​भागलपुर में अनोखी त्रासदी: मंदिर में शादी के आधे घंटे बाद ही प्रेमी जोड़े ने खाया जहर, युवक की मौत, प्रेमिका मायागंज में वेंटिलेटर पर

कहलगांव/भागलपुर, 16 मई 2026। भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल प्रक्षेत्र से एक ऐसी स्तब्ध कर देने वाली और अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने सामाजिक ताने-बाने और युवा मानसिकता के अंतर्विरोधों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कहलगांव के एक स्थानीय मंदिर में संपूर्ण रीति-रिवाजों के साथ दांपत्य सूत्र में बंधने के महज तीस मिनट के भीतर ही एक नवविवाहित प्रेमी जोड़े ने अज्ञात कारणों और गहरे मानसिक दबाव के चलते सामूहिक रूप से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। इस आत्मघाती कदम के कारण जहां विवाह मंडप की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं, वहीं इलाज के दौरान ही प्रेमी की दर्दनाक मौत हो गई। दूसरी ओर, गंभीर रूप से प्रभावित प्रेमिका वर्तमान में जीवन और मृत्यु के बीच बेहद बारीक लकीर पर खड़ी है। उसे बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के आपातकालीन सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसे जीवनदान देने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। इस घटना ने पूरे अनुमंडल क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और हर कोई इस भयानक त्रासदी के पीछे छिपे वास्तविक कारणों को जानने के लिए उत्सुक है।

कहलगांव में पढ़ाई के दौरान परवान चढ़ा था प्रेम प्रसंग

​इस खौफनाक और विडंबनापूर्ण घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने पर पता चलता है कि मृत युवक की पहचान कहलगांव अनुमंडल के अमडंडा थाना क्षेत्र के निवासी सुभाष कुमार सिंह के पुत्र रजनीकांत के रूप में की गई है। रजनीकांत मेधावी था और अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से कहलगांव के शहरी इलाके में एक किराए का कमरा लेकर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। इसी शैक्षणिक प्रवास के दौरान उसकी मुलाकात बांका जिले के जगरा क्षेत्र की रहने वाली अमृता कुमारी से हुई। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो वक्त के साथ एक बेहद गहरे प्रेम संबंध में तब्दील हो गया।

​स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों पिछले काफी समय से एक-दूसरे के साथ निरंतर संपर्क में थे और अपने जीवन की हर छोटी-बड़ी बातें साझा करते थे। रजनीकांत के किराए के कमरे के आसपास रहने वाले लोगों को भी उनके इस गहरे लगाव का आंशिक अहसास था, लेकिन किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि इस प्रेम कहानी का अंत इतना वीभत्स और त्रासद होगा। दोनों ने समाज और अपने-अपने रूढ़िवादी परिवारों की संभावित बंदिशों को देखते हुए एक अत्यंत आत्मघाती और गुप्त विधा तैयार की, जिसका उद्देश्य किसी भी कीमत पर एक-दूसरे से अलग न होना था।

गोपनीय तरीके से रचाई शादी और सात फेरों के बाद खाई मौत की कसमें

​शुक्रवार की सुबह दोनों ने अपने परिवारों को पूरी तरह से अंधेरे में रखते हुए और बिना किसी विधिक या सामाजिक गवाह के एक साथ जीने-मरने का अंतिम फैसला कर लिया। योजना के मुताबिक, अमृता बांका से चलकर कहलगांव पहुंची, जहां रजनीकांत पहले से उसका इंतजार कर रहा था। शुक्रवार की दोपहर करीब 3:00 बजे दोनों कहलगांव के एक स्थानीय मंदिर के परिसर में पहुंचे। वहां उन्होंने बेहद जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से भगवान को साक्षी मानकर एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली। रजनीकांत ने अमृता की मांग में सिंदूर भरा और दोनों ने दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने की विधिक धार्मिक रस्में पूरी कीं।

​प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के अनुसार, विवाह संपन्न होने के समय दोनों के चेहरों पर एक अजीब सी खामोशी और गहरा तनाव साफ देखा जा सकता था। शादी की रस्में पूरी करने के तुरंत बाद दोनों ने मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर कुछ समय तक बातचीत की। पुलिस को अंदेशा है कि इसी बातचीत के दौरान दोनों ने किसी अज्ञात सामाजिक भय या ऑनर किलिंग के डर से ग्रसित होकर पूर्व से खरीदकर रखे गए घातक कीटनाशक या जहरीले पदार्थ को निकालने की विधा अपनाई। दोपहर करीब 3:30 बजे, यानी विवाह के ठीक आधे घंटे बाद, दोनों ने एक साथ उस जहरीले पदार्थ को निगल लिया।

अस्पताल परिसर में मची अफरा-तफरी, मायागंज रेफर हुई अमृता

​जहरीला पदार्थ शरीर में फैलते ही दोनों की शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। दोनों तड़पते हुए मंदिर के समीप ही जमीन पर गिर पड़े और उनके मुंह से झाग निकलने लगा। इस खौफनाक मंजर को देखकर मंदिर में पूजा करने आए स्थानीय श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच हड़कंप मच गया। स्थानीय नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए बिना कोई समय गंवाए इसकी सूचना पुलिस को दी और दोनों को तुरंत उठाकर कहलगांव के अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया।

