
पटना, 19 मई 2026: भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीमा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सीमा पर किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि, तस्करी, नकली नोटों के कारोबार और संदिग्ध मूवमेंट के खिलाफ पूरी सख्ती बरती जाए।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-नेपाल सीमा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्कता बढ़ा रही हैं। बिहार की नेपाल से लगने वाली लंबी खुली सीमा को देखते हुए राज्य सरकार ने सुरक्षा तंत्र को और आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों की समीक्षा की गई और उनकी प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा केवल भौगोलिक सीमा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए सीमा से जुड़े फैसलों में राज्य सरकार की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता के साथ पालन सुनिश्चित किया जाए और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से सीमा सुरक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फरवरी महीने में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। उसी बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा इस बैठक में की गई।
प्रस्तुतीकरण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। कई संवेदनशील इलाकों में आधुनिक निगरानी उपकरण लगाने की योजना पर काम चल रहा है ताकि संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान की जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमा क्षेत्रों में गश्ती व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में पुलिस, एसएसबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए ताकि किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि खुली सीमा का फायदा उठाकर कई बार नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध कारोबार और नकली नोटों की सप्लाई जैसी गतिविधियां सामने आती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ऐसी गतिविधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सीमा पर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए। आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने के साथ-साथ खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया जाए ताकि समय रहते किसी भी खतरे की जानकारी मिल सके।
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की भूमिका पर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय लोगों के सहयोग से कई मामलों में सुरक्षा एजेंसियों को सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाना जरूरी है ताकि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन तक पहुंचा सकें।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सीमावर्ती जिलों में नियमित अंतराल पर समीक्षा अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत सुरक्षा व्यवस्था, चौकसी और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि लगातार मॉनिटरिंग से सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा का बड़ा हिस्सा बिहार से जुड़ा होने के कारण राज्य की भूमिका काफी अहम हो जाती है। खुली सीमा होने के कारण आम लोगों की आवाजाही आसान रहती है, लेकिन यही स्थिति कई बार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती भी बन जाती है। इसलिए आधुनिक तकनीक और मजबूत समन्वय के जरिए सुरक्षा ढांचे को लगातार अपडेट करना जरूरी माना जा रहा है।
बैठक में सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि कई जगहों पर सड़क, संचार और निगरानी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे सुरक्षा बलों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार की साझा प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी एजेंसियां एकजुट होकर काम करें ताकि बिहार की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित बनी रहें।
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री , मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, पुलिस महानिदेशक ऑपरेशन कुंदन कृष्णन, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार की इस सख्त समीक्षा बैठक को आने वाले समय में सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार अब सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, तकनीकी संसाधनों और सुरक्षा तंत्र को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में है, जिससे गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।


