
भागलपुर, 24 मई 2026। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक प्रखंड क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मौसम के बीच एक अत्यंत मर्मान्तिक, संवेगात्मक और हृदयविदारक जल हादसा सामने आया है। खरीक के गोटखरीक इलाके के रहने वाले दो कनिष्ठ किशोरों की गंगा नदी के गहरे पानी के विन्यास में समा जाने से असामयिक और खूनी मौत हो गई।
यह भीषण दुर्घटना शनिवार की सुबह करीब 11:00 बजे उस समय लाइव मोड पर सक्रिय हुई, जब दोनों किशोर अपने आवासीय अंचल से प्रस्थान कर मुख्य गंगा घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। नदी के भीतरी प्रक्षेप में जल के तेज बहाव और ढलान की सांख्यिकी को भांपने में असफल रहने के कारण दोनों का पैर अचानक कंक्रीट मलबे और गाद से फिसल गया, जिसके बाद वे गहरे जल चक्रव्यूह के भीतर म्यूट हो गए। इस दोहरे हादसे के पटल पर आते ही संपूर्ण गोटखरीक गांव और खरीक अंचल के भीतर भारी चीख-पुकार, कोहराम और गहरा मानसिक अवसाद संधारित देखा जा रहा है।
घर से 10 किलोमीटर दूर काजीकौरैया घाट गए थे नहाने, अचानक गहरे पानी में समाए
इस दुखद और आंखें नम कर देने वाले वाकये की धरातलीय कड़ियों और जासूसी विन्यासों की स्क्रूटनी करने पर यह प्रामाणिक सत्य पटल पर आता है कि गोटखरीक निवासी दो किशोर—Bambam कुमार और Aniket कुमार—शनिवार की सुबह अपने कनिष्ठ मित्रों के साथ घर से बाहर निकले थे। भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के संचरण से राहत पाने के उद्देश्य से दोनों कप्तानों ने गंगा नदी में सामूहिक रूप से स्नान करने की एक कूटनीतिक योजना लाइन-अप की थी।
इसके लिए वे अपने स्थानीय अंचल के घाटों को छोड़कर करीब 10 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके काजीकौरैया स्थित मुख्य गंगा घाट के हॉट-स्पॉट पर प्रविष्ट हुए थे। सुबह करीब 11:00 बजे का समय सारणी लॉक था जब दोनों ने नदी के जल विन्यास में कदम रखा।
प्रत्यक्षदर्शियों और घाट पर मौजूद अन्य मुसाफिरों के अनुसार, शुरुआती कतिपय मिनटों तक दोनों किशोर पानी के किनारे आंशिक अठखेलियां कर रहे थे। इसी बीच, तैरने के प्रक्रम को लाइव करने और नदी की भीतरी लहरों का आनंद लेने के विनिर्देश पर वे धीरे-धीरे रेतीले किनारे से हटकर मुख्य धारा की दिशा में डाइवर्ट हो गए। काजीकौरैया घाट के भीतरी प्रक्षेप में हालिया दिनों में हुए भू-कटाव के कारण पानी के नीचे एक भयंकर और गहरा खड्ड (गैप) विनिर्मित हो चुका था, जिससे दोनों पूरी तरह अनभिज्ञ संधारित थे।
जैसे ही बमबम का पैर उस जलीय ढलान पर पड़ा, उसकी यांत्रिक पकड़ मिट्टी से शत-प्रतिशत ब्लॉक हो गई और वह तेजी से नीचे की ओर फिसलने लगा। अपने सहोदर मित्र को पानी के चंगुल में डूबता और जीवन की रक्षा के लिए हाथ-पैर मारता देख अनिकेत ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उसे बचाने का प्रखर प्रयास किया। परंतु, जल की सघनता और बहाव का ग्राफ इतना लाउड था कि अनिकेत भी खुद को नियंत्रित नहीं रख सका और दोनों एक-दूसरे को पकड़ते हुए गहरे भंवर के भीतर समा गए। घाट के मुहाने पर खड़े अन्य कनिष्ठ साथियों ने जब इस खौफनाक दृश्य को देखा, तो अंचल में भारी चीख-पुकार लाइव हो गई।
