहा है।
बैठक के दौरान मारवाड़ी कॉलेज से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया गया। परिषद ने आरोप लगाया कि एक सरकारी कर्मचारी पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की घटना में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्र नेताओं ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई तो विश्वविद्यालय का माहौल और खराब हो सकता है।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय हॉस्टलों को लेकर भी चिंता जाहिर की। परिषद का आरोप है कि कई हॉस्टलों और विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी लोगों का अवैध कब्जा बना हुआ है। इससे छात्रों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है और कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। परिषद ने मांग की कि टीएमबीयू के हॉस्टलों और विश्वविद्यालय परिसर से अवैध कब्जा हटाया जाए तथा बाहरी तत्वों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों को संरक्षण देकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
टीएनबी कॉलेज में हाल में हुई एक विवादित घटना को लेकर भी एबीवीपी ने प्रशासन को घेरा। संगठन का कहना है कि कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है और फुटेज में कई लोग लाठी, डंडा और हथियार के साथ दिखाई दे रहे हैं। परिषद ने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्र नेताओं ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा और भय का माहौल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि यदि परिसर में हथियार लेकर आने वालों पर कार्रवाई नहीं होती है तो इससे छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना और बढ़ेगी।
इंटर्नशिप के नाम पर छात्रों से लिए गए शुल्क को लेकर भी परिषद ने सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि कई छात्रों से इंटर्नशिप के नाम पर राशि ली गई, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। परिषद ने मांग की कि छात्रों से वसूली गई राशि जल्द वापस की जाए।
एसएम कॉलेज में संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम को लेकर भी जांच की मांग उठाई गई। परिषद का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि किस आधार पर इंटर्नशिप कराई गई और इसमें किन नियमों का पालन किया गया। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
बैठक में मौजूद छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को अब केवल आश्वासन की राजनीति छोड़कर वास्तविक कार्रवाई करनी होगी। उनका कहना था कि छात्रों से जुड़े मामलों को लगातार टालने से असंतोष बढ़ रहा है और यदि स्थिति नहीं बदली तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
एबीवीपी नेताओं ने कहा कि छात्र संगठन हमेशा शिक्षा, सुरक्षा और पारदर्शिता के मुद्दों को लेकर संघर्ष करता रहा है। परिषद का दावा है कि उसका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच संवाद नहीं बढ़ा तो आने वाले दिनों में विवाद और गहरा सकता है।
बैठक और विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडेय, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैप्पी आनंद, जिला संयोजक सूर्य प्रताप, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजा यादव, हर्ष मिश्रा, ऋषि महतो, किशन सोनी, प्रभाकर मंडल, प्रत्यूष राज, शिवम तिवारी, हिमांशु सिंह, आशीष यादव सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
छात्र नेताओं ने अंत में कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के पास अभी भी स्थिति सुधारने का अवसर है। यदि पांच दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो परिषद छात्रहित में व्यापक आंदोलन छेड़ेगी। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