​अनुमंडलीय अस्पताल के डॉक्टरों ने दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) के लिए रेफर कर दिया। एम्बुलेंस के माध्यम से जब तक दोनों को भागलपुर लाया गया, तब तक जहर रजनीकांत के मुख्य अंगों को पूरी तरह से निष्क्रिय कर चुका था। मायागंज अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों ने जांच के उपरांत रजनीकांत को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अमृता की नब्ज और सांसें बेहद धीमी गति से चल रही थीं, जिसके कारण उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर डाल दिया गया। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, अमृता के शरीर में जहर की मात्रा अत्यधिक होने के कारण उसके बचने की संभावना काफी कम बनी हुई है, लेकिन क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स की टीम लगातार उसके गैस्ट्रिक लैवेज और टॉक्सिन रिमूवल की विधिक प्रक्रियाओं में जुटी हुई है।

पिता का स्तब्ध करने वाला बयान: सामाजिक और मानसिक दबाव की आशंका

​रजनीकांत की मौत और इस वीभत्स हादसे की आधिकारिक सूचना जैसे ही अमडंडा थाना क्षेत्र में रहने वाले उसके परिजनों को मिली, परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतक के पिता सुभाष कुमार सिंह, जो जीविकोपार्जन के सिलसिले में अमडंडा से बाहर रहते हैं, बदहवास हालत में देर रात भागलपुर के मायागंज अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के मर्च्युरी परिसर में बेटे के शव को देखकर सुभाष कुमार सिंह फूट-फूटकर रो पड़े और वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

​सुभाष कुमार सिंह ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपना प्रारंभिक विधिक बयान दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया कि वे काम के सिलसिले में अधिकांश समय घर से बाहर ही रहते हैं। उन्हें अपने बेटे रजनीकांत के इस प्रेम प्रसंग या अमृता के साथ उसके संबंधों के बारे में दूर-दूर तक कोई भनक या जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि परिवार में कभी भी रजनीकांत की शादी या किसी अन्य विषय को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था। पिता ने गहरा संदेह व्यक्त किया है कि दोनों ने निश्चित रूप से किसी बहुत बड़े सामाजिक बहिष्कार, दोनों परिवारों के बीच संभावित हिंसक टकराव या किसी अन्य अज्ञात मानसिक दबाव और खौफ के कारण ही यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। पिता ने पुलिस से मांग की है कि रजनीकांत के मोबाइल फोन और उसके कमरे की गहन तलाशी ली जाए ताकि इस सामूहिक खुदकुशी के पीछे के असली चेहरों का पर्दाफाश हो सके।

कहलगांव और अमडंडा पुलिस की संयुक्त विधिक जांच, सुसाइड नोट की तलाश

​इस सनसनीखेज दोहरे सुसाइड प्रयास के मामले को लेकर कहलगांव और अमडंडा थाने की पुलिस ने संयुक्त रूप से एक सघन विधिक अनुसंधान प्रारंभ कर दिया है। पुलिस की एक विशेष टीम ने शनिवार की सुबह कहलगांव स्थित रजनीकांत के उस किराए के कमरे का ताला तोड़कर सघन तलाशी ली, जहां वह रहकर पढ़ाई करता था। पुलिस कमरे से उसके शैक्षणिक दस्तावेज, डायरी और अन्य व्यक्तिगत सामग्रियां जब्त कर चुकी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दोनों ने कदम उठाने से पहले कोई सुसाइड नोट या विधिक घोषणा पत्र छोड़ा था।

​इसके साथ ही, पुलिस तकनीकी अनुसंधान (Technical Investigation) का सहारा ले रही है। रजनीकांत और अमृता दोनों के मोबाइल फोन को पुलिस ने अपने विधिक नियंत्रण में ले लिया है और उनके कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) व सोशल मीडिया चैट्स (वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम) को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि शुक्रवार की दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच दोनों की किन-किन व्यक्तियों से फोन पर बातचीत हुई थी। क्या शादी के तुरंत बाद किसी ने उन्हें फोन कर गंभीर परिणाम भुगतने या जान से मारने की विधिक धमकी दी थी, जिसके डर से टूटकर उन्होंने आधे घंटे के भीतर ही जहर खा लिया। पुलिस बांका जिले के जगरा क्षेत्र में रह रहे अमृता के परिजनों से भी संपर्क साधने का प्रयास कर रही है ताकि उनके पक्ष का विधिक बयान भी दर्ज किया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक मायागंज अस्पताल में भर्ती अमृता होश में नहीं आ जाती और उसका विधिक बयान दर्ज नहीं हो जाता, तब तक इस खौफनाक कदम के पीछे की असली सच्चाई और परिस्थितियों का पूरी तरह से साफ हो पाना मुमकिन नहीं है।

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