बिहार में हर तीन महीने पर व्यवसायियों संग होगी डीएम-एसपी की बैठक, उद्योग नीति में बदलाव के लिए सरकार तैयार

पटना में आयोजित बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के शताब्दी वर्ष समारोह में मुख्यमंत्री ने उद्योग, निवेश, सुरक्षा और बिहार के भविष्य को लेकर कई बड़े ऐलान किए। ‘व्यवसाय, राजनीति और विकास’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में उद्योगों के विस्तार और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने घोषणा की कि अब प्रत्येक तीन महीने पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक जिला स्तर पर व्यवसायियों के साथ बैठक करेंगे ताकि सुरक्षा, निवेश और प्रशासनिक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि निजी निवेश और उद्योगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने उद्योगपतियों से भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि औद्योगिक नीति में किसी भी स्तर पर बदलाव या संशोधन की आवश्यकता महसूस होती है तो उद्योग विभाग सीधे सुझावों पर काम करेगा। उन्होंने बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से आग्रह किया कि एक प्रतिनिधिमंडल उद्योग मंत्री से मिलकर उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार नई नीतियों के सुझाव दे, ताकि बनाई गई पॉलिसी सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर उतर सके।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की तस्वीर तभी बदलेगी जब यहां बड़े पैमाने पर उद्योग आएंगे और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि समृद्धि का रास्ता उद्योगों, व्यापार और रोजगार से होकर गुजरता है। सरकार चाहती है कि बिहार निवेशकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद राज्य बने। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापित करने के लिए सबसे जरूरी दो चीजें हैं—विश्वास और सुरक्षा। इन्हीं दोनों बिंदुओं पर राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब राज्य में अपराध करने वालों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपराधी का कोई जाति या धर्म नहीं होता और सरकार किसी भी स्थिति में कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं देगी। व्यवसायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और इसे लेकर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने देश की शीर्ष उद्योग नीतियों में जगह बनाने वाली व्यवस्था तैयार की है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि नीति बनने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर निवेश नहीं आ पाया है। इसी कारण अब उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार नीतियों में लगातार सुधार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में आईटी, सर्विस सेक्टर, होटल उद्योग और आधुनिक व्यापारिक गतिविधियों के लिए पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के उपयोग की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

बुनियादी ढांचे को लेकर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में गंगा और सोन नदी के किनारे 126 किलोमीटर लंबा मरीन ड्राइव तैयार किया जाएगा। इसके अलावा उत्तर और दक्षिण बिहार को बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए कई नए पुलों का निर्माण जारी है। राघोपुर ब्रिज के उद्घाटन की तैयारी अगले महीने की जा रही है, जिससे समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर जैसे जिलों की राजधानी पटना तक पहुंच और आसान हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि जेपी गंगा पथ जैसी परियोजनाएं बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान दे रही हैं। लगभग 21 किलोमीटर लंबे इस पथ के निर्माण में 12 वर्ष लगे और इससे राजधानी की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि महात्मा गांधी सेतु और जेपी सेतु के समानांतर नए पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि यातायात दबाव को कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने दक्षिण बिहार में जल संकट से निपटने के लिए सोन नदी पर बराज निर्माण की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, आरा और पटना जैसे जिलों में जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम होगा।

व्यापार और शहरी विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 14 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित कर नई टाउनशिप नीति पर काम शुरू किया है। इसके तहत साढ़े छह लाख एकड़ भूमि पर ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिसमें लगभग छह लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना और शहरी इलाकों में दोगुना मुआवजा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने एमएसएमई सेक्टर को बिहार की आर्थिक रीढ़ बताते हुए कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिए बिना राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने बंद पड़ी चीनी मिलों को सहकारिता मॉडल के तहत दोबारा शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार 14 करोड़ लोगों का विशाल बाजार है और यहां उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

कार्यक्रम में खेल और शिक्षा पर भी मुख्यमंत्री ने विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि मोइनुल हक स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है और सरकार बीसीसीआई से बिहार के लिए आईपीएल टीम की मांग करेगी, ताकि यहां के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच मिल सके। उन्होंने क्रिकेटर का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के युवा देशभर में अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं।

शिक्षा क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने हर प्रखंड में मॉडल स्कूल खोलने की योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार के सभी 534 प्रखंडों में आधुनिक सुविधाओं वाले मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। जिला मुख्यालयों और छोटे शहरों में भी नए मॉडल स्कूल खोले जाएंगे ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि भविष्य में दूसरे देशों के छात्र भी बिहार आकर पढ़ाई करें।

मुख्यमंत्री ने तकनीक और डिजिटल व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में तीन करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ता हैं और नई तकनीकों से जुड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 शुरू किया गया है। यदि किसी आवेदन पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी पर सीधे कार्रवाई होगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित नि:शुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण भी किया और वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से बातचीत की। इस मौके पर उद्योग जगत से जुड़े कई प्रमुख प्रतिनिधि, व्यवसायी और विभिन्न जिलों से आए कारोबारी संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।

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