
भागलपुर में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को समाहरणालय परिसर में राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) के तहत जिलास्तरीय समिति की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी ने की, जिसमें जिले में संचालित पशुधन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों, टीकाकरण अभियानों, कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं तथा भारत पशुधन पोर्टल पर डाटा अपलोड की स्थिति की गहन समीक्षा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में पशुपालन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत बनाना था ताकि पशुधन से जुड़ी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पशुओं से संबंधित सही और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होने से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पशुपालकों तक पहुंचाना आसान होगा।
बैठक में उप विकास आयुक्त, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, विमूल के प्रबंधक, NDLM के नोडल अधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले की विभिन्न नगर पंचायतों के पदाधिकारी भी बैठक से जुड़े और अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
बैठक के दौरान डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और उन्नत नस्ल विकसित करने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिले के सभी पशुपालकों तक सरकारी सेवाएं समय पर पहुंचे। इसके लिए पंचायत और नगर निकाय स्तर पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पशुधन क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में भारत पशुधन पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बताया गया कि पोर्टल के माध्यम से पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसमें टीकाकरण, नस्ल, स्वास्थ्य स्थिति, कृत्रिम गर्भाधान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। इससे भविष्य में पशुओं की निगरानी और रोग नियंत्रण अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल डेटा के जरिए सरकार को पशुधन की वास्तविक संख्या, उनके स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे योजनाओं की योजना-निर्माण प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख बन सकेगी।
बैठक के दौरान कई अधिकारियों ने डेटा अपलोड में आ रही तकनीकी और क्षेत्रीय चुनौतियों की भी जानकारी दी। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण पोर्टल अपडेट करने में परेशानी सामने आ रही है। इस पर जिलास्तरीय अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समस्याओं के त्वरित समाधान का निर्देश दिया ताकि पोर्टल पर सभी सूचनाएं समय पर दर्ज की जा सकें।
जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान कहा कि NDLM का उद्देश्य केवल डेटा संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पशुपालन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गांव स्तर तक जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को भी डिजिटल प्रणाली के फायदे बताए जाएं।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि बिहार सरकार पशुपालन क्षेत्र में तकनीकी सुधार को प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से पशुओं की पहचान, स्वास्थ्य निगरानी और उत्पादन क्षमता में सुधार लाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे डेयरी उद्योग को भी मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विमूल प्रबंधन की ओर से भी डेयरी विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण, पशु आहार और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो सके।
बैठक के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने टीकाकरण कार्यक्रमों की उपलब्धियों को भी साझा किया। बताया गया कि जिले में पशुओं को विभिन्न घातक बीमारियों से बचाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इससे पशुधन की मृत्यु दर में कमी आई है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिली है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत पशुधन पोर्टल को और अधिक मजबूत बनाने की योजना है। इसके जरिए पशुपालकों को कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकती हैं, जिससे उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पशुधन क्षेत्र के विकास के लिए डिजिटल व्यवस्था को पूरी गंभीरता से लागू करना जरूरी है। साथ ही सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभुकों तक पहुंचे और पोर्टल पर हर जानकारी सही तरीके से अपडेट हो।
भागलपुर में आयोजित यह समीक्षा बैठक इस बात का संकेत है कि प्रशासन पशुपालन क्षेत्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा तो जिले के पशुपालकों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।