मां फुदो देवी का बुझा इकलौता चिराग: दो वर्ष पहले खोए थे पति, सदमे में बार-बार बेहोशी
इस अमानवीय जलीय विसंगति का सबसे दुखद और संवेगात्मक पहलू किशोर बमबम के पारिवारिक विन्यास से एकीकृत संधारित है। बमबम अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र और संपूर्ण आजीविका का एकमात्र सहारा विनिर्मित था। उसके घर की सांख्यिकी पहले से ही अत्यधिक कष्टप्रद और अवसादपूर्ण दौर से गुजर रही थी, क्योंकि मचलते दो वर्ष पूर्व ही बमबम के पिता की एक गंभीर बीमारी के कारण असामयिक मौत हो चुकी थी। पिता के मलबे में तब्दील होने के उपरांत उसकी विधवा मां फुदो देवी ने कड़ा आर्थिक और सामाजिक संघर्ष संधारित करते हुए अपने इस इकलौते चिराग को पाल-पोसकर बड़ा किया था। वह अपनी बूढ़ी आंखों में बेटे के सफल करियर और सुनहरे भविष्य के कई विलेख संजोए हुए लाइव मोड पर जीवन यापन कर रही थी।
शनिवार की दोपहर जब स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों के संयुक्त श्रम से बमबम के निर्जीव शरीर को गंगा के भीतरी मलबे से बाहर निकाल कर किनारे पर प्रविष्ट कराया गया, तो दृश्य देखकर वहां उपस्थित प्रत्येक मुसाफिर का कलेजा पूरी तरह से फट गया। अपने इकलौते पुत्र के ठंडे और निष्प्राण शरीर को आँखों के सामने देखते ही मां फुदो देवी के ऊपर दुखों का एक अभेद्य पहाड़ टूट पड़ा। वह गहरे मानसिक सदमे के कारण चीख मारकर सीधे कंक्रीट की जमीन पर गश खाकर गिर गईं और अचेत अवस्थिति में चली गईं।
विधवा मां को इस क्रूर धरातलीय हकीकत पर आंशिक विश्वास भी हस्तगत नहीं हो रहा था कि उसका लाडला अब इस दुनिया के विन्यास से हमेशा के लिए म्यूट हो चुका है। अचेतन अवस्था के भीतर भी उसकी चेतना इसी भ्रम में संधारित थी कि अभी उसका बेटा नदी से स्नान कर वापस घर लौटेगा, उसके केबिन का किवाड़ खटखटाएगा और उससे कड़क लहजे में भोजन की मांग करेगा। इस करुण विलाप को देख वहां जुटी महिलाओं की आंखें भी आंसुओं से आकंठ भर गईं।
अनिकेत की मां तेतरी देवी का भी टूटा हौसला: सहोदर भाई-बहन के बीच पसरा सन्नाटा
इस दोहरे खूनी हादसे की दूसरी कड़वी प्रविष्टि किशोर अनिकेत के आवासीय अंचल में दर्ज की गई है। अनिकेत की मौत की प्रामाणिक इनपुट जैसे ही गोटखरीक स्थित उसके घर के मुहाने पर फ्लैश हुई, समूचे परिवार के भीतर तबाही का सन्नाटा पसर गया। अनिकेत अपने संपूर्ण भाई-बहनों की सांख्यिकी के भीतर दूसरे स्थान पर संधारित था; परिवार में कुल दो भाई और एक सहोदर बहन का विन्यास था, जिनके बीच अनिकेत अपनी चंचलता और कप्तानी व्यवहार के कारण सबका प्रिय बना हुआ था।
