
भागलपुर, 18 मई 2026। अंग प्रक्षेत्र सहित पूरे भागलपुर जिले में सूर्य की तीखी किरणों और वायुमंडल में व्याप्त अत्यधिक आर्द्रता के संमिश्रण ने जनजीवन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह के बाद, मई के उत्तरार्ध में एक बार फिर से मौसमी विन्यासों में अभूतपूर्व तल्खी दर्ज की गई है। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान भले ही गणितीय आंकड़ों में 37.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया हो, लेकिन आम नागरिकों को धरातल पर महसूस होने वाला तापमान यानी ‘फीलिंग टेम्परेचर’ लगभग 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास महसूस हुआ। आसमान से बरसती आग और हवा में तैरती भारी नमी के कारण स्थिति इतनी विकट हो गई है कि घरों के भीतर रहने वाले लोग भी पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस अप्रत्याशित बेचैनी के पीछे बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पूर्वी हवाओं की मुख्य भूमिका है, जो अपने साथ भारी मात्रा में जलवाष्प लेकर मैदानी भागों में प्रवेश कर चुकी हैं।
पूर्वी हवाओं के साथ आई नमी ने बिगाड़ा मौसम का संतुलन, बढ़ा ‘हीट इंडेक्स’
मौसम के इस बदले हुए विन्यास को तकनीकी प्रविधियों के तहत समझाते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि जब हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो वास्तविक तापमान की तुलना में मानव शरीर को कहीं अधिक गर्मी का अहसास होता है। रविवार को दिन के समय भागलपुर के आसमान से तीव्र सौर विकिरण दर्ज किया गया, जिसने धरती को बुरी तरह तपा दिया। इसी दौरान वायुमंडल की निचली परतों में बहने वाली पूर्वी हवाओं ने बंगाल की खाड़ी के प्रक्षेत्र से प्रचुर मात्रा में आर्द्रता लाकर वातावरण में घोल दी।
नमी और तापमान के इस घातक संयोजन के कारण ‘हीट इंडेक्स’ (ऊष्मा सूचकांक) अचानक छलांग लगाकर 44 डिग्री सेल्सियस के विलेक स्तर पर पहुंच गया। वैज्ञानिक विधा के अनुसार, जब हवा में नमी अधिक होती है, तो मानव शरीर का प्राकृतिक शीतलन तंत्र यानी पसीना वाष्पीकृत नहीं हो पाता है। पसीना त्वचा पर ही जमा रहने के कारण शरीर का आंतरिक तापमान कम नहीं होता, जिसके कारण लोगों को अत्यधिक घुटन, सांस लेने में भारीपन और चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
न्यूनतम तापमान में भी रिकॉर्ड उछाल, रात के समय भी उमस से लोग बेहाल
दिन की इस प्रचंड तपिश के साथ-साथ रात के समय मिलने वाली आंशिक राहत भी अब पूरी तरह से गायब हो चुकी है। मौसम केंद्र से प्राप्त विधिक आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर का न्यूनतम तापमान भी छलांग लगाकर 36.8 डिग्री सेल्सियस के अत्यधिक ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया है। यह न्यूनतम तापमान सामान्य मौसमी औसत से लगभग 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। रात के समय न्यूनतम पारे का इस कदर ऊंचे स्तर पर बने रहना बेहद असामान्य माना जाता है, जिसके कारण सूर्यास्त के बाद भी वातावरण में ठंडक का नामोनिशान नहीं रहा।
शहरी और ग्रामीण प्रक्षेत्रों में कंक्रीट के मकानों और तंग गलियों में रहने वाले नागरिक रात भर उमस के कारण छटपटाते रहे। बंद कमरों के भीतर पंखे और कूलर भी पूरी तरह से गर्म हवा फेंक रहे हैं, जिससे लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है और इसका सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बिजली की खपत में अचानक आई भारी तेजी के कारण कई मोहल्लों में लो-वोल्टेज और तकनीकी विसंगतियों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिसने आम जनता की परेशानियों को दोगुना कर दिया है।
सड़कों पर पसरा सन्नाटा, दैनिक मजदूरों और राहगीरों के छूटे पसीने
इस भीषण ऊष्मा सूचकांक का सीधा और व्यापक प्रभाव भागलपुर शहर की व्यस्ततम सड़कों और व्यापारिक विभावों पर साफ तौर पर देखने को मिला। दोपहर के समय शहर के मुख्य बाजार जैसे सुजागंज, खलीफाबाग, वैरायटी चौक और स्टेशन रोड प्रक्षेत्र में आम दिनों की तुलना में लोगों की आवाजाही बेहद कम दर्ज की गई। अति आवश्यक कार्यों से बाहर निकलने वाले राहगीर अपने चेहरों को सूती कपड़ों और गमछों से पूरी तरह ढक कर यात्रा करने को मजबूर दिखे।
