
पटना, 18 मई 2026। बिहार में सब्जी उत्पादक किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराने, उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और शहरी उपभोक्ताओं तक ताजी हरी सब्जियां सीधे पहुंचाने के लिए सहकारिता विभाग ने एक बड़े ढांचागत विन्यास पर काम शुरू कर दिया है। सहकारिता विभाग के मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी परिसंघ लिमिटेड (वेजफेड) की एक उच्चस्तरीय और विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक में वेजफेड की वर्तमान कार्यप्रणाली, वित्तीय व्यवस्था, विभिन्न जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों, संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं की गहन तकनीकी समीक्षा की गई। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह और वेजफेड के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन सहित परिसंघ के कई अन्य वरीय तकनीकी अधिकारी और नीति योजनाकार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के भीतर यह साफ किया गया कि राज्य के भीतर सब्जी उत्पादन की प्रचुर संभावनाओं को देखते हुए जब तक भंडारण, प्रसंस्करण और प्रत्यक्ष विपणन की कड़ियों को एक ग्रिड के रूप में मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक किसानों के आर्थिक पुनरुत्थान को गति देना संभव नहीं है। इसी विलेख के तहत वेजफेड को अपनी पूरी कार्यशैली को आधुनिक और बाजार-उन्मुख बनाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ाव और आधुनिक एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण
समीक्षा के क्रम में सहकारिता मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश को विकसित बनाने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में बिहार के सहकारी संस्थानों और जमीनी स्तर पर जुड़े किसानों का अवदान अत्यंत अनिवार्य है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा बिहार के सहकारी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के संदर्भ में पूर्व में दिए गए नीतिगत मार्गदर्शन को धरातल पर उतारने के लिए विभाग ने पूरी कड़ाई से अपनी कमर कस ली है। सहकार से समृद्धि की परिकल्पना को वास्तविक विन्यास देने के उद्देश्य से इस बैठक में प्रधानमंत्री के “एग्री-इंफ्रा विजन” को सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया।
विभाग के इंजीनियरों और प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे पारंपरिक कृषि विपणन प्रणालियों को पूरी तरह से ब्लॉक करते हुए आधुनिक सहकारी कृषि अवसंरचना के विकास को गति दें। इसके तहत खेतों के समीप ही कलेक्शन सेंटर, ग्रेडिंग यूनिट और प्राथमिक शीतलन प्रणालियों की स्थापना की जाएगी ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस) को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
प्राथमिक सब्जी उत्पादक समितियों का पंचायत स्तर तक होगा सांगठनिक विस्तार
सब्जी उत्पादक किसानों को सहकारी ऊष्मा प्रदान करने के लिए प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति (पीवीसीएस) के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की प्रविधि तय की गई है। सहकारिता मंत्री ने निर्देश दिया है कि पीवीसीएस के दायरे को वर्तमान प्रखंड स्तर से नीचे ले जाकर सीधे पंचायत स्तर तक विस्तारित किया जाए। इस भौगोलिक विस्तार से सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले छोटे और सीमांत सब्जी उत्पादक भी सीधे तौर पर सहकारी तंत्र का हिस्सा बन सकेंगे।
समितियों में सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के उद्देश्य से बहुत जल्द ही पूरे बिहार में एक व्यापक राज्यव्यापी महाअभियान संचालित किया जाएगा। इस सदस्यता अभियान के विलेखों की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि वास्तविक रूप से खेतों में काम करने वाले किसान ही इसके सदस्य बनें। जब यह समितियां सीधे पंचायत स्तर पर सक्रिय होंगी, तो स्थानीय स्तर पर ही सब्जी संकलन की व्यवस्था सुचारु हो जाएगी, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और स्टार्ट-अप के नए अवसर सृजित होंगे।
छह प्रमुख शहरों की आवासीय सोसाइटियों में खुलेंगे तरकारी आउटलेट, पटना में पायलट प्रोजेक्ट
