मालदा मंडल का टीबी मुक्त भारत अभियान तेज, साहिबगंज रेलवे स्टेशन और स्वास्थ्य इकाई में चला जागरूकता व स्क्रीनिंग अभियान

पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देते हुए साहिबगंज में बड़े स्तर पर तपेदिक जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया। 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत मुख्य स्वास्थ्य इकाई (एमएचयू) साहिबगंज और साहिबगंज रेलवे स्टेशन पर विशेष जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए, जिसमें रेलवे कर्मचारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को तपेदिक के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और संभावित मरीजों की जल्द पहचान सुनिश्चित करना था।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह अभियान मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और मंडल रेलवे अस्पताल मालदा की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष के पर्यवेक्षण में संचालित किया गया। स्वास्थ्य विभाग और जिला टीबी इकाई के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम को रेलवे प्रशासन ने जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

मुख्य स्वास्थ्य इकाई साहिबगंज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रेलवे कर्मचारियों को टीबी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जी.पी. सिंह और डॉ. सुचित डी. एस. ने जिला टीबी इकाई के सहयोग से किया। इस दौरान कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को तपेदिक के शुरुआती लक्षण, इसके संक्रमण का तरीका, समय पर जांच और नियमित उपचार के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।

अभियान में शामिल स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि टीबी आज भी देश के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण कई बार मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। यही कारण है कि रेलवे प्रशासन लगातार जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है।

कार्यक्रम में 30 से अधिक रेलवे कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। जागरूकता सत्र को संवादात्मक बनाया गया, ताकि प्रतिभागी खुलकर सवाल पूछ सकें और बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार खांसी, वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना, बुखार और रात में पसीना आना जैसे लक्षण टीबी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई।

अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्क्रीनिंग प्रक्रिया रही। जिला टीबी इकाई की ओर से पोर्टेबल एक्स-रे मशीन की सहायता से 25 से अधिक कर्मचारियों की जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की स्क्रीनिंग से संभावित मामलों की शुरुआती पहचान संभव होती है, जिससे समय पर उपचार शुरू किया जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को यह भी जानकारी दी कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत मरीजों को निःशुल्क दवाइयां, जांच और परामर्श सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा उपचार के दौरान पोषण सहायता और अन्य सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान डॉट्स थेरेपी की भी विस्तृत जानकारी दी गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि टीबी के इलाज में दवाओं का नियमित सेवन बेहद जरूरी है। कई बार मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवाइयां बंद कर देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए उपचार पूरा करना आवश्यक है।

मुख्य स्वास्थ्य इकाई में आयोजित कार्यक्रम के बाद इसी अभियान को साहिबगंज रेलवे स्टेशन तक विस्तारित किया गया। रेलवे स्टेशन परिसर में भी जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने भी हिस्सा लिया। स्टेशन पर आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुचित डी. एस. ने किया।

रेलवे स्टेशन पर हुए सत्र में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच प्रक्रिया और उपचार से संबंधित जानकारी सरल भाषा में समझाई गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को बताया कि टीबी का इलाज संभव है और शुरुआती जांच से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। स्टेशन परिसर में लगे जागरूकता शिविर में लोगों को पंपलेट और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई।

स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में 25 से अधिक लोगों ने भाग लिया। यहां लोगों को स्क्रीनिंग प्रक्रिया और टीबी रोकथाम के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों को यह भी बताया कि खांसते समय मुंह ढंकना, साफ-सफाई रखना और समय पर इलाज कराना संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि टीबी उन्मूलन अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक भागीदारी से ही सफल हो सकता है। इसी उद्देश्य से रेलवे कर्मचारियों और आम लोगों को एक साथ जोड़कर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पूर्व रेलवे का मालदा मंडल भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखेगा। रेलवे अस्पताल और स्वास्थ्य इकाइयों के माध्यम से नियमित जांच शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और स्क्रीनिंग अभियान आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे जैसे बड़े नेटवर्क के माध्यम से जागरूकता फैलाना बेहद प्रभावी साबित हो सकता है, क्योंकि प्रतिदिन हजारों लोग रेलवे स्टेशनों और परिसरों से जुड़ते हैं। ऐसे में यहां चलाए जाने वाले स्वास्थ्य अभियान का व्यापक असर देखने को मिलता है।

टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार लगातार विभिन्न संस्थानों और विभागों को जोड़ रही है। मालदा मंडल द्वारा साहिबगंज में आयोजित यह अभियान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार के जरिए देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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