​पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे हादसे के मृतकों का शव पहुंचते ही चीख उठा सीवान का ग्यासपुर गांव, एक साथ उठीं चार अर्थियां

सीवान/सिसवन, 17 मई 2026। बिहार के सीवान जिले के सिसवन थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्यासपुर गांव में रविवार का दिन अन्य सामान्य दिनों जैसा नहीं था। पूरे गांव की हवाओं में एक ऐसा मर्मांतक और खौफनाक सन्नाटा पसरा हुआ था, जो किसी बहुत बड़ी त्रासदी की गवाही दे रहा था। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में शनिवार को हुए भीषण और मर्मभेदी सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले मनीष श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कंचन श्रीवास्तव और दो मासूम बेटियों— अदिति व आस्था के शव जैसे ही दो अलग-अलग एंबुलेंस के जरिए दोपहर करीब 3:30 बजे उनके पैतृक पैतृक पैतृक गांव ग्यासपुर पहुंचे, वैसे ही संपूर्ण प्रक्षेत्र हजारों नागरिकों की मर्मस्पर्शी चीख-पुकार से दहल उठा। महज एक दिन पहले तक जो परिवार दिल्ली-एनसीआर में हंसता-खेलता और सुनहरे भविष्य के सपने संजोता हुआ जीवन जी रहा था, आज उसकी अर्थियां एक साथ सज रही थीं। इस हृदयविदारक दृश्य के बीच श्मशान घाट पर जब एक ही परिवार के चार सदस्यों की चिताएं एक साथ कतार में जलाई गईं, तो वहां मौजूद जनसमूह की आंखें पूरी तरह से पथरा गईं और सामाजिक ताने-बाने में संवेदना का सागर उमड़ पड़ा।

वृद्ध माता-पिता का मर्मांतक विलाप: “मुझे भी इन्हीं के साथ विदा कर दो”

​एंबुलेंस के सायरन की आवाज जैसे ही गांव की सीमाओं में गूंजी, घरों के भीतर बंद लोग रोते हुए सड़कों की ओर दौड़ पड़े। जब दोनों एंबुलेंसों के पिछले दरवाजों को खोलकर चारों कफन में लिपटे शवों को एक-एक कर पैतृक आवास के प्रांगण में उतारा गया, तो मनीष के बुजुर्ग पिता प्रेम लाल श्रीवास्तव और वृद्ध माता शीला देवी का कलेजा पूरी तरह से फट गया। अपने बुढ़ापे की एकमात्र लाठी यानी जवान बेटे, बहू और दो सगी मासूम पोतियों के निष्प्राण शरीरों को अपने ठीक सामने देखकर दोनों वृद्ध माता-पिता पूरी तरह से अपनी सुध-बुध खो बैठे। वे बार-बार बेजान शरीरों से लिपटकर अपनी छाती पीट रहे थे, जिन्हें संभालना और ढांढस बंधाना स्थानीय ग्रामीणों और सगे-संबंधियों के लिए पूरी तरह से असंभव साबित हो रहा था।

व्यथित पिता प्रेम लाल श्रीवास्तव का करुण क्रंदन:

“मेरे कमाऊ बेटे, सुशील बहू और इन नन्हीं पोतियों को तुम लोग लकड़ियों के इस ढेर पर कहाँ ले जा रहे हो? इन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था? अगर विधाता को यही मंजूर था, तो मुझे भी इनके साथ ले चलो और इसी श्मशान की अग्नि में इन्हीं के साथ मुझे भी विदा कर दो, अब इस सूने घर में मैं किसके सहारे जिंदा रहूंगा।”

 

​इस दृश्य को देखकर अंतिम विदाई देने के लिए प्रमंडल के कोने-कोने से आए हजारों ग्रामीणों, नाते-रिश्तेदारों और प्रशासनिक विभावों से जुड़े लोगों की आंखें पूरी तरह से डबडबा गईं और श्मशान घाट पर उपस्थित हर व्यक्ति फफक-फफक कर रो पड़ा। धार्मिक और सामाजिक रस्मों के विलेखों को पूरा करने के बाद, चारों शवों को मुखाग्नि मनीष श्रीवास्तव के बड़े भाई जीवन लाल श्रीवास्तव ने अत्यंत भारी मन से दी।

16 वर्षों से फरीदाबाद में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे मनीष

​पारिवारिक और स्थानीय कड़ियों से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, मृतक मनीष श्रीवास्तव अपने जीवन के पिछले 16 वर्षों से लगातार हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में सपरिवार स्थाई रूप से रह रहे थे। वे देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ओखला स्थित ‘ट्राईयू कस्टम टआईसीडी’ नामक एक प्रतिष्ठित कमर्शियल कंपनी में एक जिम्मेदार पद पर कार्यरत थे और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर अपने परिवार का भरण-पोषण अत्यंत सुचारु रूप से कर रहे थे। मनीष श्रीवास्तव का अपने पैतृक गांव ग्यासपुर आना-जाना बहुत ही सीमित और कम था। वे आमतौर पर केवल सगे-संबंधियों या नाते-रिश्तेदारी में होने वाले बड़े शादी-विवाह के आयोजनों अथवा किसी विशेष पारिवारिक संकट या श्राद्ध कार्यक्रमों के दौरान ही छुट्टी लेकर गांव आया करते थे, जिसके कारण ग्रामीण उन्हें बेहद शालीन और गंभीर स्वभाव का मानते थे।

