भागलपुर में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर बड़ा संदेश: POSH Act को लेकर अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

समाहरणालय परिसर स्थित समीक्षा भवन में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और लैंगिक समानता को लेकर एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम “कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013” यानी POSH Act पर आधारित था। कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास निगम, भागलपुर के तत्वावधान में किया गया, जिसमें जिले और प्रखंड स्तर के कई अधिकारियों तथा कर्मियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्यस्थल सुनिश्चित करने को लेकर जागरूकता बढ़ाना था। प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को POSH अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, महिलाओं के अधिकारों और शिकायत निवारण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।

इस कार्यशाला में जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं प्रशिक्षण सत्र का संचालन जेंडर विशेषज्ञ गुंजन बिहारी ने किया, जिन्होंने लैंगिक संवेदनशीलता और महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला सुरक्षा और सम्मान से जुड़े विषयों पर परिचर्चा के साथ हुई। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी संस्थान की कार्य संस्कृति तभी सकारात्मक मानी जा सकती है जब वहां महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। इसी सोच के साथ POSH अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक कार्यालय की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वहां कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिले। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव या उत्पीड़न केवल सामाजिक रूप से गलत नहीं बल्कि कानूनन अपराध भी है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यालयों में आंतरिक शिकायत समिति यानी ICC को सक्रिय रखें और यह सुनिश्चित करें कि शिकायतों का निपटारा संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से समझौता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लैंगिक समानता किसी भी आधुनिक और प्रगतिशील संस्थान की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा तो उनकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे, जिससे संस्थानों की कार्य संस्कृति भी बेहतर होगी।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान जेंडर विशेषज्ञ गुंजन बिहारी ने POSH अधिनियम 2013 की पृष्ठभूमि और उसके कानूनी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाले लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया था।

उन्होंने विशाखा गाइडलाइंस का भी उल्लेख किया, जो भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार माना जाता है। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाए गए और बाद में POSH Act लागू किया गया।

कार्यक्रम में यौन उत्पीड़न की परिभाषा, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, जांच की व्यवस्था और आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कार्यस्थल पर किसी महिला के साथ अनुचित व्यवहार, अशोभनीय टिप्पणी, मानसिक दबाव, धमकी या शारीरिक उत्पीड़न जैसे मामले कानून के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यस्थल की परिभाषा केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है। किसी कर्मचारी के कार्य से जुड़ा कोई भी स्थान, आधिकारिक यात्रा, प्रशिक्षण स्थल या डिजिटल माध्यम भी कार्यस्थल की श्रेणी में आ सकता है।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न केस स्टडी और उदाहरणों के जरिए प्रतिभागियों को व्यवहारिक जानकारी दी गई। PPT प्रस्तुतीकरण के माध्यम से यह समझाया गया कि किसी शिकायत की जांच किस प्रकार की जाती है और शिकायत समिति को किन नियमों का पालन करना होता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने विषय से जुड़े कई सवाल भी पूछे। कई प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और यह जानने की कोशिश की कि किसी शिकायत की स्थिति में संस्थानों को किस तरह कार्रवाई करनी चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि POSH Act केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कार्यस्थल की संस्कृति को अधिक संवेदनशील और सुरक्षित बनाना भी है। उन्होंने कहा कि कई बार महिलाएं डर या सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं कर पातीं, इसलिए संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे भरोसेमंद माहौल तैयार करें।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास निगम के जिला परियोजना प्रबंधक मणिशंकर, जिला मिशन समन्वयक तबरेज़ खान, लैंगिक विशेषज्ञ विवेक कुमार और फाइनेंस लिट्रेसी स्पेशलिस्ट अभिषेक सुमन सहित कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। आयोजन में उनकी सक्रिय भागीदारी को सराहनीय बताया गया।

कार्यशाला के दौरान यह भी कहा गया कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना विकसित किए बिना वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। सरकारी संस्थानों को इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए ताकि समाज के अन्य हिस्सों में भी सकारात्मक संदेश पहुंचे।

ICDS जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सह मिशन शक्ति की नोडल पदाधिकारी अनुपमा कुमारी ने कार्यक्रम के समापन के दौरान सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि POSH अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब सभी विभाग इसे गंभीरता से लागू करें और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने-अपने कार्यालयों में जागरूकता बढ़ाने का काम करें और महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को संस्थागत संस्कृति का हिस्सा बनाएं।

भागलपुर में आयोजित यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की कोशिश है कि महिलाओं को ऐसा वातावरण मिले जहां वे बिना किसी भय और दबाव के अपने कार्यों को पूरी स्वतंत्रता और सम्मान के साथ कर सकें।

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