
पटना, 21 मई 2026। बिहार सरकार अब विज्ञान, प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। राज्य के विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने दक्ष और प्रतिभाशाली युवाओं को सरकारी योजनाओं और तकनीकी परियोजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से “यंग प्रोफेशनल चयन संबंधी नीति-2026” तैयार की है। इस नई नीति के तहत विभाग तीन अलग-अलग श्रेणियों में तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं की भर्ती करेगा, जिससे विभागीय योजनाओं और विज्ञान आधारित कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
सरकार की इस पहल को तकनीकी शिक्षा और विज्ञान क्षेत्र में युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकी चुनौतियों और तेजी से बदलती डिजिटल जरूरतों को देखते हुए संस्थानों में ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता है, जो नवाचार, शोध और तकनीकी कार्यों को गति दे सकें।
नई नीति के तहत यंग प्रोफेशनल की भर्ती तीन श्रेणियों—यंग प्रोफेशनल-I, यंग प्रोफेशनल-II और यंग प्रोफेशनल-III—में की जाएगी। विभाग ने प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग योग्यता और चयन मानदंड तय किए हैं ताकि विभिन्न स्तरों पर तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं को अवसर मिल सके।
यंग प्रोफेशनल-I श्रेणी में वैसे उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा जिन्होंने डिप्लोमा परीक्षा में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। विभाग का उद्देश्य है कि तकनीकी शिक्षा के शुरुआती स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सरकारी संस्थानों में व्यावहारिक अनुभव और कार्य अवसर प्रदान किए जाएं।
वहीं यंग प्रोफेशनल-II के लिए बी.टेक. पास उम्मीदवार पात्र होंगे। इसके लिए अभ्यर्थियों को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ बी.टेक. परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। साथ ही संबंधित शाखा में पिछले तीन वर्षों के भीतर वैध ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग यानी GATE स्कोर होना भी अनिवार्य रखा गया है। विभाग का मानना है कि इससे तकनीकी दक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
तीसरी श्रेणी यानी यंग प्रोफेशनल-III में उन अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा जिन्होंने एम.टेक. में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों और एम.टेक. में प्रवेश वैध GATE स्कोर के आधार पर लिया हो। इस श्रेणी के चयनित युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी और शोध आधारित कार्यों में शामिल किया जा सकता है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार चयनित यंग प्रोफेशनल का प्रारंभिक कार्यकाल दो वर्षों का होगा। हालांकि उनके कार्य प्रदर्शन और संबंधित संस्थान की आवश्यकता के आधार पर इस अवधि को एक वर्ष तक और बढ़ाया जा सकता है। इससे योग्य और बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को लंबे समय तक विभागीय परियोजनाओं में काम करने का अवसर मिल सकेगा।
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न संस्थानों में यंग प्रोफेशनल की संख्या संस्थान की जरूरतों के अनुसार तय की जाएगी। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में बिहार सरकार की आरक्षण नीति का पूरी तरह पालन किया जाएगा ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।
इस नीति के तहत चयनित यंग प्रोफेशनल विभाग और विभाग के अधीन संचालित विभिन्न संस्थानों में अपनी सेवाएं देंगे। इनमें बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BCST), बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशंस सेंटर (BIRSAC), डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी, बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी, सब-रीजनल साइंस सेंटर गया, स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, तारामंडल दरभंगा तथा विभिन्न राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय और पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बिहार के विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है। लंबे समय से तकनीकी संस्थानों में प्रशिक्षित युवाओं को शोध और प्रशासनिक स्तर पर अवसरों की कमी महसूस की जा रही थी। नई नीति के लागू होने से तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को सरकारी परियोजनाओं में सीधे काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी दक्षता और अनुभव दोनों बढ़ेंगे।
राज्य सरकार विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में आधुनिक प्रयोगों को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग और साइंस एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए बिहार सरकार अब अपने संस्थानों को भी तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की योजना पर काम कर रही है।
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी ने कहा कि विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से यह नई नीति तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं बल्कि नवाचार और तकनीकी विकास से जोड़ने का भी प्रयास कर रही है।
मंत्री ने कहा कि चयनित युवाओं को विभागीय संस्थानों में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे वे भविष्य में बड़े तकनीकी और शोध कार्यों में बेहतर भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और सरकार इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
तकनीकी शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे राज्य के तकनीकी संस्थानों में नई ऊर्जा आएगी। शोध आधारित परियोजनाओं, डिजिटल नवाचार और तकनीकी विकास को गति मिल सकती है। साथ ही, युवाओं को राज्य के भीतर ही बेहतर अवसर मिलने से प्रतिभा पलायन को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
बिहार सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को नई प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार अब विज्ञान और तकनीक को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे प्रशासनिक और विकासात्मक योजनाओं से भी जोड़ने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि “यंग प्रोफेशनल चयन संबंधी नीति-2026” आने वाले समय में बिहार के विज्ञान और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


