
पटना, 18 मई 2026। बिहार राज्य के सुदूर वनों, पहाड़ियों और सीमावर्ती प्रक्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान, सांस्कृतिक संरक्षण और उनके विधिक अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बहुत बड़े और व्यापक प्रशासनिक महाअभियान का खाका तैयार किया गया है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित होने वाले “जनजातीय गरिमा उत्सव” के अंतर्गत “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” नामक विशेष लोक कल्याणकारी अभियान का विधिक शंखनाद सोमवार को कर दिया गया। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन सत्र के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र के पहले ही दिन राज्य के सभी 24 चिन्हित जनजातीय बहुल जिलों में वहां के जिलाधिकारियों द्वारा इस जन-अभियान का विधिवत और सांगठनिक उद्घाटन किया गया। शासन का मुख्य ध्येय उन दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों तक प्रशासनिक तंत्र की सीधी पहुंच स्थापित करना है जो मुख्यधारा के विकास से कतिपय दूर रह गए हैं।
24 जिलों के 74 प्रखंडों और 771 गांवों में सैचुरेशन कैंपों का महाजाल
इस वृहद् सामाजिक और प्रशासनिक अभियान के भौगोलिक विन्यास और रणनीतिक कड़ियों की बात करें तो इसे पूरी तरह से जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए सूक्ष्म मैपिंग की गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा तैयार किए गए विलेखों के अनुसार, बिहार के कुल 24 जिलों को इस अभियान के लिए चुना गया है, जहां जनजातीय आबादी का घनत्व अधिक है। इन चिन्हित जिलों के अंतर्गत आने वाले 74 रणनीतिक प्रखंडों के कुल 771 जनजातीय बहुल गांवों को इस सघन अभियान के केंद्र बिंदु के रूप में विलेखों में शामिल किया गया है।
अभियान के प्रथम चरण के तहत इन सभी 771 गांवों में व्यापक स्तर पर ‘सैचुरेशन कैंप’ (पूर्ण संतृप्ति शिविर) आयोजित किए जा रहे हैं। इन विशेष शिविरों के समानांतर ही प्रक्षेत्र के पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक वृक्षारोपण अभियान (प्लांटेशन ड्राइव), संक्रामक व मौसमी बीमारियों से सुरक्षा के लिए विशेष चिकित्सा शिविर (हेल्थ कैंप) और विभिन्न नागरिक अधिकारों को लेकर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि इनमें विभिन्न कल्याणकारी सरकारी योजनाओं से वंचित रह गए पात्र लाभुकों के आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट (मौके पर ही) विधिक निस्तारण कर उन्हें सीधे सेवाओं का लाभ हस्तगत कराया जा रहा है।
दस्तावेज सत्यापन से लेकर आयुष्मान और बैंकिंग समावेशन का कड़ा सुरक्षा कवच
”जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के दौरान लक्षित समुदायों को एक ही छत के नीचे तमाम नागरिक और प्रशासनिक सुविधाएं देने की व्यवस्था की गई है। शिविरों के भीतर मुख्य रूप से निम्नलिखित अनिवार्य नागरिक सेवाओं और लोक कल्याणकारी योजनाओं का सांगठनिक एकीकरण किया जा रहा है:
- दस्तावेज और पहचान पत्र सत्यापन: शिविरों में समाज के सबसे पिछड़े व्यक्तियों के आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य विधिक पहचान पत्रों का त्वरित सत्यापन और नए कार्डों के निर्माण की प्रविधि पूरी की जा रही है ताकि उनके विलेख दुरुस्त हो सकें।
- सामाजिक सुरक्षा और पेंशन योजनाएं: वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगता पेंशन जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से छूटे हुए पात्र व्यक्तियों की पहचान कर उनके फॉर्म ऑन-स्पॉट सबमिट किए जा रहे हैं।
- स्वास्थ्य और आयुष्मान कार्ड वितरण: स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टरों की टीम द्वारा मुफ्त शारीरिक जांच और औषधियों के वितरण के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के मुफ्त इलाज के लिए ‘आयुष्मान भारत कार्ड’ निर्माण की डिजिटल प्रक्रिया कड़ाई से संधारित की जा रही है।
- शैक्षणिक छात्रवृत्ति और राशन कार्ड: जनजातीय समाज के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छात्रवृत्ति के लंबित मामलों का निपटारा किया जा रहा है, साथ ही खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए राशन कार्डों के विन्यास और संशोधन की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
- बैंकिंग और वित्तीय समावेशन: विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों द्वारा कैंपों में ही शून्य शेष वाले नए बैंक खाते खोलने, प्रधानमंत्री जन धन योजना का लाभ देने और छोटे उद्यमों के लिए ऋण प्रवाह सुगम बनाने की प्रणालियां संचालित की जा रही हैं।
21 से 23 मई के बीच आयोजित होंगे विशेष जन सुनवाई शिविर