नाना के ब्रह्मभोज में आए थे बिहार, लौटते समय काल ने एक्सप्रेस-वे पर घेरा

​इस भयानक हादसे की पृष्ठभूमि अत्यंत विडंबनापूर्ण और नियति के क्रूर खेल को दर्शाती है। मनीष श्रीवास्तव महज चार दिन पहले ही फरीदाबाद से छुट्टी लेकर बिहार के छपरा (सारण) जिले के मढ़ौरा स्थित अपने सगे मामा के घर आए हुए थे। मढ़ौरा में उनके स्वर्गीय नाना का विधिक ब्रह्मभोज (श्राद्ध कर्म) कार्यक्रम आयोजित था, जिसमें सम्मिलित होना उनके लिए अनिवार्य था। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए मनीष के बुजुर्ग माता-पिता प्रेम लाल श्रीवास्तव और शीला देवी भी अपने गांव ग्यासपुर से मढ़ौरा पहुंचे थे। शनिवार की सुबह ब्रह्मभोज की सभी विधिक कड़ियां समाप्त होने के बाद, मनीष अपनी कार से अपने माता-पिता को साथ लेकर छपरा शहर स्थित अपनी ससुराल पहुंचे, जहां उन्होंने सभी स्थानीय संबंधियों से बड़े ही प्रेमभाव से मेल-मिलाप किया।

​छपरा शहर से प्रस्थान करते समय मनीष ने एक सुरक्षात्मक और व्यावहारिक विधा अपनाई; उन्होंने अपने बुजुर्ग माता-पिता की शारीरिक शिथिलता और लंबी दूरी के सफर की थकान को देखते हुए उन्हें कार में बैठाने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सुरक्षित बस और ट्रेन माध्यम) से सीवान के पैतृक गांव ग्यासपुर के लिए रवाना कर दिया। माता-पिता को सुरक्षित विदा करने के बाद, मनीष खुद अपनी कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे और अपनी पत्नी कंचन, दोनों बेटियों अदिति व आस्था तथा कार में सवार एक अन्य व्यक्ति के साथ वापस फरीदाबाद लौटने के लिए एक्सप्रेस-वे की ओर बढ़ गए। उन्हें कतई अंदाजा नहीं था कि माता-पिता को सुरक्षित भेजने का यह निर्णय उनके जीवन का अंतिम विधिक फैसला साबित होगा।

135 किमी/घंटे की अनियंत्रित रफ्तार बनी काल, खड़े ट्रक में समाई कार

​ससुराल से फरीदाबाद लौटने के क्रम में जैसे ही मनीष श्रीवास्तव की कार उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले कंधरापुर थाना क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के माइलस्टोन संख्या 238 (किलोमीटर 238.5) के पास पहुंची, वहां रफ्तार का एक बेहद खौफनाक और जानलेवा कहर देखने को मिला। एक्सप्रेस-वे के सुरक्षा सर्विलांस और प्रारंभिक तकनीकी इनपुट्स के अनुसार, उस समय कार की गति लगभग 135 किलोमीटर प्रति घंटा के अत्यधिक तीव्र और खतरनाक विधिक स्तर पर थी। इस अत्यधिक तेज गति के कारण ढलान और पुल के समीप चालक अचानक वाहन पर से अपना भौतिक संतुलन और नियंत्रण पूरी तरह से खो बैठा।

​गति इतनी तीव्र थी कि अनियंत्रित हो चुकी कार सीधे सड़क के किनारे (इमरजेंसी लेन) पूर्व से खड़ी राजस्थान पंजीकरण (नंबर) के एक भारी मालवाहक ट्रक के पिछले हिस्से में अत्यधिक वेग के साथ भीतर घुस गई। यह रियर-एंड कोलिजन इतना भीषण और भयानक था कि धातु की बनी कार के परखच्चे उड़ गए और वह पूरी तरह से लोहे के मलबे में तब्दील हो गई। कार की छत और अगला हिस्सा ट्रक के नीचे बुरी तरह फंस जाने के कारण कार के भीतर सवार मनीष श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कंचन, दोनों मासूम बेटियों सहित कुल पांचों लोगों की बिना किसी चिकित्सीय उपचार का मौका मिले, घटना स्थल पर ही दर्दनाक और मर्मभेदी मौत हो गई। उत्तर प्रदेश की कंधरापुर थाना पुलिस क्रेन और गैस कटर के माध्यम से घंटों मशक्कत कर शवों को मलबे से बाहर निकाल सकी थी, जिसके बाद पोस्टमार्टम की विधिक प्रक्रियाएं पूरी कर रविवार को शवों को बिहार भेजा गया।

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