भागलपुर में बिहार का पहला वॉटर स्पोर्ट्स एकलव्य केंद्र: कयाकिंग और कैनोइंग के लिए चयन ट्रायल 20 मई को, खिलाड़ियों को मिलेंगी निशुल्क सुविधाएं

भागलपुर, 17 मई 2026। बिहार के खेल परिदृश्य को वैश्विक और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। खेल विभाग, बिहार सरकार, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, पटना और जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के अंतर्गत राज्य में पहली बार वॉटर स्पोर्ट्स के लिए एक समर्पित ‘एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण केंद्र’ संचालित करने की प्रशासनिक विधा शुरू की जा रही है। इस अभिनव योजना के तहत कयाकिंग और कैनोइंग जैसी आधुनिक और ओलंपिक स्तर की खेल विधाओं में बिहार की छुपी हुई ग्रामीण प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों के लिए तैयार करने का रोडमैप तैयार किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत खिलाड़ियों का विधिक रूप से चयन करने के लिए आगामी 20 मई 2026 को भागलपुर के खेल भवन में एक विशाल और व्यापक राज्य स्तरीय चयन ट्रायल का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल से न केवल अंग प्रमंडल बल्कि पूरे बिहार के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपनी खेल क्षमताओं को नई ऊंचाई देने का एक अभूतपूर्व अवसर प्राप्त होगा।

परंपरागत नौकायन कौशल को आधुनिक वॉटर स्पोर्ट्स में बदलने की विधा

​भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिहार के विभिन्न जिलों में नदियों का एक सघन और विस्तृत जाल फैला हुआ है। गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी विशाल नदियों के तटों और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण युवाओं के दैनिक जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा नावों के संचालन और नदी की तेज धाराओं से जूझने में व्यतीत होता है। इन क्षेत्रों के बच्चों और युवाओं में पानी के उतार-चढ़ाव को समझने और नौका संचालन का एक स्वाभाविक और परंपरागत कौशल जन्मजात रूप से मौजूद रहता है। खेल विभाग ने इसी जमीनी हकीकत और प्राकृतिक कौशल को पहचानते हुए पारंपरिक नौकायन को आधुनिक ओलंपिक खेल विधाओं जैसे कयाकिंग और कैनोइंग में तब्दील करने का निर्णय लिया है।

​तकनीकी रूप से कयाकिंग और कैनोइंग दोनों ही पानी में चप्पू की मदद से चलाई जाने वाली बेहद लोकप्रिय और रोमांचक खेल गतिविधियाँ हैं, लेकिन इनके संचालन की विधा और उपकरणों में मुख्य संरचनात्मक अंतर होता है। कयाकिंग में प्रयुक्त होने वाली कयाक नाव ऊपर से पूरी तरह से बंद होती है, जिसमें खिलाड़ी के बैठने के लिए एक छोटा सा ‘कॉकपिट’ बना होता है। इसमें पैडलर नाव के भीतर अपने दोनों पैरों को आगे की ओर सीधा फैलाकर बैठता है और पानी को काटने के लिए डबल-ब्लेड यानी दोनों तरफ फलक वाले चप्पू का उपयोग करता है। इसके विपरीत, कैनोइंग में इस्तेमाल होने वाली कैनो नाव ऊपर से पूरी तरह खुली और कयाक की तुलना में थोड़ी अधिक चौड़ी होती है। इसमें बैठने की मुद्रा और चप्पू का प्रकार पूरी तरह भिन्न होता है। ग्रामीण युवाओं के इसी शारीरिक संतुलन और पानी के साथ उनके नैसर्गिक सामंजस्य को वैज्ञानिक प्रशिक्षण देकर पदक विजेता एथलीटों में बदलने के लिए एकलव्य केंद्र की स्थापना की जा रही है।

राष्ट्रीय मंच पर बिहार का प्रभावशाली प्रदर्शन बना आधार

​पिछले कुछ वर्षों के खेल आंकड़ों की विधिक समीक्षा की जाए तो यह तथ्य सामने आता है कि सीमित संसाधनों और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण केंद्रों के बावजूद कयाकिंग और कैनोइंग जैसी जटिल वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में बिहार के खिलाड़ियों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत प्रभावशाली और सराहनीय रहा है। बिहार के जांबाज खिलाड़ियों ने हालिया राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के शीर्ष राज्यों को कड़ी टक्कर देते हुए कई महत्वपूर्ण मेडल और पदक अपने नाम किए हैं। खिलाड़ियों के इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन और उनके भीतर की असीम संभावनाओं से प्रभावित होकर बिहार सरकार के खेल विभाग ने इस खेल विधा को स्थाई और संस्थागत रूप देने की योजना बनाई है। एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से अब खिलाड़ियों को उचित, महंगे और आधुनिक खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, साथ ही देश के योग्य और तकनीकी रूप से निपुण प्रशिक्षकों के माध्यम से उन्हें दैनिक रूप से कड़ा वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ और एशियाई खेलों के मंच पर तिरंगा लहरा सकें।

चयन ट्रायल की समय-सारणी, आयु सीमा और अनिवार्य विधिक दस्तावेज

​भागलपुर के खेल भवन में 20 मई 2026 को आयोजित होने वाले इस चयन ट्रायल में भाग लेने के लिए विभाग द्वारा कड़े शारीरिक और विधिक मापदंड निर्धारित किए गए हैं, ताकि पूरी तरह से वास्तविक और योग्य प्रतिभाओं का ही चयन सुनिश्चित किया जा सके:

