
फतुहा/पटना, 20 मई 2026। ब्रांडेड कंपनियों के नाम और उनकी साख का गलत इस्तेमाल कर बाजार में नकली सामानों का अवैध सिंडिकेट चलाने वाले माफियाओं के खिलाफ पटना पुलिस ने एक बहुत बड़ी और कड़क दंडात्मक कार्रवाई मुकम्मल की है। पटना जिले के फतुहा औद्योगिक प्रक्षेत्र अंतर्गत नदी थाने की पुलिस ने मंगलवार को एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए नामी कंपनियों के नकली रैपर छापने वाली एक अभेद्य प्रिंटिंग प्रेस का पर्दाफाश किया है।
पुलिस ने मौके से विभिन्न नामचीन ब्रांड्स के लाखों की संख्या में तैयार और अर्ध-निर्मित नकली रैपर, होलोग्राम और पैकेजिंग सामग्रियां भौतिक रूप से जब्त की हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े को ग्राउंड पर ऑपरेट करने के आरोप में पुलिस के खोजी दस्तों ने प्रिंटिंग प्रेस के भीतर से एक युवक को विधिक रूप से गिरफ्तार भी किया है। इस कार्रवाई के बाद से प्रादेशिक नकली उत्पाद निर्माताओं और जमाखोरों के सिंडिकेट के भीतर भारी हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल लाइव देखा जा रहा है।
वैशाली में पकड़ी गई नकली सिंटेक्स टंकी से जुड़े थे तार, फतुहा में दी गई कड़क दबिश
इस अंतर-जिला फर्जीवाड़ा नेटवर्क के बुनियादी विन्यासों और अनुसंधान की कड़ियों को सार्वजनिक करते हुए ‘ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विसेज लिमिटेड’ के डायरेक्टर मुस्तफा हुसैन ने बताया कि इस बड़े रैकेट के इनपुट्स हालिया दिनों में वैशाली जिले से प्राप्त हुए थे। विगत दिनों वैशाली पुलिस और एंटी-पायरेसी विंग की संयुक्त टीम ने बड़े पैमाने पर नकली ‘सिंटेक्स’ (Sintex) पानी टंकी बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का कड़ा भंडाफोड़ किया था।
उस छापेमारी के दौरान जब्त की गई नकली टंकियों पर हूबहू असली जैसी दिखने वाली ब्रांडेड रैपर और मार्किंग पाई गई थी। जब गिरफ्तार आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कक्ष में पूछताछ की गई, तो उन्होंने यह गुप्त खुलासा किया कि इन टंकियों पर चिपकाए जाने वाले सर्वोत्कृष्ट श्रेणी के नकली रैपर और होलोग्राम पटना के फतुहा प्रक्षेत्र से थोक भाव में छपकर प्रेषित किए जाते हैं। इसी प्रामाणिक खुफिया इनपुट के आधार पर ब्रांड प्रोटेक्शन टीम ने पटना ग्रामीण पुलिस कप्तानों से संपर्क स्थापित किया और नदी थाना पुलिस के सहयोग से फतुहा के मौजीपुर स्थित विजय प्रिंटिंग प्रेस के मुख्य परिसर की अभेद्य घेराबंदी कर अचानक औचक दबिश दी।
लाखों की संख्या में नामचीन ब्रांड्स के नकली रैपर जब्त, पैकेजिंग मशीनें भी ब्लॉक
मंगलवार की दोपहर जब नदी थाना पुलिस के जवानों और कनिष्ठ जासूसों ने विजय प्रिंटिंग प्रेस के आंतरिक गोदामों और प्रिंटिंग फ्लोर पर धावा बोला, तो वहां का विजुअल नजारा पूरी तरह से चौंकाने वाला था। प्रेस के भीतर हेवी-ड्यूटी डिजिटल प्रिंटिंग मशीनों के माध्यम से देश की कतिपय शीर्ष एफएमसीजी (FMCG), इलेक्ट्रॉनिक, और प्लास्टिक विनिर्माण कंपनियों के रैपर धड़ल्ले से छापे जा रहे थे।
पुलिस ने तलाशी विलेख के तहत निम्नलिखित मुख्य बरामदगी मुकम्मल की है:
- नकली रैपर का जखीरा: विभिन्न ब्रांडेड कंपनियों के लोगो (Logo) और ट्रेडमार्क युक्त लाखों की संख्या में तैयार चमकीले प्लास्टिक व कागजी रैपर।
- तकनीकी उपकरण: जाली होलोग्राम बनाने वाली कतिपय डाइयां, हाई-रेजोल्यूशन प्लेट्स और कंप्यूटर हार्ड डिस्क, जिनमें नामी कंपनियों के डिजाइन पैटर्न्स डिजिटल रूप से संधारित थे।
पुलिस ने बताया कि इन रैपर्स की मदद से बाजार में घटिया और स्थानीय स्तर पर निर्मित नकली सामानों को ब्रांडेड के नाम पर ऊंचे दामों पर बेचकर आम उपभोक्ताओं की जेब और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था, जिसे समय रहते पूरी कड़ाई से ब्लॉक कर दिया गया है।
नदी थाने में विधिक प्राथमिकी दर्ज, स्पीडी ट्रायल के माध्यम से कड़े एक्शन की तैयारी
कार्रवाई के अद्यतन स्टेटस पर विधिक विरणी पटल पर रखते हुए नदी थानाध्यक्ष ने बताया कि ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के ओनर (मालिक) द्वारा दिए गए लिखित आवेदन और प्रामाणिक विलेखों के आलोक में विजय प्रिंटिंग प्रेस के संचालकों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट, ट्रेडमार्क उल्लंघन और धोखाधड़ी की कड़क व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया गया है।
मौके से गिरफ्तार किए गए युवक से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नकली रैपर सिंडिकेट के तार बिहार के किन-किन जिलों के नकली उत्पाद निर्माताओं और सप्लायर्स से जुड़े संधारित हैं। पुलिस कप्तानों ने साफ किया है कि इस अवैध प्रेस को पूरी तरह से सील (ब्लॉक) कर दिया गया है और जब्त कंप्यूटर डेटा के फॉरेंसिक ऑडिट के उपरांत इस नेटवर्क में शामिल अन्य फरार मुख्य कप्तानों की विधिक गिरफ्तारी के लिए छापेमारी दल निरंतर लाइव मुस्तैद कर दिए गए हैं।


