पटना नगर निगम की बड़ी पहल: ‘एक करोड़ पार्षद निधि योजना 3.0’ को मिली रफ्तार, दूसरी किश्त में जारी हुए 30 करोड़ से अधिक रुपए

पटना। राजधानी पटना में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और वार्ड स्तर पर विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने के उद्देश्य से पटना नगर निगम ने ‘एक करोड़ पार्षद निधि योजना 3.0’ के तहत दूसरी किश्त जारी कर दी है। नगर निगम की ओर से सभी प्रमंडलों को कुल 30.10 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे शहर में चल रही विकास योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी निगम मुख्यालय द्वारा 36.66 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई थी। लगातार फंड उपलब्ध कराए जाने के कारण विभिन्न वार्डों में चल रहे निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिल रही है।

पटना नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। नगर निगम द्वारा चलाई जा रही यह योजना सांसद और विधायक निधि योजना की तर्ज पर तैयार की गई है, ताकि वार्ड स्तर पर छोटे लेकिन जरूरी विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके। योजना के तहत सभी वार्ड पार्षदों को अपने क्षेत्र की जरूरत के अनुसार विकास योजनाओं की अनुशंसा करने का अधिकार दिया गया है।

नगर निगम के अनुसार फिलहाल शहर के सभी छह प्रमंडलों में कुल 911 विकास योजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सड़क निर्माण, नाला निर्माण, जलनिकासी व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, गली मरम्मत और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों को काफी राहत मिलेगी और आधारभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

प्रमंडलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक योजनाएं पाटलिपुत्र प्रमंडल में संचालित की जा रही हैं। यहां कुल 207 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा नूतन राजधानी प्रमंडल में 185, कंकड़बाग प्रमंडल में 151, अजीमाबाद प्रमंडल में 143, बांकीपुर प्रमंडल में 135 तथा पटना सिटी प्रमंडल में 90 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। नगर निगम का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से नागरिक सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा और लोगों को स्थानीय समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।

शहर के कई इलाकों में लंबे समय से खराब सड़कों, जाम नालों और जलजमाव जैसी समस्याएं बनी हुई थीं। बरसात के मौसम में इन समस्याओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नगर निगम की यह योजना वार्ड स्तर पर त्वरित समाधान उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही है। कई वार्डों में नई सड़कें बनाई जा रही हैं, जबकि कई स्थानों पर पुराने नालों की मरम्मत और नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण किया जा रहा है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ‘एक करोड़ पार्षद निधि योजना 3.0’ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन किया जाता है। वार्ड पार्षद सीधे जनता से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निगम तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद योजनाओं को स्वीकृति दी जाती है। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी दोनों सुनिश्चित होती हैं।

योजना के अंतर्गत प्रत्येक वार्ड पार्षद को अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए सालाना अधिकतम एक करोड़ रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जाती है। इस राशि का उपयोग छोटे लेकिन जरूरी विकास कार्यों के लिए किया जाता है, ताकि नागरिकों को जल्द राहत मिल सके। अधिकारियों के मुताबिक परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जाता है। दूसरी किश्त जारी होने के बाद अब निर्माण एजेंसियों और प्रमंडलों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम का दावा है कि कई वार्डों में विकास कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। लगातार फंड उपलब्ध होने के कारण ठेकेदारों और कार्य एजेंसियों को भुगतान में दिक्कत नहीं हो रही है। इससे निर्माण कार्यों की गति बनी हुई है। निगम अधिकारियों ने बताया कि शेष राशि भी जरूरत और मांग के अनुसार तीसरी किश्त के रूप में जारी की जाएगी, ताकि कोई भी परियोजना अधूरी न रह जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस योजना से कई इलाकों में बदलाव दिखाई देने लगा है। जहां पहले टूटी सड़कें और जलजमाव की समस्या आम थी, वहां अब निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं। खासकर स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी से जुड़े कार्यों का लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है। कई मोहल्लों में गलियों की मरम्मत और नई पक्की सड़क बनने से आवागमन आसान हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास के लिए इस तरह की विकेंद्रीकृत योजनाएं काफी प्रभावी साबित हो सकती हैं। जब वार्ड स्तर पर जरूरतों की पहचान कर सीधे फंड उपलब्ध कराया जाता है तो विकास कार्य तेजी से पूरे होते हैं और लोगों को तत्काल लाभ मिलता है। यही कारण है कि नगर निगम इस योजना को लगातार विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है।

पटना नगर निगम ने साफ किया है कि उसका उद्देश्य सभी स्वीकृत योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना है। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और प्रमंडलों से नियमित रिपोर्ट ली जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जिन क्षेत्रों में कार्य धीमी गति से चल रहे हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है।

राजधानी पटना तेजी से विस्तार कर रहा है और आबादी बढ़ने के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं की मांग भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में सड़क, नाला, जलनिकासी और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना नगर निगम की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘एक करोड़ पार्षद निधि योजना 3.0’ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

नगर निगम प्रशासन को उम्मीद है कि दूसरी किश्त जारी होने के बाद सभी प्रमंडलों में चल रहे कार्यों को और गति मिलेगी तथा आने वाले महीनों में शहरवासियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देगा। निगम का दावा है कि इस योजना के जरिए पटना को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधाजनक शहर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

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