​सीतामढ़ी में मुठभेड़ में ढेर कुख्यात सरोज राय के पट्टीदार की दिनदहाड़े हत्या, राकेश राय के माता-पिता समेत 4 गिरफ्तार

सीतामढ़ी/मुजफ्फरपुर, 17 मई 2026। बिहार के सीमावर्ती जिलों में आपराधिक सिंडिकेट और आपसी प्रतिशोध की आग थमती नजर नहीं आ रही है। सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिले की सीमा पर स्थित महिन्दवारा थाना क्षेत्र में शनिवार की दोपहर एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने पूरे प्रक्षेत्र की कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। नेउरी सिरखिरिया संपर्क पथ पर घात लगाकर बैठे अज्ञात हथियारबंद अपराधियों ने बतरौली गांव के रहने वाले 46 वर्षीय किसान रामाशंकर राय को सरेआम गोलियों से भून दिया। अपराधियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए तड़ातड़ सात गोलियां दागीं, जिससे रामाशंकर राय की मौके पर ही मौत हो गई।

​यह हत्याकांड केवल एक साधारण भूमि या पारिवारिक विवाद का नतीजा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके तार बिहार और हरियाणा तक फैले अंतर-राज्यीय आपराधिक इतिहास से जुड़े हुए हैं। मृतका रामाशंकर राय पूर्व में गुरुग्राम में एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में मारे गए दो लाख रुपये के इनामी कुख्यात गैंगस्टर सरोज राय और कई संगीन मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे एक अन्य कुख्यात अपराधी राकेश राय के सगे पट्टीदार (रिश्तेदार) थे। इस वीभत्स हत्याकांड के बाद पूरे महिन्दवारा और रुन्नीसैदपुर प्रक्षेत्र में भारी दहशत का माहौल है और दो विरोधी गुटों के बीच खूनी गैंगवार छिड़ने की गहरी आशंका जताई जा रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार मुख्य संदेहास्पद लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

आम के बगीचे से घर लौटने के दौरान घेरकर दागीं सात गोलियां

​वारदात के संदर्भ में स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अनुसंधान से मिली प्राथमिक विवरणी के अनुसार, शनिवार की सुबह सब कुछ पूरी तरह सामान्य था। रामाशंकर राय खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और उनका व्यवहार गांव में बेहद शांत माना जाता था। शनिवार की दोपहर करीब 1:00 से 2:00 बजे के बीच वे अपने घर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित अपने निजी आम के बगीचे की ओर टहलने और पेड़ों की रखवाली करने के लिए गए थे। दोपहर बाद जब वे बगीचे का मुआयना करने के बाद मुख्य नेउरी सिरखिरिया पथ से होते हुए पैदल अपने घर की ओर वापस लौट रहे थे, तभी पहले से मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और सड़क किनारे झाड़ियों की आड़ में घात लगाए बैठे अपराधियों ने उन्हें रोक लिया।

​इससे पहले कि रामाशंकर राय कुछ समझ पाते या वहां से भागने का प्रयास करते, अपराधियों ने अपनी कमर से आधुनिक पिस्तौल निकालकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों का मुख्य उद्देश्य उनकी जान लेना ही था, इसलिए बेहद करीब से एक के बाद एक सात गोलियां उनके शरीर में उतार दी गईं। गोलियां सीधे रामाशंकर राय के गले और सीने के मुख्य हिस्सों में लगीं, जिससे उनके आंतरिक अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। खून से लथपथ रामाशंकर राय तड़पते हुए सड़क किनारे मुख्य धरातल पर गिर पड़े और कुछ ही सेकंड के भीतर उनकी सांसें पूरी तरह थम गईं। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी अपने हथियारों को लहराते हुए तेज गति से मोटरसाइकिल चलाते हुए मुजफ्फरपुर सीमा की ओर भाग निकले। कुछ समय बाद जब उस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक शव को लावारिस और रक्तरंजित स्थिति में देखा, तो उन्होंने शोर मचाया, जिसके बाद परिजनों और महिन्दवारा थाना पुलिस को इसकी आधिकारिक सूचना दी गई।

गुरुग्राम एनकाउंटर और रंगदारी सिंडिकेट से जुड़ी हैं मर्डर की कड़ियां

​महिन्दवारा पुलिस और जिला खुफिया विंग के अधिकारियों ने जब मृतक की पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि की पड़ताल की, तो मामले के पीछे एक भयानक आपराधिक इतिहास की परतें खुलने लगीं। मृतका रामाशंकर राय का परिवार बतरौली गांव के उस बड़े कुख्यात घराने से ताल्लुक रखता है, जिसका खौफ कभी उत्तर बिहार के कई जिलों में हुआ करता था। रामाशंकर राय मूल रूप से उस सरोज राय के पट्टीदार थे, जिसने बिहार के एक प्रभावशाली विधायक पंकज मिश्रा से फोन पर करोड़ों रुपये की विधिक रंगदारी मांगी थी और पैसे न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

