सहरसा में बीपीएससी अभ्यर्थी की कथित पिटाई पर बड़ा एक्शन, महिला दरोगा सस्पेंड, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

सहरसा, 20 मई 2026: बिहार के सहरसा जिले में बीपीएससी अभ्यर्थी के साथ कथित मारपीट का मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। थाना परिसर में छात्र की बेरहमी से पिटाई किए जाने के आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए बलवाहाट थाना में तैनात महिला दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और मामले की जांच कई स्तरों पर शुरू कर दी गई है।

घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, छात्र संगठनों और बीपीएससी अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो रहा है और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पूछताछ के लिए थाने लाया गया था छात्र

जानकारी के अनुसार, बीपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र को किसी मामले में पूछताछ के लिए बलवाहाट थाना बुलाया गया था। आरोप है कि थाना परिसर के अंदर छात्र के साथ बुरी तरह मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि पिटाई इतनी गंभीर थी कि छात्र की तबीयत बिगड़ गई।

हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक घटना के पूरे विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से फैल गया। छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

परिवार का कहना है कि छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और उसके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।

मामला सामने आते ही बढ़ा आक्रोश

घटना की खबर फैलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।

कई लोगों का कहना था कि अगर थाने के अंदर ही छात्रों और आम नागरिकों की पिटाई होने लगेगी तो जनता का पुलिस पर भरोसा कमजोर पड़ जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि हिरासत या पूछताछ के दौरान किसी के साथ हिंसक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

घटना के बाद छात्र संगठनों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी। कई बीपीएससी अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर न्याय की मांग की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।

सहरसा एसपी ने लिया तुरंत संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा के पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने तत्काल जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद बलवाहाट थाना की दरोगा शिल्पी कुमारी को निलंबित कर दिया गया।

पुलिस विभाग की ओर से यह कार्रवाई सामने आते ही पूरे जिले में चर्चा तेज हो गई। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआती जांच में आरोप सही पाए गए हैं तो अन्य जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

सूत्रों के अनुसार, सिर्फ महिला दरोगा ही नहीं बल्कि थाना परिसर में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि घटना के दौरान कौन-कौन मौजूद था और किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई।

जांच टीम पीड़ित छात्र, उसके परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है। थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटना की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सके।

पुलिस विभाग इस मामले को संवेदनशील मानते हुए हर पहलू पर नजर बनाए हुए है।

छात्र संगठनों में भारी नाराजगी

बीपीएससी अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर इस तरह का व्यवहार बेहद दुखद है।

कई छात्रों ने कहा कि पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संवेदनशीलता भी दिखानी चाहिए। अगर किसी छात्र से पूछताछ करनी थी तो उसके साथ कानूनी प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया जाना चाहिए था।

सोशल मीडिया पर भी #JusticeForBPSCStudent जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। कई युवाओं ने मामले की न्यायिक जांच की मांग उठाई है।

पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत और पूछताछ के दौरान होने वाले व्यवहार पर बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि थानों में किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट या दबाव की शिकायतें बेहद गंभीर होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस को आधुनिक और संवेदनशील कार्यशैली अपनाने की जरूरत है। कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

कई लोगों ने कहा कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटा

मामले को लेकर जिले में तनाव की स्थिति न बने, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रशासन की कोशिश है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो ताकि लोगों का भरोसा बना रहे। वहीं पुलिस विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पूरे सहरसा जिले की नजर इस मामले की जांच पर टिकी हुई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर थाने के अंदर क्या हुआ था और छात्र के साथ किस परिस्थिति में कथित मारपीट की गई।

एक तरफ पुलिस विभाग अपनी छवि बचाने की चुनौती से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ छात्र और स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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