सड़कों पर चलने वाले ई-रिक्शा चालकों, ठेला खींचने वाले दैनिक मजदूरों और फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यह मौसम एक बड़ी शारीरिक प्रताड़ना साबित हो रहा है। लगातार बहते पसीने और अत्यधिक निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) के कारण लोगों में चक्कर आने और कमजोरी की शिकायतें बढ़ रही हैं। बाजार में गन्ने के रस, लस्सी, सत्तू के शर्बत और ठंडे कटीले फलों जैसे तरबूज व खीरे की दुकानों पर प्यास बुझाने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के मौसम वैज्ञानिक का अद्यतन पूर्वानुमान
आगामी दिनों में मौसम की करवट और प्रवृत्तियों को लेकर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर बीरेंद्र कुमार ने एक विस्तृत और महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम वैज्ञानिक बीरेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को भी जिले के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने (आंशिक बदरी) की विभावना बनी रहेगी, लेकिन इन बादलों के बावजूद उमस और गर्मी से कोई राहत नहीं मिलने वाली है। सोमवार का दिन भी नागरिकों के शरीर से भारी मात्रा में पसीना निकालेगा और वातावरण में चिपचिपापन अपने चरम पर रहेगा।
विभागीय बुलेटिन के विलेखों के अनुसार, आगामी 19 और 20 मई को मौसमी प्रणालियों में थोड़ा बदलाव दर्ज किया जा सकता है। इन दो दिनों के दौरान आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ ही भागलपुर जिले के कुछ चुनिंदा ग्रामीण और शहरी स्थानों पर स्थानीय दबाव के कारण हल्की बारिश या तेज बूंदाबांदी होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि, यह शुरुआती बूंदाबांदी उमस को कम करने के बजाय हवा में नमी की मात्रा को और अधिक बढ़ा सकती है, जिससे तात्कालिक रूप से बेचैनी थोड़ी और बढ़ जाएगी।
21 से 23 मई के बीच आंधी-बारिश का अलर्ट, तापमान में नहीं होगी बड़ी गिरावट
मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर बीरेंद्र कुमार ने आगे के चक्र को स्पष्ट करते हुए बताया कि भागलपुर और उसके आस-पास के सीमावर्ती जिलों में 21 मई से लेकर 23 मई 2026 के बीच एक मजबूत मौसमी विक्षोभ सक्रिय होने का अनुमान है। इस समयावधि के दौरान प्रक्षेत्र में तेज गति से चलने वाली धूल भरी आंधी के साथ-साथ मध्यम से भारी स्तर की बारिश की विधा धरातल पर देखने को मिल सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) होने की भी आशंका जताई गई है, जिसे लेकर किसानों और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है।
हालांकि, इस पूरे आंधी-बारिश के चक्रव्यूह के बावजूद तापमान के मोर्चे पर आम जनता को कोई बहुत बड़ी या स्थाई राहत मिलती हुई नहीं दिख रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के तकनीकी निदेशकों का स्पष्ट कहना है कि बादलों के छाने और बारिश होने के बावजूद दिन और रात के अधिकतम व न्यूनतम तापमान में कोई उल्लेखनीय या बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की जाएगी। इसका मुख्य कारण यह है कि वायुमंडल में पहले से ही इतनी अधिक ऊष्मा और आर्द्रता संचित हो चुकी है कि बारिश की बूंदें गिरने के बाद वाष्पीकरण की प्रक्रिया और तेज होगी, जिससे हवा का तापमान ऊंचे स्तर पर ही संधारित रहेगा।
चिकित्सकों की सलाह: खान-पान में बरतें कड़ाई, लू और डिहाइड्रेशन से रखें दूरी
इस बेहद विकट और आर्द्रता युक्त मौसमी विन्यास को देखते हुए भागलपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम नागरिकों के लिए एक कड़ा परामर्श (एडवाइजरी) जारी किया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब हीट इंडेक्स 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा हो, तो शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी का भारी मात्रा में क्षरण होता है। ऐसी स्थिति में प्यास न लगने पर भी प्रत्येक आधे घंटे में पानी पीते रहना अनिवार्य है।
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे धूप में निकलने से बचें और यदि बाहर जाना अत्यंत आवश्यक हो, तो हल्के रंग के ढीले सूती वस्त्रों का ही चयन करें। खान-पान में बासी भोजन और अत्यधिक तैलीय पदार्थों के सेवन से पूरी तरह परहेज करने को कहा गया है, क्योंकि इस मौसम में पाचन तंत्र के कमजोर होने और डायरिया जैसी गंभीर विसंगतियों के पनपने का खतरा सबसे अधिक रहता है। ओआरएस (ORS) का घोल, नींबू पानी और पुदीने के शर्बत का नियमित सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मुख्य भूमिका निभा सकता है। स्वास्थ्य केंद्रों को भी लू और उमस जनित बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त औषधियों का भंडारण सुनिश्चित रखने का निर्देश जारी किया गया है।


