
भागलपुर, 20 मई 2026: बिहार के भागलपुर की पहचान बन चुका प्रसिद्ध जर्दालू आम एक बार फिर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुंचने की तैयारी में है। राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए इस खास आम की चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड स्थित महेशी गांव के बगीचों में इन दिनों खास हलचल देखी जा रही है, जहां जर्दालू आम की विशेष निगरानी के बीच तैयारी की जा रही है।
हर साल की तरह इस बार भी गुणवत्ता, स्वाद और प्राकृतिक उत्पादन को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जा रही है। बगीचों में तैयार होने वाले हर आम की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचने वाली खेप पूरी तरह उत्कृष्ट हो। यही वजह है कि भागलपुर का जर्दालू आम सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
महेशी गांव में बढ़ी हलचल
सुल्तानगंज के महेशी गांव में स्थित आम के बगीचों में इन दिनों अलग ही माहौल है। पेड़ों पर लदे जर्दालू आमों की विशेष देखभाल की जा रही है। बगीचे में काम करने वाले मजदूरों से लेकर विशेषज्ञों तक को खास निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए भेजे जाने वाले आमों को सामान्य खेप से अलग रखा जाता है। इन आमों की तुड़ाई से लेकर पैकिंग तक हर प्रक्रिया बेहद सावधानी से की जाती है।
बिना रासायनिक दवा के तैयार हो रहे आम
इस बार सबसे ज्यादा जोर प्राकृतिक तरीके से उत्पादन पर दिया जा रहा है। बगीचे में किसी भी प्रकार के रासायनिक स्प्रे या केमिकल दवाओं का उपयोग नहीं किया जा रहा है। आमों को पूरी तरह जैविक तरीके से तैयार किया जा रहा है ताकि उनका स्वाद और खुशबू प्राकृतिक बनी रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि जर्दालू आम की सबसे बड़ी खासियत उसकी मिठास और सुगंध है। अगर इसमें अधिक रसायनों का इस्तेमाल किया जाए तो इसकी मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। इसी कारण प्राकृतिक खेती की पद्धति अपनाई जा रही है।
बगीचे में जैविक खाद, प्राकृतिक पोषक तत्व और पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे आम की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है।
मैंगो मैन अशोक चौधरी खुद कर रहे निगरानी
भागलपुर के प्रसिद्ध “मैंगो मैन” के नाम से पहचान रखने वाले अशोक चौधरी इस पूरी प्रक्रिया की खुद निगरानी कर रहे हैं। वे हर दिन बगीचे का निरीक्षण कर रहे हैं और आम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
अशोक चौधरी का कहना है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक भागलपुर का जर्दालू आम पहुंचना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही।
उन्होंने बताया कि पेड़ों पर लगे आमों की स्थिति, रंग, आकार और मिठास पर लगातार नजर रखी जा रही है। तुड़ाई के बाद भी आमों को विशेष तापमान और सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
20 वर्षों से जारी है खास परंपरा
भागलपुर का जर्दालू आम पिछले करीब दो दशकों से लगातार राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा जाता रहा है। यह परंपरा अब भागलपुर की पहचान बन चुकी है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि जब भी राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए जर्दालू आम की खेप तैयार होती है, तो पूरे इलाके में उत्साह का माहौल बन जाता है। किसानों और बागवानों को भी इससे नई पहचान और प्रेरणा मिलती है।
इस परंपरा ने भागलपुर के जर्दालू आम को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है। यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस आम का स्वाद चखने के लिए उत्सुक रहते हैं।
GI टैग मिलने के बाद बढ़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान
भागलपुर के जर्दालू आम को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग प्राप्त है। GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और अधिक मजबूत हुई है। यह टैग इस बात का प्रमाण है कि यह खास किस्म केवल भागलपुर क्षेत्र में ही अपनी मूल गुणवत्ता और स्वाद के साथ तैयार होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक गंगा के किनारे की मिट्टी, जलवायु और मौसम जर्दालू आम के लिए बेहद अनुकूल हैं। यही वजह है कि इसका स्वाद दूसरे क्षेत्रों में तैयार होने वाले आमों से अलग होता है।
GI टैग मिलने के बाद विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है। कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भागलपुर के जर्दालू आम की चर्चा होने लगी है।
खुशबू और स्वाद बनाते हैं इसे खास
जर्दालू आम की सबसे बड़ी पहचान उसकी तेज खुशबू और अनोखा स्वाद है। यह आम आकार में सामान्य होता है लेकिन इसकी मिठास लोगों को बेहद पसंद आती है।
जब आम पूरी तरह पक जाता है तो उसकी सुगंध दूर तक महसूस की जा सकती है। यही कारण है कि इसे बिहार के सबसे प्रीमियम आमों में गिना जाता है।
भागलपुर आने वाले पर्यटक भी जर्दालू आम खरीदना नहीं भूलते। गर्मियों के मौसम में इसकी मांग इतनी बढ़ जाती है कि बाजार में इसकी कीमत अन्य आमों की तुलना में अधिक रहती है।
किसानों को भी मिल रही नई पहचान
जर्दालू आम की लोकप्रियता का सीधा फायदा स्थानीय किसानों और बागवानों को मिल रहा है। कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर आम के बगीचे विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जर्दालू आम की ब्रांडिंग और निर्यात को और बढ़ावा दिया जाए तो यह बिहार की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
सरकारी स्तर पर भी आम उत्पादकों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जा रही है ताकि गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
देशभर में फिर चर्चा में भागलपुर का जर्दालू
एक बार फिर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक जर्दालू आम भेजे जाने की तैयारी ने भागलपुर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय बाजारों तक इसकी चर्चा हो रही है।
लोगों का कहना है कि यह केवल एक फल नहीं बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में जब यह खास खेप दिल्ली रवाना होगी, तब एक बार फिर भागलपुर का नाम पूरे देश में गूंजेगा।


