भागलपुर में गंगा नदी के बीच फंसी यात्रियों से भरी नाव, SDRF के बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन ने बचाई 100 से अधिक लोगों की जान

भागलपुर में गुरुवार को गंगा नदी के बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बरारी गंगा घाट से महादेवपुर की ओर जा रही यात्रियों से भरी नाव का इंजन अचानक बीच धारा में बंद हो गया, जिसके बाद नाव तेज जल प्रवाह में अनियंत्रित होकर बहने लगी। नाव पर 100 से अधिक यात्री सवार थे। इनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और इलाज कराकर लौट रहे मरीज भी शामिल थे। घटना के बाद नाव पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। हालात बिगड़ते देख तत्काल SDRF की टीम को सूचना दी गई, जिसके बाद शुरू हुए बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

जानकारी के अनुसार यह घटना भागलपुर के बरारी घाट क्षेत्र के पास उत्तरवाहिनी गंगा नदी में हुई। दोपहर बाद बड़ी संख्या में यात्री नाव के जरिए महादेवपुर और नवगछिया की ओर जा रहे थे। इन दिनों सड़क मार्ग पर भारी दबाव और कई हिस्सों में जाम जैसी स्थिति के कारण लोग तेजी से गंगा जलमार्ग का उपयोग कर रहे हैं। इसी वजह से नावों में जरूरत से ज्यादा यात्रियों को बैठाया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक संबंधित नाव पर भी क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। नाव में रोजमर्रा के कामकाजी लोगों के अलावा छोटे बच्चे, महिलाएं और अस्पताल से लौट रहे मरीज भी थे। कुछ मरीजों के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर और जरूरी चिकित्सा उपकरण भी मौजूद थे। नाव बरारी घाट से रवाना होकर गंगा की मुख्य धारा में पहुंच चुकी थी, तभी अचानक उसका इंजन तेज आवाज के साथ बंद हो गया।

इंजन बंद होते ही नाव का संतुलन बिगड़ने लगा। गंगा में उस समय जल प्रवाह काफी तेज था और नाव धीरे-धीरे भंवर वाले हिस्से की ओर बहने लगी। नाविकों ने इंजन दोबारा चालू करने की काफी कोशिश की, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण इंजन स्टार्ट नहीं हो सका। इसके बाद यात्रियों में डर और घबराहट फैल गई।

घटना के दौरान नाव पर मौजूद लोगों ने बताया कि कुछ मिनटों के लिए ऐसा लगा मानो नाव कभी भी पलट सकती है। तेज लहरें नाव से टकरा रही थीं और पानी के छींटे लगातार अंदर तक पहुंच रहे थे। महिलाएं बच्चों को पकड़कर रो रही थीं, जबकि कई यात्री मोबाइल फोन से अपने परिजनों और प्रशासन को मदद के लिए कॉल करने की कोशिश कर रहे थे।

कई यात्रियों ने बाद में बताया कि नाव में मौजूद मरीजों की हालत सबसे ज्यादा खराब हो गई थी। कुछ लोग घबराहट में बेहोश होने लगे थे। नाव के एक किनारे ज्यादा लोग जमा हो जाने से संतुलन और बिगड़ने लगा था। इस दौरान नाविक भी स्थिति संभालने में परेशान दिखे।

घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की टीम तुरंत सक्रिय हो गई। बरारी घाट के पास मौजूद आपदा प्रबंधन इकाई को जैसे ही नाव के बीच धारा में फंसने की जानकारी मिली, तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। SDRF के जवान आधुनिक स्पीड बोट, लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे।

तेज धाराओं के बीच SDRF की टीम ने बेहद सावधानी से नाव तक पहुंच बनाई। जवानों ने सबसे पहले यात्रियों को शांत रहने की अपील की और नाव को मजबूत रस्सियों की मदद से नियंत्रित किया, ताकि वह भंवर की दिशा में आगे न बढ़ सके। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से यात्रियों को स्पीड बोट में शिफ्ट करना शुरू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे पहले बच्चों, महिलाओं और गंभीर मरीजों को सुरक्षित निकाला गया। SDRF के गोताखोर और जवान लगातार कई चक्कर लगाते रहे। गंगा की तेज धारा के बावजूद टीम ने संयम और सतर्कता के साथ अभियान चलाया। करीब कई घंटों की मेहनत के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचा दिया गया।

जैसे ही रेस्क्यू बोट्स घाट पर पहुंचीं, वहां पहले से मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस टीम ने यात्रियों की मदद शुरू कर दी। घबराए लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया। कई बच्चों और महिलाओं को ORS और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। वहीं गंभीर मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।

इस घटना के बाद प्रशासन ने नाव संचालन व्यवस्था पर सख्त रुख अपना लिया है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने बरारी और महादेवपुर घाट पर चल रही नावों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बिना फिटनेस प्रमाणपत्र और सुरक्षा मानकों के कोई भी नाव नदी में नहीं चलने दी जाएगी।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नावों में ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। संबंधित नाव संचालकों और घाट प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को एक ही नाव पर कैसे बैठाया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार घाटों पर अब नियमित जांच अभियान चलाया जाएगा। नावों में लाइफ जैकेट अनिवार्य करने और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक टीमों को औचक निरीक्षण करने के आदेश भी दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा नदी के रास्ते रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजाम अक्सर बेहद कमजोर रहते हैं। कई नावों में पर्याप्त लाइफ जैकेट नहीं होती और तकनीकी जांच भी नियमित रूप से नहीं की जाती। यही वजह है कि हर साल ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है।

हालांकि इस बार समय रहते SDRF की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। यदि रेस्क्यू में थोड़ी भी देरी होती, तो तेज धारा और भंवर के कारण स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों ने SDRF टीम की सराहना की और कहा कि जवानों ने साहस और सूझबूझ के साथ सैकड़ों लोगों की जान बचाई।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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