पटना में ₹95 लाख की नशीली दवाओं का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त: ट्रांसपोर्ट गोदाम पर छापा, 31 हजार से ज्यादा इंजेक्शन और कफ सिरप बरामद, तस्कर व कर्मी गिरफ्तार

पटना, 23 मई 2026। बिहार की राजधानी पटना के भीतरी प्रक्षेपों में मादक पदार्थों और प्रतिबंधित जीवन रक्षक दवाओं की आड़ में नशीले रसायनों की अवैध तस्करी करने वाले एक बहुत बड़े अंतरप्रांतीय सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस प्रशासन और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने एक प्रखर और अभेद्य दंडात्मक कार्रवाई मुकम्मल की है। चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस और ड्रग्स कंट्रोलर के जासूसी दस्तों ने एक सुगठित जाल बिछाकर रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र में अवस्थित एक नामी ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम पर प्रखर दबिश दी।

​इस छापेमारी ग्रिड के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भारी मात्रा में खेप जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कालाबाजारी में विधिक कीमत 95 लाख रुपये (पचानवे लाख रुपये) आंकी जा रही है। पुलिस ने मौके से एक सक्रिय अंतर-जिला दवा तस्कर और गोदाम के मुख्य लाइनर कर्मी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर अपनी कड़ी सुरक्षा अभिरक्षा में ले लिया है। इस व्यापक कार्रवाई के पटल पर आते ही पटना के दवा मंडी गलियारों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और अवैध नशा कारोबारियों के सिंडिकेट के भीतर भारी सांगठनिक हड़कंप और खौफ की अवस्थिति संधारित देखी जा रही है।

मुन्नाचक चौक पर स्कूटी से जा रहा सुपौल का तस्कर दबोचा गया, कार्टन से मिले 2 हजार नशीले इंजेक्शन

​इस वृहद नशा विरोधी अभियान की प्राथमिक कड़ियों और जासूसी विन्यासों पर प्रकाश डालते हुए पुलिस मुख्यालय के आला कप्तानों ने बताया कि शुक्रवार को चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस को एक अत्यंत प्रामाणिक और गुप्त इनपुट हस्तगत हुआ था। सूचना थी कि प्रतिबंधित और नशीली सूइयों की एक बड़ी खेप को कनिष्ठ वितरकों तक डाइवर्ट करने के उद्देश्य से एक शातिर तस्कर स्कूटी के माध्यम से शहर के भीतरी मार्गों से गुजरने वाला है। इस सूचना के लाइव होते ही पुलिस बलों और औषधि विभाग के निरीक्षकों की एक आक्रामक चेकिंग टीम को मुन्नाचक चौक के समीपवर्ती प्रक्षेप पर मुस्तैद किया गया।

​चेकिंग ग्रिड सक्रिय रहने के दौरान ही पुलिस दस्तों ने एक संदिग्ध स्कूटी सवार को पूरी कड़ाई के साथ रोका। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान उत्तर बिहार के सुपौल जिले के पिपरा थाना क्षेत्र के मूल निवासी तस्कर अब्दुला के रूप में मुकम्मत की गई। जब पुलिस ने उसकी स्कूटी पर संधारित किए गए एक बड़े कार्टन की भौतिक और फॉरेंसिक स्क्रूटनी की, तो उसके भीतर से 2,000 (दो हजार) पीस प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए। इन दवाओं के परिवहन से संबंधित कोई भी विधिक पर्चा, डॉक्टर का पर्चा या औषधि विभाग का वैध लाइसेंस तस्कर के पास उपलब्ध नहीं था, जिसके बाद उसे ऑन-स्पॉट गिरफ्तार कर लिया गया।

अब्दुला की निशानदेही पर रामकृष्णानगर के न्यू श्रीराम ट्रांसपोर्ट गोदाम में प्रखर रेड

​गिरफ्तार तस्कर अब्दुला को जब चित्रगुप्त नगर थाने के विशेष पूछताछ कक्ष के भीतर प्रविष्ट कराया गया और कनिष्ठ जासूसों ने कूटनीतिक व मनोवैज्ञानिक ढंग से कड़े सवालों की बौछार की, तो उसने पटना के भीतर संचालित हो रहे नशीली दवाओं के मुख्य लॉजिस्टिक डंप यार्ड का पूरा कच्चा चिट्ठा उगल दिया। अब्दुला की प्रामाणिक निशानदेही और विलेख बयान के आधार पर पुलिस की एसआईटी और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले न्यू श्रीराम ट्रांसपोर्ट के विशाल गोदाम पर एक साथ प्रखर दबिश दी।

​транспорт (ट्रांसपोर्ट) कंपनी के इस गोदाम के भीतर प्रविष्ट होते ही जांच अधिकारी वहां के विन्यासों को देखकर पूरी तरह स्तब्ध रह गए। सामान्य व्यावसायिक सामानों और पार्सलों के मलबे के पीछे कूटनीतिक रूप से छुपाकर रखे गए नशीले रसायनों का एक विशाल जखीरा बरामद किया गया। पुलिस ने गोदाम के भीतर सघन तलाशी प्रक्रम संचालित करते हुए निम्नलिखित प्रतिबंधित सामग्रियों को जब्त कर सीलबंद संचिका में लॉक कर लिया:

  • नशीला इंजेक्शन (Narcotic Injections): कुल 31,500 (इकतीस हजार पांच सौ) एम्पुल अत्यधिक घातक और प्रतिबंधित नशीली सूइयां।
  • प्रतिबंधित कफ सिरप (Banned Cough Syrup): कुल 3,600 (तीन हजार छह सौ) बोतल कोडिन युक्त प्रतिबंधित नशीला कफ सिरप।

