नवगछिया की मनराजी लीची ने बढ़ाई किसानों की उम्मीद, देश-विदेश से उमड़े खरीदार, कम पैदावार के बावजूद रिकॉर्ड मांग

भागलपुर। बिहार के नवगछिया की मशहूर मनराजी लीची इस बार फिर चर्चा में है। स्वाद, मिठास और गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इस साल मौसम की मार और उत्पादन में कमी ने किसानों की चिंता बढ़ाई थी, लेकिन अब बाजार से मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है। बड़े व्यापारियों, ऑनलाइन सप्लाई कंपनियों और विदेशी खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण नवगछिया के लीची उत्पादक इस सीजन को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

जैसे-जैसे बागानों में मनराजी लीची का रंग गहरा हो रहा है और फल आकार लेने लगे हैं, वैसे-वैसे बाजार में इसकी मांग बढ़ती जा रही है। बिहार समेत देश के कई बड़े शहरों से व्यापारी सीधे किसानों और उत्पादकों से संपर्क कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद और वडोदरा जैसे शहरों में इस लीची की भारी मांग बताई जा रही है।

किसानों का कहना है कि इस बार शुरुआती मौसम ने काफी नुकसान पहुंचाया था। तापमान में उतार-चढ़ाव और समय से पहले गर्मी बढ़ने के कारण फसल पर असर पड़ा। कई बागानों में फूल और शुरुआती फल झड़ गए, जिससे उत्पादन कम हो गया। इसके बावजूद जो लीची तैयार हुई है उसकी गुणवत्ता बेहद बेहतर मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मनराजी लीची की सबसे बड़ी खासियत उसका स्वाद, गूदा और मिठास है। यही वजह है कि बाजार में इसकी अलग पहचान बन चुकी है। नवगछिया की मिट्टी और जलवायु इस लीची के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, जिससे इसका स्वाद दूसरे क्षेत्रों की लीची से अलग हो जाता है।

लीची उत्पादक और एक्सपोर्टर चंदन कुमार सिंह के अनुसार, इस बार मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची का उत्पादन केवल 25 से 30 प्रतिशत तक ही रह गया है। वहीं नवगछिया की मनराजी लीची का उत्पादन लगभग 70 प्रतिशत हुआ है। उत्पादन कम होने के बावजूद मांग काफी ज्यादा है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि कई बड़ी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियां भी इस बार नवगछिया की लीची खरीदने में रुचि दिखा रही हैं। प्रतिदिन लगभग पांच टन लीची की मांग की जा रही है। हालांकि किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाजार में लीची की उपलब्धता कम होने के कारण कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। उत्पादन कम रहने से किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

नवगछिया की मनराजी लीची को हाल ही में पटना में आयोजित बिहार राष्ट्रीय लीची और आम सम्मेलन में भी विशेष पहचान मिली। सम्मेलन में लीची की गुणवत्ता, निर्यात संभावनाओं और किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान नवगछिया के उत्पादकों ने मनराजी लीची को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति पर भी जोर दिया।

सम्मेलन में शामिल किसानों और विशेषज्ञों ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन उचित सहयोग दे, तो नवगछिया की लीची अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी पहचान बना सकती है। खास तौर पर मध्य पूर्व, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में भारतीय लीची की मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि इस बार कई विदेशी खरीदार पहले से संपर्क में हैं। वे जून के शुरुआती सप्ताह में लीची की खेप लेने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि निर्यात के लिए पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था पर भी काम शुरू हो चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और समय पर बारिश नहीं हुई, तो इस बार लीची की गुणवत्ता और बेहतर हो सकती है। हालांकि अचानक मौसम बदलने की आशंका अभी भी बनी हुई है, जिससे किसान पूरी तरह सतर्क हैं।

नवगछिया के बागानों में इन दिनों खास रौनक देखने को मिल रही है। व्यापारी लगातार बागानों का दौरा कर रहे हैं और फसल की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। कई जगहों पर एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की लीची देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खासकर भागलपुर और मुजफ्फरपुर क्षेत्र के हजारों किसान सीधे तौर पर लीची उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में अच्छी कीमत मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

इस बीच नवगछिया की मनराजी लीची को जीआई टैग दिलाने की मांग भी तेज हो गई है। किसान लगातार सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि इस विशेष किस्म को भौगोलिक पहचान दिलाई जाए ताकि इसकी ब्रांड वैल्यू और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ सके।

जीआई टैग मिलने से किसी उत्पाद की मौलिकता और क्षेत्रीय विशेषता को आधिकारिक मान्यता मिलती है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है और असली उत्पादकों को बेहतर दाम मिलता है। किसानों का मानना है कि यदि मनराजी लीची को जीआई टैग मिल जाता है, तो इसकी कीमत और मांग दोनों में बड़ा इजाफा हो सकता है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नवगछिया की लीची पहले से ही अपने स्वाद के कारण बाजार में खास पहचान रखती है। लेकिन उचित ब्रांडिंग और सरकारी सहयोग मिलने पर यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत जगह बना सकती है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लीची उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

फिलहाल नवगछिया के किसान आने वाले कुछ हफ्तों को लेकर काफी उम्मीद लगाए बैठे हैं। जून की शुरुआत के साथ ही लीची का मुख्य सीजन शुरू होगा और तभी असली बाजार का अंदाजा लग पाएगा।

कम पैदावार के बावजूद जिस तरह से मनराजी लीची की मांग बढ़ी है, उसने किसानों को नई उम्मीद दी है। अब सबकी नजर मौसम और बाजार दोनों पर टिकी हुई है। यदि हालात अनुकूल रहे तो इस बार नवगछिया की मनराजी लीची देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान और मजबूत कर सकती है।

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