
भागलपुर: बिहार में बीती रात आए तेज आंधी-तूफान ने जहां आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया, वहीं सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए। भागलपुर के समीप स्थित सबौर रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे पुनर्विकास कार्य का एक हिस्सा तेज हवाओं के सामने टिक नहीं पाया और कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे स्टेशन परिसर में जगह-जगह टूट-फूट की तस्वीरें सामने आने के बाद अब निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि सबौर रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास के लिए करीब 19 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है। इस योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, आकर्षक प्रवेश द्वार, नए शेड, सौंदर्यीकरण और अन्य आधारभूत ढांचे विकसित किए जा रहे थे। लेकिन एक तेज आंधी ने इन दावों की मजबूती पर ही सवाल खड़े कर दिए।
आंधी के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि स्टेशन परिसर में बनाए गए कई नए ढांचे टूटकर बिखर गए। कहीं लोहे की चादरें हवा में उड़ गईं तो कहीं बड़े-बड़े स्ट्रक्चर नीचे गिर पड़े। कुछ हिस्सों में दीवार जैसी संरचनाएं क्षतिग्रस्त दिखीं, जबकि कई जगहों पर निर्माण सामग्री बिखरी हुई नजर आई। यह दृश्य देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए।
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुसार हुआ होता तो एक सामान्य आंधी इतनी बड़ी तबाही नहीं मचा सकती थी। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया होगा, तभी नया ढांचा पहली बड़ी परीक्षा में ही फेल हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने पूरे मामले को और तूल दे दिया है। लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य इतना कमजोर कैसे साबित हुआ। कई यूजर्स ने इसे सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बताते हुए जांच की मांग की है।
सबसे अधिक चर्चा उस संरचना को लेकर हो रही है जिसमें बड़े-बड़े खाली हिस्से और छेद दिखाई दे रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिजाइन ऐसा था कि हवा आसानी से एक ओर से दूसरी ओर गुजर सकती थी, लेकिन इसके बावजूद पूरी संरचना टूट गई। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि निर्माण में तकनीकी सावधानियों का ठीक से पालन नहीं किया गया।
रेलवे स्टेशन का यह पुनर्विकास कार्य अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किया जा रहा है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य देशभर के छोटे और मध्यम श्रेणी के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक रूप देना है। इसके तहत यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ स्टेशनों का सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है। बिहार के कई रेलवे स्टेशन इस योजना में शामिल हैं और उन पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं।
लेकिन सबौर स्टेशन की घटना ने इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी और गुणवत्ता जांच होती तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती। विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है, खासकर तब जब परियोजना करोड़ों रुपये की हो।
इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर जांच की बात कही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर निर्माण का कौन-सा हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित हुआ। हालांकि अब तक इस मामले में किसी अधिकारी या निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में शुरुआत से ही अनियमितताएं थीं। कुछ लोगों का कहना है कि कार्य की गति तो तेज दिखाई जा रही थी, लेकिन गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा था। कई नागरिकों ने यह भी दावा किया कि कुछ हिस्सों में सामग्री बेहद हल्की और कमजोर प्रतीत हो रही थी।
भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बीती रात तेज हवाओं और बारिश ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। कई जगह पेड़ उखड़ गए, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और घरों की छतें तक उड़ गईं। लेकिन सबौर रेलवे स्टेशन की तस्वीरों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा क्योंकि यहां नुकसान किसी पुराने ढांचे को नहीं बल्कि हाल ही में तैयार किए गए नए निर्माण को हुआ।
इस घटना के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों की जांच केवल कागजों तक सीमित रह गई है। आम लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये जनता के टैक्स से खर्च किए जा रहे हैं, तब निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार और रेलवे प्रशासन पर निशाना साधते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इधर रेलवे सूत्रों का कहना है कि तकनीकी टीम जल्द ही पूरे निर्माण कार्य का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि कहीं निर्माण मानकों में कमी पाई गई तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई संभव है। हालांकि आम लोगों को अब जांच रिपोर्ट से ज्यादा इस बात का इंतजार है कि क्या वास्तव में जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
फिलहाल सबौर रेलवे स्टेशन की यह घटना सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन चुकी है। पहली ही तेज आंधी में करोड़ों की परियोजना का हिस्सा टूट जाना यह संकेत दे रहा है कि कहीं न कहीं निर्माण प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट क्या खुलासा करती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


