बिहार में जमीन सर्वे को लेकर सरकार सख्त, पूरे राज्य में चलेगा स्पेशल ड्राइव; CM सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम

पटना। बिहार में जमीन सर्वे और भूमि परिमार्जन के काम को लेकर सरकार अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। लंबे समय से लंबित पड़े भूमि विवादों, जमाबंदी सुधार और सर्वे कार्यों को तेजी से पूरा कराने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर साफ शब्दों में निर्देश दिया है कि पूरे बिहार में विशेष अभियान चलाकर जमीन सर्वे का कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भूमि सर्वे और परिमार्जन से जुड़े कामों में अब किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार में बढ़ते भूमि विवादों और उससे जुड़ी आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए जमीन सर्वे का काम बेहद जरूरी है। सरकार चाहती है कि लोगों को जमीन संबंधी मामलों में जल्द राहत मिले और वर्षों से चल रहे विवादों का समाधान हो सके।

राजधानी पटना में आयोजित बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की और अलग-अलग जिलों में चल रहे सर्वे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां भी जरूरत हो वहां अतिरिक्त कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था की जाए ताकि सर्वे कार्य में तेजी लाई जा सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि भूमि परिमार्जन और सर्वे से जुड़ा हर काम समय सीमा के भीतर पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिले में कार्य की गति धीमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री का यह सख्त रुख बताता है कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है।

बैठक के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में भूमि विवादों की वजह से लगातार तनाव और आपराधिक घटनाएं सामने आती रहती हैं। सरकार का मानना है कि यदि जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट और अपडेट हो जाए तो बड़ी संख्या में विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

दिलीप जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भूमि सर्वे और भूमि परिमार्जन का काम मिशन मोड में पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए पूरे बिहार में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जाएगा और जिन लोगों की शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर समाधान दिया जाएगा।

सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों के निष्पादन के लिए 30 जून तक विशेष लक्ष्य भी तय किया है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ई-मापी, जमाबंदी सुधार और लंबित आवेदनों का जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए। इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट करने और ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य के कई जिलों में अभी भी पुराने रिकॉर्ड, सीमांकन विवाद और जमाबंदी त्रुटियों की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में एक ही जमीन पर एक से अधिक दावेदार सामने आ जाते हैं, जिससे विवाद बढ़ता है। सरकार चाहती है कि सर्वे और रिकॉर्ड सुधार के जरिए इन समस्याओं को स्थायी रूप से खत्म किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में भूमि विवाद लंबे समय से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहे हैं। गांवों से लेकर शहरों तक जमीन को लेकर मुकदमे और हिंसक घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर जमीन सर्वे और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया से आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।

राज्य सरकार अब तकनीक का इस्तेमाल कर भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है। ई-मापी और डिजिटल जमाबंदी व्यवस्था के जरिए लोगों को ऑनलाइन सुविधा देने पर जोर दिया जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार कम होने और प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक कई जिलों में विशेष टीमों का गठन भी किया जा सकता है जो गांव-गांव जाकर सर्वे और रिकॉर्ड सत्यापन का काम करेंगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि आम लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और समाधान में अनावश्यक देरी न हो।

सरकार की इस पहल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी काफी उम्मीदें बढ़ी हैं। लंबे समय से जमीन विवाद झेल रहे लोगों का मानना है कि यदि सही तरीके से सर्वे और रिकॉर्ड अपडेट हो जाए तो कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम हो सकते हैं। वहीं किसानों को भी अपनी जमीन के कागजात दुरुस्त कराने में आसानी होगी।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतने बड़े स्तर पर सर्वे अभियान चलाना आसान नहीं होगा। इसके लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षित कर्मचारी और मजबूत निगरानी व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी। यदि जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी रही तो काम में देरी हो सकती है।

फिलहाल सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जमीन सर्वे और भूमि परिमार्जन का कार्य अब शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सख्त चेतावनी के बाद विभागीय अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में पूरे बिहार में जमीन सर्वे को लेकर विशेष अभियान तेज होने की संभावना है।

सरकार का दावा है कि अभियान पूरा होने के बाद भूमि रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होंगे, विवाद कम होंगे और आम लोगों को प्रशासनिक स्तर पर राहत मिलेगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार तय समय सीमा के भीतर इस बड़े अभियान को कितना सफल बना पाती है।

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