​विधायक पंकज मिश्रा से रंगदारी मांगने के इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद बिहार पुलिस की सिफारिश पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सरोज राय के खिलाफ देशव्यापी लुकआउट नोटिस जारी किया था और उस पर दो लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था। पिछले दिनों एसटीएफ की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर हरियाणा के गुरुग्राम शहर में घेराबंदी की थी, जहां आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस बल पर फायरिंग करने के दौरान सरोज राय को मुठभेड़ (एनकाउंटर) में ढेर कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, इसी परिवार का एक अन्य सदस्य राकेश राय भी वर्तमान समय में कई जिलों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है और उस पर हत्या, लूट व रंगदारी के आधा दर्जन से अधिक विधिक मामले दर्ज हैं। राकेश राय पिछले कई महीनों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा है। पुलिस को संदेह है कि सरोज राय की मौत और राकेश राय के भूमिगत होने के बाद परिवार के भीतर वर्चस्व, जमीनी हिस्सेदारी और पुलिस मुखबिरी को लेकर कोई आंतरिक कलह चल रही थी, जो इस खूनी अंजाम तक पहुंची।

SIT की कड़ाई: कुख्यात राकेश के माता-पिता समेत चार विधिक रूप से गिरफ्तार

​घटनास्थल पर पहुंचे जिला पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने मामले की विधिक संवेदनशीलता और गैंगवार भड़कने की आशंका को देखते हुए तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। एसआईटी ने तकनीकी विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड की मदद से नेउरी सिरखिरिया पथ से कई खोखे और अपराधियों के पैरों के निशान एकत्र किए हैं। मृतक के परिजनों और बेटों ने पुलिस के समक्ष दिए गए अपने प्रारंभिक विधिक बयान में सीधे तौर पर फरार कुख्यात राकेश राय और उसके करीबियों को इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार बताया है।

​परिजनों के बयान और स्थानीय खुफिया इनपुट्स के आधार पर एसआईटी की टीम ने शनिवार की देर रात बतरौली गांव और उसके आसपास के कई संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस विधिक दबिश के दौरान पुलिस ने फरार कुख्यात राकेश राय के पिता धनेश्वर राय के भाइयों के विभावों और राकेश के सगे माता-पिता सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी सूचना के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच में इस बात के पुख्ता और विधिक साक्ष्य मिले हैं कि जेल के भीतर और बाहर सक्रिय अपराधियों के माध्यम से इस पूरी हत्या की साजिश रची गई थी और इसमें राकेश राय की सीधी संप्लीतता दर्ज की गई है। गिरफ्तार किए गए चारों लोगों से महिन्दवारा थाने के एक गुप्त कक्ष में रखकर पूछताछ की जा रही है ताकि शूटरों के नाम और उनकी वर्तमान अवस्थिति का पता लगाया जा सके।

शिक्षिका पत्नी और होनहार बेटों का रो-रोकर बुरा हाल, गांव में पुलिस कैंप

​इस खौफनाक वारदात ने न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि एक अत्यंत सम्मानित और शिक्षित मध्यवर्गीय परिवार को भी गहरे अवसाद में धकेल दिया है। हालांकि रामाशंकर राय का ताल्लुक कुख्यात अपराधियों की पट्टीदारी से था, लेकिन उनका अपना व्यक्तिगत परिवार पूरी तरह से शिक्षा और सरकारी सेवाओं से जुड़ा हुआ है। मृतका की पत्नी स्थानीय सरकारी विद्यालय में एक सम्मानित शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं और बच्चों को शिक्षित करने का कार्य करती हैं।

​इसके साथ ही, रामाशंकर राय के दोनों बेटे भी समाज में अपनी मेहनत के बल पर प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचे हैं। उनका बड़ा पुत्र सतीश कुमार एक कुशल लैब टेक्नीशियन के रूप में चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा है, जबकि उनका छोटा पुत्र रितेश कुमार भारतीय रेलवे की विधिक सेवा के तहत वर्तमान में पंजाब प्रांत में कार्यरत है। शनिवार की दोपहर जैसे ही इस दुखद हादसे की खबर पंजाब और स्थानीय स्तर पर बेटों को मिली, वे पूरी तरह टूट गए। घर के आंगन में शिक्षिका पत्नी और बेटों का करुण क्रंदन देखकर सांत्वना देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें भी पूरी तरह नम हो गईं।

​संभावित प्रतिशोध और गैंगवार की आशंका को देखते हुए बतरौली गांव और नेउरी सिरखिरिया पथ के संवेदनशील चौराहों पर जिला पुलिस मुख्यालय द्वारा अतिरिक्त सशस्त्र पुलिस बलों की प्रतिन्यूक्ति कर दी गई है। महिन्दवारा और रुन्नीसैदपुर थानों की पुलिस गाड़ियां लगातार क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर रही हैं ताकि आम नागरिकों के भीतर बैठे डर को दूर किया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी अभी भी जारी है।

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