बिहार सरकार के छह महीने पूरे होते ही प्रशांत किशोर का हमला, बोले- चेहरे बदले लेकिन बेरोजगारी और पलायन जस का तस

दरभंगा, 20 मई 2026। बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने राज्य सरकार के छह महीने पूरे होने पर तीखा हमला बोला। दरभंगा में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने सरकार की कार्यशैली, बेरोजगारी, पलायन, महिला सशक्तिकरण के वादों और NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बिहार में केवल सत्ता के चेहरे बदले हैं, लेकिन आम लोगों की जिंदगी में कोई वास्तविक बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोग हर चुनाव में बदलाव की उम्मीद लेकर मतदान करते हैं, लेकिन सरकारें बदलने के बावजूद राज्य की मूल समस्याएं अब भी वहीं की वहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि आज भी लाखों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। गांवों और कस्बों में रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं और शिक्षा व्यवस्था की हालत लगातार चिंताजनक बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति वर्षों से भावनात्मक नारों और चुनावी घोषणाओं के सहारे चल रही है। जनता को विकास, उद्योग और शिक्षा के नाम पर सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारे वादे पीछे छूट जाते हैं। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार के युवाओं के भविष्य की चिंता किसी भी राजनीतिक दल की प्राथमिकता में नहीं है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के चुनावी वादों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं को दो-दो लाख रुपये देने जैसे बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों का कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं देता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग बड़े-बड़े वादे करते हैं, वही समय आने पर सत्ता छोड़कर निकल जाते हैं और अपने परिवार के लोगों को राजनीति में स्थापित करने में लग जाते हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीति लंबे समय से परिवारवाद और सत्ता संरक्षण की संस्कृति में फंसी हुई है। उनके अनुसार, नेताओं के बच्चे राजनीति में सुरक्षित भविष्य बना लेते हैं, जबकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में शिक्षा, उद्योग और रोजगार के अवसर मजबूत किए गए होते, तो आज लाखों युवाओं को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र की ओर नहीं जाना पड़ता।

उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि बिहार के पास बड़ी आबादी और युवा शक्ति होने के बावजूद निवेश और उद्योग के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकारें रोजगार सृजन की बात करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उद्योग लगाने, स्थानीय रोजगार बढ़ाने और तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं दिखते।

NEET पेपर लीक मामले पर बोलते हुए प्रशांत किशोर ने बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अब बिहार में परीक्षा का पेपर लीक होना कोई असामान्य खबर नहीं रह गई है। उनके शब्दों में, “खबर तब होती जब पेपर लीक नहीं होता।” उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुकी है और जिन लोगों पर परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब “चोर को ही तिजोरी की चाबी” दे दी जाएगी, तो फिर पेपर लीक और भ्रष्टाचार को रोकना संभव नहीं होगा। उनका इशारा उन अधिकारियों और तंत्र की ओर था, जिन पर बार-बार परीक्षा में धांधली और लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार कमजोर हो रही है और इसका सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि आज बिहार का छात्र केवल पढ़ाई की चिंता नहीं करता, बल्कि उसे यह डर भी सताता है कि कहीं परीक्षा रद्द न हो जाए या पेपर लीक की वजह से उसका भविष्य प्रभावित न हो जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं युवाओं का मनोबल तोड़ती हैं और सरकारी संस्थाओं पर से भरोसा कम करती हैं।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए। साथ ही पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार को केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास नीति से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में बेहतर स्कूल, आधुनिक अस्पताल, स्थानीय उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा किए बिना बिहार की स्थिति नहीं बदल सकती।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अब समय केवल जाति और भावनात्मक मुद्दों पर वोट देने का नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे वास्तविक मुद्दों पर राजनीतिक दलों से सवाल पूछने का है। उनके अनुसार, बिहार के लोग यदि विकास को प्राथमिकता देंगे, तभी राज्य की तस्वीर बदलेगी।

दरभंगा में हुई इस मीडिया ब्रीफिंग के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बेरोजगारी, पलायन और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दे और अधिक जोर पकड़ सकते हैं। प्रशांत किशोर लगातार इन विषयों को उठाकर खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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