
पटना। बिहार में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत चल रहे मकान सूचीकरण और मकानों की गणना कार्य को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस महत्वपूर्ण अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी, जनगणना पदाधिकारी और कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में जनगणना कार्य की गुणवत्ता, समय-सीमा और डेटा की शुद्धता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार ने साफ कर दिया है कि जनगणना के आंकड़े आने वाले वर्षों की सरकारी नीतियों और योजनाओं की नींव होंगे। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फील्ड में कार्यरत प्रगणक और पर्यवेक्षक पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ काम करें तथा हर जानकारी को रियल-टाइम में मोबाइल ऐप पर दर्ज करें।
बैठक की शुरुआत जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक-सह-मुख्य प्रधान जनगणना पदाधिकारी रंजिता द्वारा प्रस्तुतीकरण से हुई। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे ‘हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन’ यानी HLO कार्य की प्रगति की जानकारी दी गई। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि कई जिलों में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर डेटा एंट्री और सत्यापन से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में चल रहे कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल संख्या पूरी करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि आंकड़ों की गुणवत्ता और शुद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनगणना का यह चरण भविष्य की विकास योजनाओं का आधार बनेगा, इसलिए प्रत्येक जानकारी को गंभीरता से लिया जाए।
बैठक में नागरिकों द्वारा किए जा रहे सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्व-गणना कार्य पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन नागरिकों ने स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है, उनके द्वारा प्राप्त SE-ID का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। सभी चार्ज अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे प्रगणकों को स्पष्ट रूप से बताएं कि फील्ड में पहुंचते ही परिवार से सबसे पहले SE-ID के बारे में पूछें और उसे HLO मोबाइल ऐप के माध्यम से सत्यापित करें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य में तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने फील्ड में काम कर रहे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे किसी भी परिस्थिति में ऑफलाइन मोड या कागजी फॉर्म का उपयोग करके ऐप सिस्टम को बायपास न करें। सभी डेटा सीधे मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम में दर्ज किए जाएं ताकि जानकारी तुरंत केंद्रीय सर्वर तक पहुंच सके और डेटा की निगरानी आसान हो सके।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि कई बार बंद मकानों, दुकानों या किरायेदारों से जुड़ी प्रविष्टियां छूट जाती हैं। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसी कोई भी जानकारी छूटनी नहीं चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंद मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और किरायेदारों से संबंधित जानकारी भी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। इसके लिए जरूरत पड़ने पर दोबारा फील्ड विजिट करने को भी कहा गया।
जनगणना कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पुनः प्रशिक्षण यानी री-ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निदेशक-सह-मुख्य प्रधान जनगणना पदाधिकारी को निर्देश दिया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी नोडल अधिकारियों, चार्ज अधिकारियों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दोबारा प्रशिक्षण दिया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी कर्मियों को मोबाइल ऐप, डेटा एंट्री प्रक्रिया और सत्यापन प्रणाली की सही जानकारी हो।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनगणना कराने से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और भविष्य में डेटा विश्लेषण आसान होगा। पहली बार इतने बड़े स्तर पर रियल-टाइम मोबाइल ऐप आधारित जनगणना प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है, इसलिए सरकार इसकी मॉनिटरिंग को लेकर बेहद गंभीर दिखाई दे रही है।
बैठक के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने सुझाव दिए। अधिकारियों ने जिलों में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों पर चर्चा की और उनके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। कई जिलाधिकारियों ने फील्ड स्तर पर नेटवर्क समस्या, तकनीकी दिक्कतों और प्रशिक्षण से जुड़े मुद्दों की जानकारी भी साझा की।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला राष्ट्रीय कार्य है। जनसंख्या, आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे से जुड़ी भविष्य की योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार होती हैं। ऐसे में यदि डेटा गलत या अधूरा हुआ तो इसका सीधा असर सरकारी नीतियों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना 2027 कई मायनों में महत्वपूर्ण होने वाली है। डिजिटल तकनीक के उपयोग के कारण इस बार डेटा संग्रहण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होगी। साथ ही सरकार को वास्तविक समय में आंकड़ों की निगरानी करने का अवसर मिलेगा। यही कारण है कि बिहार सरकार इस अभियान को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में जनगणना कार्य की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई करें। उन्होंने दोहराया कि रियल-टाइम ऐप आधारित डेटा एंट्री हर हाल में सुनिश्चित की जाए और जनगणना कार्य को पूरी गंभीरता के साथ पूरा किया जाए।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक समाप्त हुई, लेकिन सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि जनगणना 2027 को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिहार में प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार निगरानी और समीक्षा का दौर जारी रहेगा।