  • आयु वर्ग और पात्रता: इस चयन प्रतियोगिता में केवल 12 से 14 आयु वर्ग के खिलाड़ी (बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में) ही भाग ले सकते हैं।
  • जन्म तिथि की विधा: चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए कट-ऑफ डेट निर्धारित की गई है। प्रतिभागी खिलाड़ी बिहार राज्य का मूल निवासी होना चाहिए और उसकी जन्म तिथि 1 जनवरी 2010 या उसके बाद की होनी अनिवार्य है। साथ ही, खिलाड़ी की जन्म तिथि 1 जनवरी 2014 के पहले की होनी चाहिए।
  • अनिवार्य दस्तावेज: ट्रायल स्थल पर रिपोर्टिंग के समय सभी खिलाड़ियों को अपने साथ मूल आधार कार्ड और उसकी छायाप्रति लाना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि खिलाड़ी ने पूर्व में किसी जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में भाग लिया है, तो उस प्रतियोगिता का आधिकारिक प्रमाण पत्र भी साथ लाना आवश्यक है, जिससे उनकी पूर्व खेल पृष्ठभूमि का विधिक मूल्यांकन किया जा सके।
  • शारीरिक परीक्षण (बैट्री टेस्ट): चयन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा खिलाड़ियों का ‘बैट्री टेस्ट’ लिया जाएगा। इस टेस्ट के अंतर्गत खिलाड़ियों की शारीरिक सहनशक्ति (Endurance), गति (Speed), चपलता (Agility), लचीलापन (Flexibility) और मांसपेशियों की ताकत का वैज्ञानिक प्रविधियों के जरिए कड़ा परीक्षण किया जाएगा, जो वॉटर स्पोर्ट्स के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती हैं।

चयनित खिलाड़ियों को बिहार सरकार देगी पूर्णतः निशुल्क विश्वस्तरीय सुविधाएं

​इस चयन प्रतियोगिता के माध्यम से जिन सर्वश्रेष्ठ बालक और बालिका खिलाड़ियों का अंतिम रूप से चयन एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण केंद्र के लिए किया जाएगा, उनके संपूर्ण विकास और प्रशिक्षण का पूरा वित्तीय और प्रशासनिक भार बिहार सरकार वहन करेगी। चयनित खिलाड़ियों को पूरी तरह से निशुल्क आधुनिक आवासीय सुविधा (हॉस्टल) प्रदान की जाएगी, जहां सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े प्रबंध होंगे। इसके साथ ही, खेल विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया उच्च प्रोटीन और कैलोरी युक्त विशिष्ट पौष्टिक भोजन (डाइट) नियमित रूप से प्रदान किया जाएगा ताकि उनके शारीरिक सौष्ठव को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।

​खिलाड़ियों की अकादमिक शिक्षा में कोई रुकावट न आए, इसके लिए उनके शिक्षण की भी समुचित व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान उपयोग में आने वाले अत्यधिक महंगे कयाक और कैनो बोट्स, अंतरराष्ट्रीय स्तर के चप्पू, लाइफ जैकेट्स और अन्य अत्याधुनिक खेल उपकरण व कीट्स पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण, बिहार पटना के द्वारा इस केंद्र के लिए विशेष रूप से योग्य और प्रमाणित राष्ट्रीय कोचों (प्रशिक्षकों) की प्रतिनियुक्ति की जा रही है, जो आधुनिक वीडियो विश्लेषण और तकनीकी विभावों के माध्यम से बच्चों की खेल प्रतिभा को तराशने का काम करेंगे।

जमीनी स्तर पर भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रशासनिक महकमा सक्रिय

​मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत शुरू की जा रही इस ऐतिहासिक खेल विधा का लाभ राज्य के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब व मध्यमवर्गीय मेधावी बच्चों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी कड़ाई से सक्रिय हो गया है। जिला खेल पदाधिकारी जय नारायण कुमार के द्वारा इस संदर्भ में व्यापक प्रशासनिक प्रयास शुरू किए गए हैं। ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग्य खिलाड़ी इस विधिक चयन प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकें और इस कल्याणकारी सरकारी योजना का सीधा लाभ उठा सकें, इसके लिए जिला खेल कार्यालय द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को एक विशेष अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया है।

​इस अनुरोध पत्र के आलोक में जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आधिकारिक निर्देश जारी किया गया है कि वे अपने-अपने विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों के माध्यम से 12 से 14 आयु वर्ग के उन बच्चों को चिन्हित करें जो तैराकी, नौकायन या शारीरिक रूप से अत्यधिक दक्ष हैं। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे सभी बच्चों की सूची तैयार कर उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ 20 मई को भागलपुर खेल भवन में आयोजित होने वाले ट्रायल में शामिल होने के लिए प्रेरित और विधिक रूप से अग्रसारित करें। जिला खेल पदाधिकारी जय नारायण कुमार ने बताया कि विभाग का मुख्य लक्ष्य खेल के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देना है ताकि नदियों के किनारे रहने वाले मल्लाहों और आम किसानों के बच्चे भी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतकर ला सकें।

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