मालदा मंडल में रेलवे सिग्नलिंग का डिजिटल बदलाव, तकनीशियनों को बांटे गए 237 स्मार्ट टैबलेट

मालदा, 19 मई 2026: रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक बड़ी पहल की है। रेलवे अनुरक्षण कार्यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए मालदा मंडल ने सिग्नल तकनीशियनों के बीच 237 सैमसंग टैबलेट वितरित किए हैं। पूर्व रेलवे में अपनी तरह की यह पहली पहल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम की निगरानी, अनुरक्षण और डेटा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।

यह कार्यक्रम मंगलवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में आयोजित किया गया, जहां मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक के नेतृत्व में तकनीशियनों को टैबलेट सौंपे गए। कार्यक्रम में अपर मंडल रेल प्रबंधक अमरेंद्र कुमार मौर्य, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता राजेंद्र कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह पहल रेलवे बोर्ड द्वारा लागू की गई सिग्नल अनुरक्षण प्रबंधन प्रणाली यानी SMMS के अनुरूप शुरू की गई है। इसके तहत अब फील्ड में काम करने वाले तकनीशियन मौके पर ही डिजिटल माध्यम से अनुरक्षण संबंधी जानकारी अपडेट कर सकेंगे। इससे रेलवे सिग्नलिंग नेटवर्क की निगरानी पहले से अधिक तेज, सटीक और व्यवस्थित हो सकेगी।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि अब तक कई अनुरक्षण प्रक्रियाएं कागजी रिकॉर्ड और मैन्युअल रिपोर्टिंग पर निर्भर थीं, जिसके कारण डेटा अपडेट और निगरानी में समय लगता था। लेकिन टैबलेट आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी सीधे सिस्टम में जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और तकनीकी गड़बड़ियों की पहचान भी तेजी से हो सकेगी।

मालदा मंडल के अधिकारियों ने बताया कि रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली किसी भी रेल नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था होती है। ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही, समय पालन और परिचालन नियंत्रण पूरी तरह सिग्नलिंग सिस्टम पर निर्भर करता है। ऐसे में इसके अनुरक्षण कार्यों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया था।

इस नई पहल के तहत तकनीशियन अब रेल पटरियों, सिग्नल उपकरणों और दूरसंचार प्रणाली से जुड़ी जानकारी को मौके पर ही ऑनलाइन अपडेट कर पाएंगे। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा और किसी भी समस्या पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता राजेंद्र कुमार ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े इस सिस्टम से अनुरक्षण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि अब हर कार्य का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रेलवे तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है और मालदा मंडल की यह पहल उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे में स्मार्ट मेंटेनेंस सिस्टम लागू होने से तकनीकी त्रुटियों को कम करने, ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने और सुरक्षा स्तर को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार रेलवे जैसी विशाल व्यवस्था में डिजिटल मॉनिटरिंग बेहद महत्वपूर्ण होती जा रही है। यदि फील्ड कर्मचारियों को सीधे तकनीक से जोड़ा जाए तो रखरखाव संबंधी कार्य अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय हो सकते हैं। यही कारण है कि अब रेलवे कई विभागों में स्मार्ट टेक्नोलॉजी के उपयोग पर जोर दे रहा है।

मालदा मंडल की इस पहल को रेलवे कर्मचारियों के लिए भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब तकनीशियनों को अनुरक्षण कार्यों की रिपोर्टिंग के लिए अलग से कार्यालयी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। टैबलेट के जरिए वे तुरंत डेटा अपलोड कर सकेंगे और वरिष्ठ अधिकारियों तक जानकारी तुरंत पहुंच जाएगी।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज होगी। यदि किसी सिग्नलिंग उपकरण में तकनीकी समस्या आती है तो उसकी जानकारी तुरंत सिस्टम में अपडेट हो जाएगी और संबंधित अधिकारी समय रहते समाधान सुनिश्चित कर पाएंगे।

पूर्व रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर यात्रियों की सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। बेहतर अनुरक्षण व्यवस्था से ट्रेनों के संचालन में बाधाएं कम होंगी और नेटवर्क की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में रेलवे के अन्य विभागों में भी इसी तरह की डिजिटल पहल शुरू की जा सकती है। रेलवे बोर्ड लगातार आधुनिक तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दे रहा है ताकि भारतीय रेलवे को अधिक स्मार्ट और कुशल बनाया जा सके।

रेलवे कर्मचारियों ने भी इस नई व्यवस्था को सकारात्मक कदम बताया। तकनीशियनों का कहना है कि डिजिटल उपकरणों के उपयोग से काम की गति बढ़ेगी और रिपोर्टिंग प्रक्रिया अधिक आसान होगी। इससे फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।

मालदा मंडल की यह पहल पूर्व रेलवे के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में देखी जा रही है। यदि यह प्रणाली सफल रहती है तो आने वाले समय में इसे अन्य मंडलों में भी लागू किया जा सकता है।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि सुरक्षित, कुशल और आधुनिक रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ाया जाएगा। मालदा मंडल द्वारा शुरू की गई यह पहल भारतीय रेलवे के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है।

फिलहाल रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि टैबलेट आधारित स्मार्ट मेंटेनेंस प्रणाली लागू होने से सिग्नलिंग नेटवर्क की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं बेहतर रेल सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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