इस पूरे महाअभियान को केवल एकतरफा सेवा वितरण तक सीमित न रखकर, जनता की शिकायतों के वास्तविक निवारण का एक सशक्त माध्यम भी बनाया गया है। पूर्व निर्धारित समय-सारणी के विलेखों के अनुसार, आगामी 21 मई से लेकर 23 मई 2026 के बीच इन सभी 771 जनजातीय बहुल गांवों में विशेष ‘जन सुनवाई शिविरों’ का सांगठनिक विन्यास किया जाएगा। इन तीन दिनों के दौरान संबंधित प्रक्षेत्रों के अंचलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और जिला स्तर के वरीय तकनीकी विंग के कप्तान स्वयं गांवों में चौपाल लगाकर बैठेंगे।
इन जन सुनवाई शिविरों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर व्याप्त भूमि विवादों, सड़कों व पेयजल की अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं, कतिपय सरकारी कर्मियों की उदासीन प्रवृत्तियों से जुड़ी शिकायतों और सुदूर देहातों की मूलभूत सामुदायिक आवश्यकताओं का ऑन-द-स्पॉट विधिक समाधान सुनिश्चित करना है। इन शिविरों की पूरी कार्यवाही का एक लिखित और डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा, जिसे सीधे राज्य मुख्यालय के सर्विलांस तंत्र से जोड़ा जा रहा है ताकि शिकायतों के निवारण की पारदर्शिता और सत्यता को कड़ाई से परखा जा सके।
मुख्य सचिव का कड़ा निर्देश: मिशन मोड में हो काम, प्रतिदिन ली जाएगी प्रगति रिपोर्ट
राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन सत्र के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी 24 जिलों के जिलाधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बेहद कड़ा और स्पष्ट प्रशासनिक रुख अख्तियार किया। उन्होंने दोटूक शब्दों में निर्देश दिया कि जनजातीय प्रक्षेत्रों में संचालित होने वाले इस पूरे गरिमा उत्सव और जन भागीदारी अभियान के सभी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन पूरी तरह से ‘मिशन मोड’ में सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। इसमें किसी भी स्तर की लिपिकीय शिथिलता, मानवीय लापरवाही या तकनीकी बहानों को विधिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को यह हर हाल में ध्यान रखना होगा कि सरकार द्वारा संचालित लोक कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे वंचित व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता और तय समय-सीमा के भीतर पहुंचे। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित किया कि वे स्वयं इन कैंपों की भौतिक अवस्थिति की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि इन शिविरों में स्थानीय आबादी की भागीदारी अधिकतम हो। उन्होंने कहा कि यह केवल एक रूटीन सरकारी कार्यक्रम या कागजी आंकड़ों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह देश के मूल जनजातीय समुदायों के सम्मान, उनके विधिक अधिकारों और उनके सर्वांगीण सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील और युगांतरकारी सामाजिक महाअभियान है। राज्य स्तर से इसकी सतत डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी और सभी संबंधित जिलों से प्रतिदिन शाम को प्रगति प्रतिवेदन (प्रोग्रेस रिपोर्ट) अनिवार्य रूप से संकलित की जाएगी।
एससी-एसटी कल्याण विभाग की प्रशासनिक तैयारी और हाइब्रिड बैठक का विन्यास
ओरिएंटेशन सत्र के मुख्य मंच से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के शीर्ष नीति-नियंताओं ने इस पूरे महाअभियान की सांगठनिक रूपरेखा, विभिन्न गतिविधियों की कड़क समय-सीमा, डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था और विभिन्न संबंधित विभागों (जैसे स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायती राज, खाद्य उपभोक्ता और बैंकिंग) के विभागवार दायित्वों की विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान की सफलता के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों के बीच एक मजबूत अंतर-विभागीय ग्रिड का निर्माण किया गया है ताकि किसी भी लाभार्थी को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर न काटने पड़ें।
एससी-एसटी कल्याण विभाग ने राज्य के सभी संबंधित प्रशासनिक विभागों, जिला प्रशासनों, पुलिस कप्तानों और विशेष रूप से स्थानीय त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों (मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्यों) से अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय और सांगठनिक सहयोग प्रदान करें ताकि जनजातीय समाज के भीतर शासन के प्रति एक नया विश्वास बहाल किया जा सके। इस महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण हाइब्रिड सत्र के दौरान विभाग के सचिव संदीप आर पुडकलकट्टी, निदेशक प्रियंका रानी सहित संबंधित सभी 24 जिलों के जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त (DDC) और कल्याण विभागों के वरिष्ठ नीतिगत पदाधिकारी पूरी कड़ाई और प्रशासनिक मुस्तैदी के साथ उपस्थित रहे।


