बिहार में औद्योगिक निवेश को बड़ी रफ्तार, बरियारपुर में 62 करोड़ की लागत से बनेगी आधुनिक PEB फैब्रिकेशन यूनिट

पटना : बिहार में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार ने एक और बड़े निवेश परियोजना को मंजूरी दी है। मुंगेर जिले के औद्योगिक क्षेत्र बरियारपुर में अत्याधुनिक PEB Fabrication Material निर्माण इकाई स्थापित करने की स्वीकृति मिलने के बाद अब यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद बढ़ गई है। करीब ₹62.27 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाली इस परियोजना को Experia Prefaxo Pvt. Ltd. द्वारा विकसित किया जाएगा। इस यूनिट के शुरू होने से बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और राज्य में आधुनिक विनिर्माण उद्योग को मजबूती मिलेगी।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह इकाई बरियारपुर औद्योगिक क्षेत्र में लगभग पांच एकड़ भूमि पर स्थापित की जाएगी। परियोजना के संचालन के बाद करीब 400 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं बिहार में औद्योगिक माहौल को बदलने में अहम भूमिका निभा सकती हैं, क्योंकि लंबे समय से राज्य में बड़े औद्योगिक निवेश की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

इस परियोजना को स्वीकृति बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार यानी BIADA की परियोजना स्वीकृति समिति की बैठक में दी गई। यह बैठक उद्योग विभाग के सचिव सह BIADA एवं IDA के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक के दौरान राज्य के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई और पात्र कंपनियों को भूमि एवं प्लग एंड प्ले शेड्स आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इसी प्रक्रिया के तहत Experia Prefaxo Pvt. Ltd. को बरियारपुर में निर्माण इकाई लगाने की मंजूरी प्रदान की गई।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित PEB Fabrication Unit आधुनिक तकनीक से लैस होगी और इसका उपयोग निर्माण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न ढांचागत कार्यों में किया जाएगा। PEB यानी Pre-Engineered Building Material का इस्तेमाल आज के समय में बड़े औद्योगिक भवनों, वेयरहाउस, फैक्ट्री, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बिहार में इस तरह की यूनिट की स्थापना को औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना के जरिए बिहार में स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी और बाहर के राज्यों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही स्थानीय उद्यमियों और छोटे व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। औद्योगिक क्षेत्र में निवेश बढ़ने से आसपास के इलाकों में व्यापारिक गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मशीनरी, श्रम और सेवा क्षेत्रों में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस परियोजना को बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार नई औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही है, जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार सरकार का लक्ष्य बिहार को आधुनिक औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं से युवाओं के लिए कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार चाहती है कि बिहार के युवा राज्य के भीतर ही रोजगार प्राप्त करें और उन्हें दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उद्योग विभाग विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार की नई औद्योगिक नीति और तेज प्रशासनिक प्रक्रियाओं का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।

उद्योग विभाग के सचिव एवं BIADA के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि बिहार सरकार संतुलित और व्यापक औद्योगिक विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि BIADA की ओर से निवेशकों को पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क, बिजली, जलापूर्ति, परिवहन और सुगम प्रशासनिक प्रक्रिया जैसी सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य सरकार चाहती है कि उद्योगों की स्थापना में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और परियोजनाएं तेजी से धरातल पर उतरें। इसके लिए विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में यदि इसी तरह निवेश परियोजनाओं को गति मिलती रही तो आने वाले वर्षों में राज्य औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। लंबे समय तक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहने वाले बिहार में अब विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार की कोशिश है कि निजी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित किया जाए और स्थानीय स्तर पर उद्योगों का नेटवर्क तैयार हो।

बरियारपुर में प्रस्तावित यह परियोजना सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं बल्कि बिहार में बदलते औद्योगिक माहौल का संकेत भी मानी जा रही है। रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना विकास और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के जरिए यह परियोजना क्षेत्रीय विकास को नई गति दे सकती है। आने वाले समय में यदि ऐसी और परियोजनाएं राज्य में स्थापित होती हैं, तो बिहार रोजगार और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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