जनजातीय इलाकों तक पहुंचा प्रशासन, भागलपुर के 58 गांवों में चला विशेष जागरूकता अभियान

भागलपुर में जनजातीय समुदायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशासनिक सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक बड़े जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की है। “सबसे दूर, सबसे पहले” थीम पर आधारित यह अभियान जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन का दावा है कि इस पहल के माध्यम से उन गांवों तक भी योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जहां अब तक सरकारी तंत्र की पहुंच सीमित रही थी।

इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ 18 मई 2026 को जिला पदाधिकारी द्वारा किया गया था। इसके बाद लगातार विभिन्न जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में प्रशासनिक टीमों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 23 मई 2026 को जिले के तीन प्रखंडों के 58 जनजातीय बहुल गांवों में विशेष जनसुनवाई और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, उनकी समस्याओं को सुनना और मौके पर समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू करना था।

प्रशासनिक अधिकारियों, प्रखंड स्तरीय कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से इन गांवों का दौरा किया। गांवों में स्थित आदि सेवा केंद्रों को कार्यक्रम का केंद्र बनाया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने लोगों से सीधा संवाद करते हुए उनकी जरूरतों और समस्याओं को समझने का प्रयास किया।

अभियान के दौरान यह देखने को मिला कि कई ग्रामीण अब भी अनेक योजनाओं की जानकारी से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। खासकर दूरस्थ जनजातीय इलाकों में रहने वाले परिवारों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती। ऐसे में प्रशासन ने घर-घर जाकर लोगों को योजनाओं के लाभ और आवेदन प्रक्रिया के बारे में समझाया। कई जगहों पर अधिकारियों ने स्वयं लोगों के दस्तावेजों की जांच कर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

जिला प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का मकसद केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय के साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत करना भी है। प्रशासन चाहता है कि जनजातीय समाज के लोग बिना किसी डर या झिझक के अपनी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचा सकें। इसी वजह से गांव स्तर पर जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि लोगों को प्रखंड या जिला मुख्यालय तक बार-बार न जाना पड़े।

इन जनसुनवाई शिविरों में ग्रामीणों ने पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, आवास योजना, छात्रवृत्ति और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी रखीं। कई गांवों में लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। अधिकारियों ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को टीकाकरण, पोषण, मातृ स्वास्थ्य और संक्रामक बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूक किया। वहीं शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने बच्चों की नियमित पढ़ाई, स्कूल उपस्थिति और छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी दी। समाज कल्याण विभाग की ओर से वृद्धजन, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को आवेदन प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जनजातीय क्षेत्र अक्सर भौगोलिक और सामाजिक कारणों से मुख्यधारा से पीछे रह जाते हैं, इसलिए ऐसे विशेष अभियान जरूरी हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा और जिन गांवों तक अभी पहुंच नहीं बन पाई है, वहां भी टीमों को भेजा जाएगा।

गांवों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय समुदाय के लोगों ने भी अपनी भागीदारी दिखाई। कई ग्रामीणों ने पहली बार महसूस किया कि प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने के लिए सीधे गांव तक पहुंचा है। महिलाओं ने विशेष रूप से राशन, स्वास्थ्य सुविधा और बच्चों की शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। युवाओं ने रोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों की मांग रखी।

प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि अभियान के दौरान प्राप्त शिकायतों और मांगों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में उनकी निगरानी की जा सके। संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने यह भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जमीन स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

भागलपुर जिले में चलाया जा रहा यह अभियान राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत जनजातीय और पिछड़े इलाकों में सरकारी योजनाओं की पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि योजनाओं का सही लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचता है तो सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के तहत शुरू किया गया यह अभियान फिलहाल लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने में सफल दिखाई दे रहा है। गांवों में अधिकारियों की मौजूदगी और सीधे संवाद की प्रक्रिया से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन जनसुनवाई कार्यक्रमों में उठाए गए मुद्दों का समाधान कितनी तेजी से हो पाता है और योजनाओं का लाभ वास्तव में कितने लोगों तक पहुंचता है।

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