शहरी उपभोक्ताओं को बाजार की विसंगतियों और रासायनिक रूप से उपचारित सब्जियों से बचाने के लिए वेजफेड अपने बहुचर्चित “तरकारी आउटलेट” नेटवर्क का आक्रामक विस्तार करने जा रहा है। समीक्षा बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया कि राज्य के छह सबसे बड़े और घनी आबादी वाले नगरों— पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया की बड़ी आवासीय सोसाइटियों, अपार्टमेंट परिसरों और रिहायशी कॉलोनियों के भीतर सीधे सब्जी विक्रय हेतु विशेष “तरकारी आउटलेट” स्थापित किए जाएंगे। इन आउटलेट्स की स्थापना की व्यावहारिक संभावनाओं को तलाशने के लिए एक विशेष सर्वे दल का गठन किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए सबसे पहले राजधानी पटना के विभिन्न चिन्हित अपार्टमेंट्स और सोसाइटियों में एक व्यापक पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जाएगा। पटना में इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन और इसके तकनीकी इनपुट्स की समीक्षा के बाद इसे मुजफ्फरपुर, भागलपुर और अन्य जिलों के शहरी मुहानों पर कड़ाई से लागू किया जाएगा। इन आउटलेट्स के माध्यम से शहरी उपभोक्ताओं को पूरी तरह से प्रसंस्कृत, साफ-सुथरी, ग्रेडिंग की हुई और ताजी हरी सब्जियां बेहद किफायती व नियंत्रित सरकारी दरों पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे बाजार के अनियंत्रित मूल्य सूचकांक पर भी लगाम लगेगी।
750 एमटी क्षमता के बहुउद्देशीय कोल्ड स्टोरेज और अत्याधुनिक ‘सब्जी मॉल’ का खाका
सब्जियों की नश्वर प्रकृति को देखते हुए उनके वैज्ञानिक भंडारण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। सहकारिता मंत्री ने वेजफेड के अंतर्गत पूर्व से प्रस्तावित और निर्माणाधीन 750 मीट्रिक टन (एमटी) क्षमता वाली बहुउद्देशीय शीत भंडारण (Multipurpose Cold Storage) परियोजनाओं के निर्माण कार्य में पूरी कड़ाई के साथ तेजी लाने का हुक्म जारी किया है। इन परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने की विधा तय की गई है। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि आधुनिक और तापमान-नियंत्रित भंडारण व्यवस्था ही किसानों को फसल के बंपर उत्पादन के समय औने-पौने दामों पर उपज बेचने (डिस्ट्रेस सेल) की लाचारी से विधिक सुरक्षा प्रदान करेगी।
इसके साथ ही, बैठक में बिहार के भीतर अपनी तरह के पहले आधुनिक “सब्जी मॉल” को विकसित करने के क्रांतिकारी प्रस्ताव पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस अभिनव विन्यास के लिए सहकारिता मंत्री ने वेजफेड के प्रबंध निदेशक को एक व्यापक और व्यावहारिक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने का विधिक निर्देश दिया है। इस सब्जी मॉल के बन जाने से उत्पादक किसानों को एक ही छत के नीचे बड़ा कॉर्पोरेट बाजार उपलब्ध होगा और बड़े थोक व खुदरा उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद एक ही स्थान पर संधारित मिलेंगे।
‘फार्म टू डेस्क’ मॉडल का डिजिटलीकरण और समर्पित मोबाइल एप्लीकेशन का विन्यास
कृषि तकनीकों और सूचना प्रणालियों के आधुनिक दौर को सहकारी आंदोलन से जोड़ने के लिए डिजिटल तकनीकों के समावेश पर विशेष बल दिया गया है। सहकारिता विभाग ने “Farm to Desk” (खेत से थाली तक) के पूरे सप्लाई चेन मॉडल को एक सुदृढ़ डिजिटल प्लेटफॉर्म से एकीकृत करने का विधिक खाका तैयार किया है। इसके लिए वेजफेड के तकनीकी निदेशकों को एक समर्पित और सुरक्षित मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।
इस मोबाइल ऐप के जरिए उत्पादक किसान अपनी फसलों के प्रकार, अनुमानित मात्रा और कटाई के समय का विलेख सीधे दर्ज कर सकेंगे, जिसे देखकर वेजफेड के वाहन सीधे उनके खेतों से माल उठा सकेंगे। दूसरी तरफ, शहरी उपभोक्ता और आउटलेट संचालक भी इस ऐप के माध्यम से अपनी दैनिक आवश्यकताओं का आर्डर बुक कर सकेंगे। डिजिटल प्रविधि के माध्यम से बिचौलियों की कड़ियों को पूरी तरह से ब्लॉक कर किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा, पारदर्शी और सुदृढ़ संपर्क स्थापित किया जा सकेगा, जिससे वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता बहाल होगी।
मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से बढेगी प्रशिक्षित किसानों की संख्या
तकनीकी हस्तांतरण की प्रणालियों को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन के विकास पर भी बैठक में गंभीर विमर्श हुआ। सहकारिता मंत्री ने निर्देश दिया कि वेजफेड के अंतर्गत काम करने वाले मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से प्रशिक्षित किए जाने वाले किसानों के दायरे और उनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जाए। इन प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से सुदूर अंचलों के सामान्य किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, जैविक खाद के उपयोग, फसल सुरक्षा के विन्यासों, तुड़ाई के उपरांत प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) और डिजिटल विपणन व्यवस्था की प्रविधियों का व्यावहारिक ज्ञान कड़ाई से प्रदान किया जाएगा।
परिसंघ को यह भी आदेश दिया गया है कि वे वेजफेड की इन जन-कल्याणकारी योजनाओं, कोल्ड स्टोरेज की सुविधाओं और तरकारी ब्रांड की उपलब्धियों का ग्रामीण इलाकों में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि अधिक से अधिक किसान इस सहकारी संजाल से जुड़कर अपनी आय को दोगुना कर सकें। विभाग के सचिव ने भरोसा दिलाया कि सभी नई परियोजनाओं को पूरी पारदर्शिता और कड़े कार्य-अनुशासन के साथ तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर पूरा कर लिया जाएगा।


