
पटना, 17 मई 2026। बिहार में चिलचिलाती धूप, भीषण उमस और पछुआ हवा के थपेड़ों से परेशान नागरिकों के लिए मौसम के मिजाज में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव आने की विधिक संभावना बन गई है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी किए गए ताजा आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, आगामी 20 मई से लेकर 23 मई तक पूरे सूबे के भीतर वायुमंडलीय प्रणालियों में भारी उथल-पुथल देखने को मिलेगी। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त पुरवैया हवा और स्थानीय स्तर पर बने अत्यधिक तापमान के विभावों के कारण राज्य के सभी प्रमंडलों में मौसम का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ने वाला है।
मौसम वैज्ञानिकों ने संकेत दिए हैं कि इस चार दिवसीय अवधि के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में मध्यम से अत्यधिक भारी वर्षा, 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी धूल भरी आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का भयानक प्रहार देखने को मिल सकता है। आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र ने सामूहिक रूप से एडवाइजरी जारी करते हुए जिला प्रशासनों को सतर्क रहने का विधिक हुक्म दिया है ताकि कृषि विसंगतियों और जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सके।
20 मई को बरसेगा कुदरत का कहर: उत्तर और सीमांचल के 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के सांख्यिकीय और तकनीकी मॉडलों के अनुसार, 20 मई का दिन संपूर्ण बिहार के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण और खतरनाक सिद्ध होने वाला है। इस दिन राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर कालवैशाखी जैसी तीव्र मौसमी विधा सक्रिय हो रही है। मौसम विभाग ने उत्तर बिहार, कोसी और सीमांचल के कुल 11 बड़े जिलों के लिए अत्यंत कड़ा ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
ऑरेंज अलर्ट वाले मुख्य प्रक्षेत्र:
- पश्चिमी और पूर्वी चंपारण: इन दोनों जिलों में नेपाल की तराई से सटे होने के कारण घने बादलों की आवाजाही और मूसलाधार बारिश की संभावना सबसे प्रबल है।
- गोपालगंज, सीवान और सारण: छपरा प्रमंडल के इन तीन जिलों में पुरवैया हवा की गति सबसे तीव्र होगी, जिसके कारण धूल भरी आंधी का विभाव उत्पन्न होगा।
- सुपौल, अररिया, सहरसा और मधेपुरा: कोसी प्रमंडल के इन जिलों में वज्रपात की तीव्रता सबसे अधिक आंकी गई है।
- किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार: सीमांचल के इन पूर्वी पॉकेट्स में भारी जलजमाव और तेज गरज के साथ वर्षा का विधिक अनुमान है।
इन 11 जिलों में आंधी की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो कमजोर मकानों के छप्परों, पेड़ों और बिजली के तारों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
इसके साथ ही, राज्य की प्रशासनिक राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा, मधुबनी, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, नवादा, जमुई, बांका, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, भोजपुर और बक्सर सहित शेष सभी जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। इन क्षेत्रों में भी आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और रह-रहकर तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।
21 मई को बदलेगी हवा की दिशा: पूर्वी और दक्षिणी बिहार के प्रक्षेत्रों में आफत बरकरार
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, 21 मई को मौसमी कड़ियों का केंद्र बिंदु आंशिक रूप से स्थानांतरित होगा। इस दिन राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों को इस भीषण प्रलय से आंशिक विधिक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन उत्तर-पूर्वी और संपूर्ण दक्षिणी बिहार के जिलों में कुदरत का कड़ा पहरा जारी रहेगा। विभाग ने इस दिन के लिए सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, नवादा, जमुई और बांका में येलो अलर्ट को विस्तारित किया है।