पुत्र वियोग की इस तीखी आग में जल रही अनिकेत की मां तेतरी देवी का भी रो-रोकर भयंकर हाल हो चुका है। अपने जवान बेटे के शव को चूमते हुए तेतरी देवी बार-बार सुध-बुध खो बैठती थीं और अचेत होकर जमीन पर गिर जाती थीं। अंचल की कनिष्ठ और वरिष्ठ पड़ोसी महिलाएं लगातार उनके चेहरों और हथेलियों पर शीतल जल की बूंदों का छींटा मारकर उन्हें आंशिक होश में लाने के प्रक्रमों में मुस्तैद देखी गईं। घर के भीतर संधारित होने वाले भाई-बहन अपने सहोदर के अचानक म्यूट हो जाने के इस मनोवैज्ञानिक आघात को सहन करने में पूरी तरह असमर्थ संधारित हो रहे थे, जिससे गोटखरीक की पूरी बस्ती के भीतरी किवाड़ दुखों के मलबे में दबे परिलक्षित हुए।
काजीकौरैया घाट पर उमड़ा सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम: स्थानीय प्रशासन से विधिक मुआवजे की मांग
हादसे के टाइम-स्टैम्प के कतिपय पलों के भीतर ही जैसे ही यह विनाशकारी सूचना गोटखरीक और काजीकौरैया के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स और डिजिटल पटलों पर लाइव हुई, दोनों मृतकों की माताओं सहित परिवार के अन्य सदस्यों और सैकड़ों ग्रामीणों का एक बहुत बड़ा सांगठनिक हुजूम बदहवास अवस्थिति में दौड़ते-भागते सीधे गंगा घाट के मुख्य घटना स्थल पर जा धमका। ग्रामीणों ने स्थानीय मल्लाहों और कुशल गोताखोरों के समन्वय से सघन खोज अभियान चलाकर दोनों शवों को ससमय पानी के नीचे से लोकेट कर बाहर निकाला था।
खरीक थाना पुलिस और अंचल प्रशासन के कनिष्ठ अधिकारियों को जैसे ही इस संवेदनशील डूबने के कांड की इनपुट हस्तगत हुई, पुलिस का एक सुरक्षा दस्ता तुरंत सायरन मोड पर काजीकौरैया घाट के मुहाने पर प्रविष्ट हुआ। पुलिस कप्तानों ने कानून की निर्धारित शुचिता के तहत दोनों मृतकों के शवों का विधिक पंचनामा (Inquest Report) तैयार करने की संचिका को एक्टिव किया।
इस दौरान घटना स्थल पर मौजूद गोटखरीक के प्रबुद्ध नागरिकों, मुखिया प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अंचल प्रशासन के समक्ष अपना कड़ा सांगठनिक स्टैंड पटल पर रखा है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि दोनों ही परिवार अत्यधिक निर्धन, कनिष्ठ और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। विशेष रूप से बमबम के घर का तो मुख्य कमाऊ सदस्य ही हमेशा के लिए ब्लॉक हो चुका है।
ऐसी गंभीर मानवीय विसंगति को देखते हुए ग्रामीणों ने अनुमंडल पदाधिकारी (SDPO) और अंचल अधिकारी (CO) से यह प्रखर मांग की है कि आपदा प्रबंधन विभाग के सुसंगत नियमों के आलोक में दोनों पीड़ित माताओं को तत्काल प्रभाव से ₹4-4 लाख (चार-चार लाख रुपये) की विधिक अनुग्रह अनुदान राशि (मुआवजा) हस्तगत कराई जाए, ताकि उनके जीवन यापन के विन्यासों को एक आंशिक बजटीय संबल प्राप्त हो सके। पुलिस प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम प्रक्रम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल भेजने की विधिक कड़ियों को लाइन-अप किया है और पीड़ित परिवारों को ससमय सरकारी सहायता दिलाने का पूरा भरोसा हस्तगत कराया है।