गोदाम कर्मी ऋषि गिरफ्तार, ट्रांसपोर्ट मालिक गिरिश पर विधिक केस दर्ज, सरगना नीरज और रवि फरार

​गोदाम के भीतर की जा रही इस लाइव छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके पर मुस्तैद होकर खेप को डाइवर्ट करने में जुटे एक गोदाम कर्मी को भी धर-दबोचा। पकड़े गए कर्मी की पहचान पटना के ही खेमनीचक निवासी ऋषि के रूप में हुई है, जो लंबे समय से इस ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करने के बहाने अवैध दवाओं की लोडिंग और अनलोडिंग के विन्यास को कप्तानी रूप से संभाल रहा था। इस गंभीर मामले की आंतरिक कड़ियों की स्क्रूटनी के बाद चित्रगुप्त नगर पुलिस ने न्यू श्रीराम ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुख्य मालिक गिरिश के खिलाफ भी विधिक धाराओं के तहत नामजद केस पंजीकृत कर लिया है, क्योंकि प्राथमिक जांच में गोदाम मालिक की संलिप्तता और अवैध भंडारण को संरक्षण देने के पुख्ता प्रमाण जासूसी विंग को हस्तगत हुए हैं।

​इसके समानांतर, इस पूरे ₹95 लाख के स्मैक और नशीली दवाओं के रैकेट को ऑपरेट करने वाले मुख्य सरगना और कुख्यात दवा तस्कर नीरज और रवि की कड़ियों का भी प्रामाणिक खुलासा हुआ है। पुलिस की जासूसी विंग को तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल डेटा डंप खंगालने पर यह पुख्ता सबूत मिला है कि तस्कर नीरज और रवि के बीच पिछले कतिपय महीनों के भीतर बैंक खातों के माध्यम से एक मोटी बजटीय राशि का अवैध लेनदेन मुकम्मल किया गया था। ये दोनों मुख्य सरगना पेशेवर और आदतन अपराधी संधारित हैं, जिन पर बिहार के विभिन्न जिलों में पहले से भी मादक पदार्थों की तस्करी के कई विधिक मामले दर्ज हैं और वे पूर्व में बेऊर व अन्य जेलों की हवा भी खा चुके हैं। फिलहाल ये दोनों मास्टरमाइंड पुलिसिया दबिश के डर से भूमिगत होकर फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष छापेमारी ग्रिड सक्रिय है।

गुजरात, राजस्थान और अहमदाबाद से जुड़े हैं खूनी सप्लाई चेन के तार: सिटी एसपी परिचय कुमार

​इस वृहद और सनसनीखेज ड्रग रैकेट के अंतरप्रांतीय नेटवर्क और विनिर्माण विन्यासों पर प्रकाश डालते हुए सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विधिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मामले के अद्यतन स्टेटस को सार्वजनिक किया। सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने बताया कि बरामद की गई नशीली दवाओं की खेप का विन्यास पूरी तरह से अंतरप्रांतीय रूट लेआउट से एकीकृत संधारित है। जब्त किए गए 31,500 नशीले इंजेक्शनों के बैच कोड और मैन्युफैक्चरिंग विलेखों की फॉरेंसिक जांच से यह साफ प्रमाणित हुआ है कि इन इंजेक्शनों का निर्माण मूल रूप से गुजरात और राजस्थान के प्रक्षेपों में अवस्थित कतिपय दवा फैक्ट्रियों के भीतर हुआ था। वहीं, दूसरी तरफ प्रतिबंधित कफ सिरप की 3,600 बोतलें मुख्य रूप से अहमदाबाद निर्मित संधारित पाई गई हैं।

​सिटी एसपी परिचय कुमार ने स्पष्ट किया कि गुजरात और राजस्थान से इन प्रतिबंधित दवाओं को व्यावसायिक मालवाहक ट्रकों के गुप्त केबिनों और पार्सल विन्यासों की आड़ में कूटनीतिक ढंग से बिहार के बाजार में डाइवर्ट किया जाता था। पटना का न्यू श्रीराम ट्रांसपोर्ट गोदाम इस सिंडिकेट के लिए एक सुरक्षित ‘होल्डिंग स्टेशन’ के रूप में कार्य कर रहा था, जहां से कनिष्ठ पेडलर और अब्दुला जैसे तस्कर इन दवाओं को छोटी-छोटी खेपों में स्कूटी और बाइकों के माध्यम से पटना, सुपौल, समस्तीपुर और गया के सुदूर ग्रामीण अंचलों के युवाओं तक ऊंची कीमतों पर सप्लायर कर रहे थे।

​औषधि विभाग की टीम ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की कड़क धाराओं के तहत मामला संचिका में दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार तस्कर अब्दुला और कर्मी ऋषि को मेडिकल बोर्ड से शारीरिक परीक्षण कराने के उपरांत कड़े सुरक्षा घेरे में कोर्ट के पटल पर प्रस्तुत कर न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। पुलिस कप्तानों ने आश्वस्त किया है कि ट्रांसपोर्ट कंपनी के बैंक खातों को फ्रीज (ब्लॉक) करने और फरार किंगपिन नीरज व रवि के संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए जासूसी विंग की तीन टीमें लगातार बाहरी राज्यों में कैंप कर रही हैं।

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