इन प्रक्षेत्रों में हवा की रफ्तार थोड़ी कम होकर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा के विधिक स्तर पर आ सकती है, परंतु बादलों का गर्जन और बिजली गिरने की घटनाएं थमती हुई नजर नहीं आएंगी। विशेष रूप से भागलपुर, बांका और जमुई के पहाड़ी प्रक्षेत्रों में अचानक आने वाले बादलों के कारण फसलों, विशेषकर आम और लीची के बागानों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसके विपरीत, बक्सर, कैमूर और रोहतास जैसे पश्चिमी जिलों में इस दिन मौसम सामान्य और आंशिक शुष्क बना रहेगा।
22 और 23 मई का रोडमैप: सीमांचल में लगातार बारिश के बाद सभी 38 जिलों में सामूहिक अलर्ट
मौसम विभाग के पूर्वानुमान विलेख के अनुसार, 22 मई को मौसमी विक्षोभ का दायरा अस्थाई रूप से थोड़ा संकुचित होगा। इस दिन केवल सीमांचल और कोसी प्रमंडल के सात जिलों— सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और मधेपुरा में ही बादलों की विधा सक्रिय रहेगी और येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। राज्य के बाकी 31 जिलों में धूप खिलेगी और लोगों को जलजमाव व आंधी से व्यावहारिक मुक्ति मिलती हुई महसूस होगी।
परंतु, यह राहत बेहद क्षणिक साबित होने वाली है। मौसम की सबसे बड़ी और अप्रत्याशित करवट 23 मई को देखने को मिलेगी, जब बंगाल की खाड़ी से आने वाला एक नया कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) पूरे बिहार को अपनी चपेट में ले लेगा। 23 मई को बिहार के सभी 38 जिलों में एक साथ येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसका सीधा विधिक अर्थ यह है कि 23 मई को राज्य का कोई भी कोना इस मौसमी उथल-पुथल से अछूता नहीं रहेगा। पूरे सूबे में एक बार फिर से तेज आंधी, मूसलाधार बारिश, चक्रवाती हवाएं और आकाशीय बिजली का सामूहिक तांडव देखने को मिलेगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को भीषण गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन दैनिक जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
आपदा प्रबंधन विभाग की कड़ी एडवाइजरी: सुरक्षा मानकों का अनुपालन अनिवार्य
बिहार में मानसून पूर्व (प्री-मानसून) की इस अवधि में बिजली गिरने के कारण हर साल सैकड़ों ग्रामीण नागरिकों की असामयिक मृत्यु हो जाती है। इस गंभीर विधिक और भौतिक खतरे को देखते हुए पटना मौसम विज्ञान केंद्र और आपदा प्रबंधन विंग ने आम जनता के लिए कड़े सुरक्षात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं:
- खुले मैदानों से दूरी: जब बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो या बिजली चमकती हुई दिखाई दे, तो खेतों में काम कर रहे किसान और आम नागरिक तुरंत खुले मैदानों से हटकर किसी पक्के मकान की शरण लें।
- पेड़ों और खंभों के नीचे न जाएं: बिजली गिरने की स्थिति में ऊंचे पेड़ और लोहे के बिजली के खंभे सबसे बड़े संवाहक (कंडक्टर) का कार्य करते हैं। इनके नीचे खड़े होना जानलेवा साबित हो सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग: खराब मौसम के दौरान घरों के भीतर भी टेलीविजन, कंप्यूटर और रेफ्रिजरेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विधिक प्लग को मुख्य बोर्ड से निकाल देना चाहिए और मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए।
- अनावश्यक यात्राओं पर प्रतिबंध: बहुत ज्यादा जरूरी विधिक या चिकित्सीय कार्य न होने की स्थिति में आंधी और बारिश के दौरान घरों से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें, विशेषकर दुपहिया वाहनों का परिचालन इस मौसम में अत्यंत संदेहास्पद और असुरक्षित माना जाता है।
सभी जिलों के समाहर्ताओं (डीएम) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रखंड विकास पदाधिकारियों और अंचलाधिकारियों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर लाउडस्पीकर से इस मौसमी चेतावनी का लगातार प्रचार-प्रसार सुनिश्चित कराएं।


